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रात में बिजली कटौती से लोगों की पूरी नहीं हो रही नींद
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रात में बिजली कटौती से लोगों की पूरी नहीं हो रही नींद
- भीषण गर्मी में कटौती के साथ लोकल फाल्ट की समस्या बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/ परसा। शहरी सहित कस्बों व गांवों में बिजली कटौती के कारण लोग चिड़चिड़ापन के शिकार हो रहे हैं। रात में बिजली कटौती से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। बिजली जाते ही गर्मी का असर और मच्छरों से परेशान लोग घर से बाहर छतों पर टहलते नजर आ रहे हैं। विद्युत सब स्टेशन के कारण आपूर्ति कम हो रही है। वहीं, लोकल फाल्ट से भी लोगों की दिक्कतें बढ़ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। दिन की कटौती से लोगों का चैन छिन गया है, वहीं रात में चार-पांच घंटे बिजली रहने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। नींद पूरी न होने से लोगों में चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, पेट की खराबी और शरीर में भारीपन की शिकायतें शुरू हो गई है।
इन दिनों जिला अस्पताल में इन बीमारियों के तकरीबन 10 से 15 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि रात में बिजली न आने से लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, इस वजह से उनकी तबियत खराब हो रही है। ऐसे लोगों को दवा के साथ-साथ पूरी तरह आराम करने की सलाह दी जा रही है।
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वहीं, ढ़ेबरुआ विद्युत उपकेंद्र के द्वारा बिजली आपूर्ति पाने वाले लगभग चार दर्जन से अधिक गांवों में लगभग एक सप्ताह से बिजली कटौती अधिक हो रही है। कटौती का निर्धारित कोई शेड्यूल नहीं है। लोगों को दो-तीन दिनों में 20 घंटे से ज्यादा कटौती झेलनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी रात की कटौती से हो रही है।
कटौती का कारण भी कोई नहीं बता रहा है। घर में बिजली न रहने से सबसे अधिक दिक्कत बीमार, बुजुर्ग व बच्चों को हो रही है।
- अक्षय वरुण, औदही कलां
बिजली के बिना फ्रिज में रखा सामान खराब हो रहा है। इन्वर्टर पूरा चार्ज न होने से जल्दी बंद हो जा रहा है। नींद पूरी नहीं हो पा रही है।
- जितेन्द्र शुक्ल, शिक्षक
रात में बिजली गुल होने से मच्छर सोने नहीं देते हैं। बाहर या छत पर सोते तो तबीयत खराब होने का डर, बिजली न रहने के कारण घर में गर्मी के कारण नींद नहीं आ रही है।
- आशुतोष शुक्ल, मनिकौरा
मुख्यमंत्री का आदेश है कि बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए, क्षेत्रीय विद्युतकर्मियों से पूछिए तो वह कहते हैं कि ऊपर से कटौती हो रही है। बिजली कटौती के कारण लोगों की दिनचर्या बदल गई है।
- प्रेमचंद, अहिरौला
एक कमरे सो रहा परिवार
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार 24 घंटे में कस्बे में 12-14 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है। इस कारण इन्वर्टर जल्दी जवाब दे रहे हैं। रमजान माह में कई परिवार में सभी सदस्य एक ही कमरे में सो गए तो रात में आधी अधूरी नींद पूरी हुई। रात में ज्यादा कटौती हो रही है।
ट्रांसफार्मर फूंक जाने से दिक्कत
शहर के थरौली क्षेत्र में ट्रांसफार्मर फूंक जाने के कारण थरौली के इलाके के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग रात में टहलते नजर आए। वार्ड के अशोक कुमार ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद रात में आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।
दो जनरेटिंग यूनिट से कम बिजली मिलने के कारण कुछ समस्या आई है। ट्रांसफार्मर की खराबी या लोकल फाल्ट होने पर तत्काल मरम्मत कार्य किया जा रहा है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी।
- आरके कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता
नींद पूरी न होने से मानसिक बीमारी का खतरा
