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बाढ़ से लोगों ने छोड़ा घर, गोशाला डूबी, 120 गोवंश इधर-उधर
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बाढ़ से घिरा ग्राम पंचायत बिजौरा का भवन व गोशाला। संवाद
- फोटो : SIDDHARTHNAGAR
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बाढ़ से लोगों ने छोड़ा घर, गोशाला डूबी, 120 गोवंश इधर-उधर
नेपाल की पहाड़ियों में बारिश से बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी का बढ़ रहा जलस्तर
सिद्धार्थनगर। बाढ़ के कारण कहीं लोग घर छोड़कर स्कूल में रह रहे हैं तो कहीं गोशाला डूबने से गायों को लावारिस छोड़ दिया गया है। 120 गायों का पता नहीं नहीं चल रहा है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे गांव के लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बाढ़ सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं किए हैं। यहीं कारण है कि जो गांव पिछले साल कटान के मुहाने पर थे, वे इस बार भी तबाही का मंजर झेल रहे हैं। नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के कारण राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी उफान पर है।
तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, विकास खंड बढ़नी के दक्षिणांचल में तौलिहवा के बालानगर टोले के पास नदी कटान कर रही है। गांव से दो-तीन मीटर की दूरी पर कटान के कारण गांव के लोग घर में ताला लगाकर परिवार के साथ स्कूल में रह रहे हैं।
टोले वासियों को कटान से टोले का अस्तित्व ही खतरे में नजर आ रहा है। बूढ़ी राप्ती के तट पर बसे इस टोले के लगभग आधा दर्जन से अधिक घर वर्ष 2012 में नदी में विलीन हो गए थे। एक दशक बाद भी प्रशासन ने बाढ़ से बचाव का कोई ठोस उपाय नहीं किया।
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बालानगर के लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारी अधिकतर बाढ़ के समय ही टोले में दिखाई देते हैं और उसके बाद साल भर उनका पता नहीं रहता। इसी प्रकार जनप्रतिनिधि केवल चुनाव और बाढ़ के वक्त टोले में आते हैं और लाई-चूरा व साड़ी बांटकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा लेते हैं। रघुवीर चौधरी, बेचन निषाद, अशर्फी निषाद, राममिलन निषाद, भग्गन निषाद, जुगुन यादव, रतिभान यादव, मोलहू निषाद, राजकुमार, पारस, तौलू, जंगबहादुर, जितेंद्र कुमार सहित सात दर्जन से अधिक घर नदी की कटान की जद में हैं। इनके घरों से नदी मात्र दो मीटर की दूरी पर बह रही है।
टोले के जुगुनी यादव, रामअचल, सुघरा देवी, भगवती, गंगाराम, गीता, पारस, राजाराम, हरिराम, रामरतन, संवारे, झकड़ी, सरजू, राजेश, पाती, बीपत, गरीब, रामबृक्ष, जंगबहादुर, चंद्रिका, नाजिर, भग्गन, हंसराज, श्रीराम, चिन्नू व बरखू आदि के घरों को नदी के कटान से खतरा है। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बसे तौलिहवा ग्राम के तौलिहवा, प्रतापपुर, कचरिहवा, बालानगर, लालपुर, फुलवरिया टोलों के लोगों के जेहन में पिछले कई सालों की बाढ़ का मंजर आज भी कौंध रहा है। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बसे तौलिहवा ग्राम के कचरिहवा व बालानगर टोलों में गत कई सालों से कटान हो रही है। शोहरतगढ़ के एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव का कहना है कि गांवों प्रभावित गांवों के लेखपालों से रिपोर्ट मांगी गई है, सुरक्षा के प्रबंध किए जाएंगे।
ग्रामीणों का दर्द
