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Siddharthnagar News: पट्टाधारकों की धौंस, विवाद के बाद भी नहरों में नहीं पहुंचा पानी

Mon, 04 Sep 2023 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Mon, 04 Sep 2023 12:19 AM IST
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Even after the dispute, water did not reach the canals
बर्डपुर क्षेत्र में सूखी नहर। संवाद
सिद्धार्थनगर। एक तरफ बारिश नहीं होने से फसल सूख रही है, वहीं अंग्रेजी हुकूमत में खेतों की सिंचाई के लिए बर्डपुर क्षेत्र में स्थापित 10 सागरों से निकली नहरें भी सूखी हैं। जिससे यह नहरें किसानों के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। बीते दिनों इन सागरों की नहरों में पानी छोड़ने के लिए ड्रेनेज खंड के जेई और मत्स्य पालन पट्टाधारक के बीच विवाद हो गया था। विभाग का कहना था कि पट्टाधारक ताल का पानी नहरों में मनमाने तरीके से रोक और निकाल रहे हैं। जिससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही।
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नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र से आने वाले बारिश के पानी को संग्रहित करने को बर्डपुर क्षेत्र में जमींदारी नहर प्रणाली के तहत 500 हेक्टेयर में स्थापित 10 सागरों से 40 नहरें निकली है। इस संग्रहित जल से 243 किमी लंबी इन नहरों के माध्यम से आसपास के सैंकड़ों गांवों की 30 हजार हेक्टेयर से अधिक खेतों की सिंचाई होती थी। मात्र सिंचाई के लिए बने बजहा, मझौली, बटुआ, मरथी, महली, शिवपति, सेमरा, सिसवा, मसई व मोती सागरों में पिछले कुछ वर्षों से मछली पालन का पट्टा होने लगा है। तभी से मछली पालन की नीलामी लेने वाले यह पट्टाधारक मनमाने तरीके से इन सागरों का पानी उपयोग करते हैं। पट्टाधारक मछली पालने के लिए जरूरी समय के अनुसार पानी रोकते और निकालते हैं, जिसका नतीजा यह है कि समय से नहरों में पानी नहीं पहुंचने के कारण किसानों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे यह सागर और नहरें बेमानी साबित हो रही हैं।
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खेत की सिंचाई के लिए किसान परेशान
बीते 10 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसान खेत की सिंचाई के लिए परेशान है, वहीं मछली पालन पट्टा लेने वाले सागरों के जल पर मनमाना नियंत्रण रखे हुए है। नतीजा नहरे सूखने से खेत में खड़ी फसल भी सूखने लगी है।
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समय से सागरों की नहरों से पानी नहीं मिलने के कारण खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है, इससे कालानमक धान की फसल भी सूखने लगी है।

-कृष्णा पांडेय, किसान



बजहा सागर से निकली नहरों में पानी की दिक्कत पहले से थी, अब तो इनका पट्टा होने के बाद समय से नहरों में पानी ही नहीं आता है।

-संतोष मोदनवाल, किसान



धान की रोपाई तो किसी तरह से कर दिया था, लेकिन अब सागरों की नहरों में पानी न होने से फसल सिंचाई नहीं हो पा रही है, जिससे फसल सूखने लगी है।

-ओंकार यादव, किसान



बीते 10 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेत की फसल सूखने लगी है, उधर नहरों में पानी नहीं होने से फसल की सिंचाई नहीं हो पा रही है।

-सुनील यादव, किसान

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जेई से अभद्रता मामले में चार्जशीट

बजहा सागर पर नहर में पानी रोकने और तटबंध पर अतिक्रमण की सूचना पर 20 अगस्त की रात मौके पर पहुंचे ड्रेनेज खंड सिंचाई विभाग के जेई मुनीब कुमार ने पट्टाधारक पंचम के विरुद्ध केस दर्ज कराया था। उन्होंने चिल्हिया थाना क्षेत्र के पीकापार निवासी पट्टाधारक पंचम पर जातिसूचक गाली देते हुए धक्का-मुक्की करने और दोबारा सागर पर आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देने का आरोप लगाया था। मामले में सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, धमकी देने व दलित उत्पीड़न के मामले में केस दर्जकर सीओ सदर अखिलेश वर्मा ने छानबीन कर चार्जशीट दाखिल कर दी है। उन्होंने बताया कि साक्ष्य व गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट लगाई गई है।

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धन न जमा होने पर निरस्त होगा बघाड़ी ताल का पट्टा
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज तहसील क्षेत्र के पेंदा और तकियवा गांव के बीच में 320 बीघा क्षेत्रफल के बघाड़ी ताल का मत्स्य पालन 2018 में 10 साल के लिए हुआ था। पट्टा धारक को 3.33 लाख रुपये सालाना किस्त जमा करना था, परंतु उसने 8300 रुपये के तीन किस्त जमा करने के बाद किस्त बंद कर दिया। ग्राम प्रधान पेंदा की शिकायत पर एसडीएम डुमरियागंज परमेंद्र ने मौके की जांच की तथा कहा कि अगर तीन दिन के भीतर पैसा जमा नहीं किया तो पट्टा निरस्त कर दिया जाएगा। बता दें कि पट्टे की धनराशि के 80 फीसदी हिस्से का उपयोग ग्राम पंचायत में विकास कार्यों पर खर्च किया जाता है।
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