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अफजल ने बताया कि लगातार कई दिनों तक नींद पूरी नहीं होने के कारण मानसिक समस्या आ रही है। इस कारण चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, सुस्ती के साथ गुस्सा अधिक आ रहा है। ऐसे लक्षण होने पर मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।
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- भीषण गर्मी में कटौती के साथ लोकल फाल्ट की समस्या बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर/ परसा। शहरी सहित कस्बों व गांवों में बिजली कटौती के कारण लोग चिड़चिड़ापन के शिकार हो रहे हैं। रात में बिजली कटौती से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। बिजली जाते ही गर्मी का असर और मच्छरों से परेशान लोग घर से बाहर छतों पर टहलते नजर आ रहे हैं। विद्युत सब स्टेशन के कारण आपूर्ति कम हो रही है। वहीं, लोकल फाल्ट से भी लोगों की दिक्कतें बढ़ गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। दिन की कटौती से लोगों का चैन छिन गया है, वहीं रात में चार-पांच घंटे बिजली रहने से लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। नींद पूरी न होने से लोगों में चिड़चिड़ापन, मानसिक तनाव, पेट की खराबी और शरीर में भारीपन की शिकायतें शुरू हो गई है।
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इन दिनों जिला अस्पताल में इन बीमारियों के तकरीबन 10 से 15 मरीज रोजाना पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि रात में बिजली न आने से लोग ठीक से सो नहीं पा रहे हैं, इस वजह से उनकी तबियत खराब हो रही है। ऐसे लोगों को दवा के साथ-साथ पूरी तरह आराम करने की सलाह दी जा रही है।
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वहीं, ढ़ेबरुआ विद्युत उपकेंद्र के द्वारा बिजली आपूर्ति पाने वाले लगभग चार दर्जन से अधिक गांवों में लगभग एक सप्ताह से बिजली कटौती अधिक हो रही है। कटौती का निर्धारित कोई शेड्यूल नहीं है। लोगों को दो-तीन दिनों में 20 घंटे से ज्यादा कटौती झेलनी पड़ रही है। सबसे अधिक परेशानी रात की कटौती से हो रही है।
कटौती का कारण भी कोई नहीं बता रहा है। घर में बिजली न रहने से सबसे अधिक दिक्कत बीमार, बुजुर्ग व बच्चों को हो रही है।
- अक्षय वरुण, औदही कलां
बिजली के बिना फ्रिज में रखा सामान खराब हो रहा है। इन्वर्टर पूरा चार्ज न होने से जल्दी बंद हो जा रहा है। नींद पूरी नहीं हो पा रही है।
- जितेन्द्र शुक्ल, शिक्षक
रात में बिजली गुल होने से मच्छर सोने नहीं देते हैं। बाहर या छत पर सोते तो तबीयत खराब होने का डर, बिजली न रहने के कारण घर में गर्मी के कारण नींद नहीं आ रही है।
- आशुतोष शुक्ल, मनिकौरा
मुख्यमंत्री का आदेश है कि बिजली कटौती नहीं होनी चाहिए, क्षेत्रीय विद्युतकर्मियों से पूछिए तो वह कहते हैं कि ऊपर से कटौती हो रही है। बिजली कटौती के कारण लोगों की दिनचर्या बदल गई है।
- प्रेमचंद, अहिरौला
एक कमरे सो रहा परिवार
बांसी प्रतिनिधि के अनुसार 24 घंटे में कस्बे में 12-14 घंटे ही बिजली आपूर्ति हो रही है। इस कारण इन्वर्टर जल्दी जवाब दे रहे हैं। रमजान माह में कई परिवार में सभी सदस्य एक ही कमरे में सो गए तो रात में आधी अधूरी नींद पूरी हुई। रात में ज्यादा कटौती हो रही है।
ट्रांसफार्मर फूंक जाने से दिक्कत
शहर के थरौली क्षेत्र में ट्रांसफार्मर फूंक जाने के कारण थरौली के इलाके के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग रात में टहलते नजर आए। वार्ड के अशोक कुमार ने बताया कि शिकायत करने के बावजूद रात में आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी।
दो जनरेटिंग यूनिट से कम बिजली मिलने के कारण कुछ समस्या आई है। ट्रांसफार्मर की खराबी या लोकल फाल्ट होने पर तत्काल मरम्मत कार्य किया जा रहा है। जल्द ही समस्या दूर हो जाएगी।
- आरके कुशवाहा, अधीक्षण अभियंता
नींद पूरी न होने से मानसिक बीमारी का खतरा
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. अफजल ने बताया कि लगातार कई दिनों तक नींद पूरी नहीं होने के कारण मानसिक समस्या आ रही है। इस कारण चिड़चिड़ापन, एकाग्रता की कमी, सुस्ती के साथ गुस्सा अधिक आ रहा है। ऐसे लक्षण होने पर मनोचिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।