वर्ष 2012 में तो किसी प्रकार मेरा मकान नदी में गिरने से बच गया था, लेकिन प्रशासन का यही रवैया रहा तो इस बार कई लोग बेघर हो जाएंगे। गांव के लोगों ने प्रशासन व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से टोले को नदी के प्रकोप से बचाने की कई बार अपील की, लेकिन 2014 के बाद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। -अशर्फी, बालानगर
आजादी के बाद से बाढ़ की विभीषिका से बचाव का कोई ठोस उपाय सरकार की ओर से नहीं किया गया। आगे भी लोग बाढ़ से बच सकें, उसका उपाय करती सरकार दिखाई भी नहीं दे रही है। टोलेवासी इस समय हर रात को आखिरी रात मान कर भयभीत हैं। रविवार की रात तो हम लोगों ने प्राथमिक विद्यालय में शरण लेकर रात बिताई। -भग्गन, बालानगर
यदि प्रशासन ने कटान से बचाने का कोई ठोस उपाय किया होता तो टोले का अस्तित्व खतरे में नहीं होता। साथ ही लोग सुरक्षित महसूस करते। दुर्भाग्य है कि हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी बाढ़ आने का इंतजार करते हैं। बाढ़ आने पर लाई-चूरा बांटकर हम लोगों को गुमराह कर हमदर्दी जताते हैं। -भगवती, बालानगर
हमारे घर पर खतरा मंडरा रहा है। जब से बारिश हुई हुई, तभी से लोगों को टोले के अस्तित्व की चिंता सता रही है। हमारी तो स्थिति यह हो गई है कि हम अपने व परिवार की जान की चिंता में जीवन भर की कमाई छोड़कर अन्यत्र रात बिताने के लिए मजबूर हैं। -अशर्फी, बालानगर
बचाव का इंतजाम खुद कर रहे लोग
बिजौरा। लोग बचाव का इंतजाम खुद कर रहे हैं। अमर उजाला में आजादनगर डिहवा गांव से संबंधित खबर ‘बंधे और राप्ती नदी के बीच रह रहे परिवार’ शीर्षक से 27 जुलाई के अंक में प्रकाशित हुई थी, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा के उपाय नहीं किए।
बिजौरा राप्ती नदी के तेजी से उफान लेने से बिजौरा गांव में पंचायत भवन, गोशाला, पुलिस चौकी, श्मशान स्थल व आजादनगर डिहवा के आधा दर्जन मकान बाढ़ से घिर गए हैं। सोमवार सुबह बाढ़ का पानी सलीम के घर में घुसने लगा तो उनकी पत्नी व पुत्री मिट्टी का ढेर लगाकर पानी रोकने की कोशिश करती नजर आईं। बीडीओ भनवापुर धनंजय सिंह ने कहा कि गोशाला के कुछ पशु बांध पर रखे गए हैं और कुछ गोवंश को परसोहिया गोशाला में रखा गया है, जबकि बिजौरा के प्रधान के प्रतिनिधि प्रणवीर अग्रहरि ने बताया कि बिशुनपुर औरंगाबाद के पास खाली खेत में गायों को चराया जा रहा है। जानकारी मिली है कि बिजौरा से परसोहिया गोशाला में गायें नहीं भेजी गई हैं।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही राप्ती
सिद्धार्थनगर। जिले में राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी राप्ती नदी भी खतरे के निशान के आसपास है। नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के कारण दोनों नदियों का जलस्तर देखकर बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सहमे गए हैं। शोहरतगढ़ क्षेत्र के कई मार्गों पर पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को नांव के सहारे आना-जाना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने आवश्यक सामान पहले ही रख लिया है ताकि भोजन का संकट न हो। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की सुरक्षा और इंतजाम कठिन हो गया है।
