फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Even after a hundred years Halku and Jhabra' are forced to guard in the night of Pus

Siddharthnagar News: सौ साल बाद भी पूस की रात में रखवाली करने को मजबूर हैं ‘हलकू और झबरा’

Thu, 05 Jan 2023 10:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर।
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 05 Jan 2023 10:00 AM IST
सार

जिले में छुट्टा पशु किसानों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। रात में आंख झपकते ही फसल को खा जा रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़कर गोशाला भेजने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के सिसहनिया एवं मटियरिया गांव के सिवान में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु घूम रहे हैं जो हजारों एकड़ गेहूं की फसल को बर्बाद कर रहे हैं।

विज्ञापन
Even after a hundred years Halku and Jhabra' are forced to guard in the night of Pus
खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के सिसहनिया एवं मटियरिया गांव में फसलों को बर्बाद करते छुट्टा पशु। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR

विस्तार

 प्रेमचंद की कहानी ‘पूस की रात’ के पात्रों हलकू और झबरा से ज्यादातर लोग वाकिफ होंगे। प्रेमचंद ने इस कहानी की रचना 1921 में की थी जिसका प्रकाशन 1931 में किया गया। प्रेमचंद द्वारा कहानी की रचना के सौ से भी अधिक वर्ष बीत गए, लेकिन हलकू और झबरा की स्थिति आज भी वही है। आजादी के 75वें वर्ष में भी क्षेत्र के किसान फसलों की रखवाली के लिए सर्द रातें मचानों पर बिताने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


जिले में छुट्टा पशु किसानों के लिए मुसीबत बन चुके हैं। रात में आंख झपकते ही फसल को खा जा रहे हैं, लेकिन इन्हें पकड़कर गोशाला भेजने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। खेसरहा ब्लॉक क्षेत्र के सिसहनिया एवं मटियरिया गांव के सिवान में सैकड़ों की संख्या में छुट्टा पशु घूम रहे हैं जो हजारों एकड़ गेहूं की फसल को बर्बाद कर रहे हैं। जिससे किसानों की हालत खराब है।
विज्ञापन


सर्द रातों में फसल की रखवाली कर किसानों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ रहा है। छुट्टा पशु फसल बर्बाद करने के साथ-साथ खेतों में रखवाली करने वाले किसानों पर हमला भी कर रहे दे हैं। जिससे कई किसान चोटिल भी हो चुके हैं। इसी कारण किसान अपनी फसल की रखवाली करने में भी पशुओं से डरने लगे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


ठंड से बचाव के लिए किसान मचान और पॉलिथीन की कुरिया डालकर रखवाली कर रहे हैं। एक साथ कई किसान समूह बनाकर पशुओं को भागने के लिए निकलते हैं, जिससे उनकर पर हमला न कर दें। इस कड़ाके की ठंड में रात में ठिठुर कर रखवाली करनी पड़ रही है।


क्षेत्र के किसानों का कहना है की बाढ़ से हम लोगों के धान का फसल नष्ट होने के साथ अब छुट्टा पशुओं से गेहूं की फसल पर भी संकट मंडराने लगा है। क्षेत्र के गिरजा पति, मातादीन, कृष्ण नाथ, अमरनाथ मिश्र, राजाराम मौर्य आदि किसानों ने प्रशासन से पशुओं को गोशाला भेजवाने की मांग की है।

इस संबंध में बीडीओ खेसरहा चंद्रभान उपाध्याय ने बताया कॉऊ कैचर मंगवाने की बात की गई है। इसके मिलते ही जल्द ही पशुओं को पकड़ कर गोशाला भेजा जाएगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed