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Siddharthnagar News: कालानमक चावल का निर्यात शुरू, नीदरलैंड से पांच टन की डिमांड

Wed, 27 Nov 2024 12:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 27 Nov 2024 12:39 AM IST
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Export of black salt rice starts, demand for five tonnes from Netherlands
बर्डपुर क्षेत्र में मौजूद कालानमक धान।
सिद्धार्थनगर। अपने स्वाद और सुगंध के कारण विशेष पहचान रखने वाले कालानमक चावल के लिए फिर विदेशी बाजार तैयार हो रहा है। 15 माह बाद गैर बासमती चावल के अंतर्गत कालानमक के निर्यात की अनुमति मिली है और निर्यात शुरू होने वाला है। पहली बार नीदरलैंड से पांच टन चावल का ऑर्डर मिला है, जबकि अन्य देशों में भी निर्यात का प्रयास शुरू कर दिया गया है।
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साल 2018 में कालानमक चावल को ओडीओपी में शामिल किया गया। उसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई ब्रांडिंग से इसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती गई, लेकिन मिलावटखोरों ने साख गिरा दी। इसी बीच जून 2023 में कालानमक चावल के निर्यात पर ग्रहण लग गया। अब इसके निर्यात का रास्ता खुला है तो प्रशासन ने चावल की शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया है। संभावना है कि अब लंबी डंठल वाले कालानमक धान के चावल की और अच्छी कीमत मिलेगी। महत्वपूर्ण बात है कि सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल की मांग पहली बार नीदरलैंड से आई है।
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सीएफसी संचालक अभिषेक सिंह ने बताया कि कालानमक चावल का निर्यात बंद हो गया था, इसलिए फिर बाजार की तलाश करनी पड़ रही है। अब तक सिंगापुर और नेपाल में इसका निर्यात हुआ था, नीदरलैंड से ऑर्डर मिलना खुशी की बात है।
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बॉयर-सेलर मीट में तैयार होगा नया बाजार
प्रशासन की ओर से जिले में 22 दिसंबर से दो दिवसीय बॉयर-सेलर मीट का आयोजन किया जा रहा है, इसमें विभिन्न राज्यों के कारोबारियों के अलावा विदेश से भी लोग आएंगे। 50 स्टॉल लगाए जाएंगे, जिसमें जिले के किसान और बाहरी कंपनियों के स्टॉल भी होंगे। इसमें कालानमक चावल की खूबियां बताई जाएंगी। जिला प्रशासन ने स्टॉल आवंटन शुरू कर दिया है। उद्यमी मित्र डॉ. अनुज गुप्ता ने बताया कि बॉयर सीलर मीट में करीब 15 राज्यों के अतिथि आमंत्रित किए गए हैं।
25 सौ हेक्टेयर में रोपा गया है लंबी डंठल वाला धान
जिला प्रशासन ने पहली बार कालानमक धान का सर्वे कराया है। इसमें लंबी डंठल वाली पंरपरागत प्रजाति, जैविक विधि से तैयार लंबी डंठल वाली प्रजाति एवं शोध से ईजाद और अधिक पैदावार वाली प्रजाति के धान का रिकॉर्ड तैयार किया गया है। इसे कालानमक के कारोबारियों तक पहुंचाया जाएगा। उप कृषि निदेशक अरविंद विश्वकर्मा ने बताया कि जिले में 25 सौ हेक्टेयर लंबी डंठल वाली प्रजाति के कालानमक धान की रोपाई हुई है, जबकि कुल रकबा करीब 15 हजार हेक्टेयर है।
पांच कारोबारियों को एक-एक टन चावल की डिमांड का मेल
लखनऊ के वृदावन ग्राउंड में हुई कृषक भारत प्रदर्शनी में जिले के प्रगतिशील किसान महेंद्र नाथ पांडेय ने स्टॉल लगाया था, जिसमें कई देशों के कारोबारियों ने सिद्धार्थनगर के कालानमक चावल के बारे में जानकारी ली। उसी प्रदर्शनी के बाद नीदरलैंड की कंपनी ने पांच टन की डिमांड भेजी है। खास बात है कि पांच कारोबारियों से एक-एक टन कालानमक चावल का ऑर्डर का मेल आ गया है, इसके निर्यात की प्रक्रिया शुरू की गई है। उपायुक्त उद्योग उदय प्रकाश पासवान ने कालानमक चावल के निर्यात के लिए नए बाजार तैयार किए जा रहे हैं।

कोट
कालानमक चावल के निर्यात की शुरुआत हुई है। इसकी गुणवत्ता पर ध्यान दिया जा रहा है। खरीदने वालों को अच्छे स्वाद और सुगंध वाला चावल मिलेगा तो इसका बाजार और तेजी से बढ़ेगा। बॉयर-सेलर मीट में कालानमक चावल को और बेहतर प्लेटफॉर्म मिलेगा।
- डॉ. राजा गणपति आर, जिलाधिकारी
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