जिले में सोमवार को राप्ती नदी के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई। एक दिन पहले राप्ती नदी 83.76 मीटर के निशान पर थी, जो सोमवार को 83.920 मीटर तक पहुंच गई। राप्ती नदी का खतरे का निशान 83.900 मीटर है। इसी प्रकार बूढ़ी राप्ती नदी 85.650 मीटर खतरे के निशान से नीचे 85.530 मीटर पर बह रही है, एक दिन पहले बूढ़ी राप्ती 85.680 मीटर तक पहुंच गई थी। बाणगंगा भी 93.100 के निशान बह रही है, जबकि खतरे का निशान 93.420 मीटर पर है। हालांकि, कूड़ा, घोघी एवं तेलार नदी और जमुआर नाला खतरे के निशान से नीचे है।
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नेपाल की पहाड़ियों में बारिश से बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी का बढ़ रहा जलस्तर
सिद्धार्थनगर। बाढ़ के कारण कहीं लोग घर छोड़कर स्कूल में रह रहे हैं तो कहीं गोशाला डूबने से गायों को लावारिस छोड़ दिया गया है। 120 गायों का पता नहीं नहीं चल रहा है। बाढ़ की विभीषिका झेल रहे गांव के लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बाढ़ सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं किए हैं। यहीं कारण है कि जो गांव पिछले साल कटान के मुहाने पर थे, वे इस बार भी तबाही का मंजर झेल रहे हैं। नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के कारण राप्ती और बूढ़ी राप्ती नदी उफान पर है।
तुलसियापुर प्रतिनिधि के अनुसार, विकास खंड बढ़नी के दक्षिणांचल में तौलिहवा के बालानगर टोले के पास नदी कटान कर रही है। गांव से दो-तीन मीटर की दूरी पर कटान के कारण गांव के लोग घर में ताला लगाकर परिवार के साथ स्कूल में रह रहे हैं।
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टोले वासियों को कटान से टोले का अस्तित्व ही खतरे में नजर आ रहा है। बूढ़ी राप्ती के तट पर बसे इस टोले के लगभग आधा दर्जन से अधिक घर वर्ष 2012 में नदी में विलीन हो गए थे। एक दशक बाद भी प्रशासन ने बाढ़ से बचाव का कोई ठोस उपाय नहीं किया।
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बालानगर के लोगों ने आरोप लगाया कि अधिकारी अधिकतर बाढ़ के समय ही टोले में दिखाई देते हैं और उसके बाद साल भर उनका पता नहीं रहता। इसी प्रकार जनप्रतिनिधि केवल चुनाव और बाढ़ के वक्त टोले में आते हैं और लाई-चूरा व साड़ी बांटकर अपनी जिम्मेदारियों से मुक्ति पा लेते हैं। रघुवीर चौधरी, बेचन निषाद, अशर्फी निषाद, राममिलन निषाद, भग्गन निषाद, जुगुन यादव, रतिभान यादव, मोलहू निषाद, राजकुमार, पारस, तौलू, जंगबहादुर, जितेंद्र कुमार सहित सात दर्जन से अधिक घर नदी की कटान की जद में हैं। इनके घरों से नदी मात्र दो मीटर की दूरी पर बह रही है।
टोले के जुगुनी यादव, रामअचल, सुघरा देवी, भगवती, गंगाराम, गीता, पारस, राजाराम, हरिराम, रामरतन, संवारे, झकड़ी, सरजू, राजेश, पाती, बीपत, गरीब, रामबृक्ष, जंगबहादुर, चंद्रिका, नाजिर, भग्गन, हंसराज, श्रीराम, चिन्नू व बरखू आदि के घरों को नदी के कटान से खतरा है। शोहरतगढ़ तहसील क्षेत्र में बूढ़ी राप्ती नदी किनारे बसे तौलिहवा ग्राम के तौलिहवा, प्रतापपुर, कचरिहवा, बालानगर, लालपुर, फुलवरिया टोलों के लोगों के जेहन में पिछले कई सालों की बाढ़ का मंजर आज भी कौंध रहा है। बूढ़ी राप्ती नदी के किनारे बसे तौलिहवा ग्राम के कचरिहवा व बालानगर टोलों में गत कई सालों से कटान हो रही है। शोहरतगढ़ के एसडीएम उत्कर्ष श्रीवास्तव का कहना है कि गांवों प्रभावित गांवों के लेखपालों से रिपोर्ट मांगी गई है, सुरक्षा के प्रबंध किए जाएंगे।
ग्रामीणों का दर्द
वर्ष 2012 में तो किसी प्रकार मेरा मकान नदी में गिरने से बच गया था, लेकिन प्रशासन का यही रवैया रहा तो इस बार कई लोग बेघर हो जाएंगे। गांव के लोगों ने प्रशासन व क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों से टोले को नदी के प्रकोप से बचाने की कई बार अपील की, लेकिन 2014 के बाद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। -अशर्फी, बालानगर
आजादी के बाद से बाढ़ की विभीषिका से बचाव का कोई ठोस उपाय सरकार की ओर से नहीं किया गया। आगे भी लोग बाढ़ से बच सकें, उसका उपाय करती सरकार दिखाई भी नहीं दे रही है। टोलेवासी इस समय हर रात को आखिरी रात मान कर भयभीत हैं। रविवार की रात तो हम लोगों ने प्राथमिक विद्यालय में शरण लेकर रात बिताई। -भग्गन, बालानगर
यदि प्रशासन ने कटान से बचाने का कोई ठोस उपाय किया होता तो टोले का अस्तित्व खतरे में नहीं होता। साथ ही लोग सुरक्षित महसूस करते। दुर्भाग्य है कि हमारे जनप्रतिनिधि और अधिकारी बाढ़ आने का इंतजार करते हैं। बाढ़ आने पर लाई-चूरा बांटकर हम लोगों को गुमराह कर हमदर्दी जताते हैं। -भगवती, बालानगर
हमारे घर पर खतरा मंडरा रहा है। जब से बारिश हुई हुई, तभी से लोगों को टोले के अस्तित्व की चिंता सता रही है। हमारी तो स्थिति यह हो गई है कि हम अपने व परिवार की जान की चिंता में जीवन भर की कमाई छोड़कर अन्यत्र रात बिताने के लिए मजबूर हैं। -अशर्फी, बालानगर
बचाव का इंतजाम खुद कर रहे लोग
बिजौरा। लोग बचाव का इंतजाम खुद कर रहे हैं। अमर उजाला में आजादनगर डिहवा गांव से संबंधित खबर ‘बंधे और राप्ती नदी के बीच रह रहे परिवार’ शीर्षक से 27 जुलाई के अंक में प्रकाशित हुई थी, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा के उपाय नहीं किए।
बिजौरा राप्ती नदी के तेजी से उफान लेने से बिजौरा गांव में पंचायत भवन, गोशाला, पुलिस चौकी, श्मशान स्थल व आजादनगर डिहवा के आधा दर्जन मकान बाढ़ से घिर गए हैं। सोमवार सुबह बाढ़ का पानी सलीम के घर में घुसने लगा तो उनकी पत्नी व पुत्री मिट्टी का ढेर लगाकर पानी रोकने की कोशिश करती नजर आईं। बीडीओ भनवापुर धनंजय सिंह ने कहा कि गोशाला के कुछ पशु बांध पर रखे गए हैं और कुछ गोवंश को परसोहिया गोशाला में रखा गया है, जबकि बिजौरा के प्रधान के प्रतिनिधि प्रणवीर अग्रहरि ने बताया कि बिशुनपुर औरंगाबाद के पास खाली खेत में गायों को चराया जा रहा है। जानकारी मिली है कि बिजौरा से परसोहिया गोशाला में गायें नहीं भेजी गई हैं।
खतरे के निशान से ऊपर बह रही राप्ती
सिद्धार्थनगर। जिले में राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जबकि बूढ़ी राप्ती नदी भी खतरे के निशान के आसपास है। नेपाल की पहाड़ियों में बारिश के कारण दोनों नदियों का जलस्तर देखकर बाढ़ प्रभावित गांवों के लोग सहमे गए हैं। शोहरतगढ़ क्षेत्र के कई मार्गों पर पानी भर जाने के कारण ग्रामीणों को नांव के सहारे आना-जाना पड़ रहा है।
बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों ने आवश्यक सामान पहले ही रख लिया है ताकि भोजन का संकट न हो। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पशुओं के लिए चारे की सुरक्षा और इंतजाम कठिन हो गया है।
जिले में सोमवार को राप्ती नदी के जलस्तर में मामूली वृद्धि हुई। एक दिन पहले राप्ती नदी 83.76 मीटर के निशान पर थी, जो सोमवार को 83.920 मीटर तक पहुंच गई। राप्ती नदी का खतरे का निशान 83.900 मीटर है। इसी प्रकार बूढ़ी राप्ती नदी 85.650 मीटर खतरे के निशान से नीचे 85.530 मीटर पर बह रही है, एक दिन पहले बूढ़ी राप्ती 85.680 मीटर तक पहुंच गई थी। बाणगंगा भी 93.100 के निशान बह रही है, जबकि खतरे का निशान 93.420 मीटर पर है। हालांकि, कूड़ा, घोघी एवं तेलार नदी और जमुआर नाला खतरे के निशान से नीचे है।