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Siddharthnagar News: अनजान व्यक्ति को न दें आधार, नहीं तो बन जाएंगे गुनहगार
Sun, 13 Aug 2023 12:27 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 13 Aug 2023 12:27 AM IST
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सिद्धार्थनगर। कहीं नौकरी की चाहत का लालच लोगों को गुनहगार बना रही है। साइबर ठगों के पैंतरे के आगे सभी की बुद्धि कुंद हो जा रही है। पढ़ा-लिखा व्यक्ति उनके जाल में फंसकर रकम गंवा देे रहे हैं। आधार लेकर साइबर ठग बैंक खाता खोल ले रहे हैं। उसी में ठगी की धनराशि का आदान-प्रदान कर रहे हैं। मामला जब पकड़ में आ रहा है तो पता चल रहा है कि फर्जी खाते से लेन-देन हुआ है। इसमें संबंधित व्यक्ति परेशान हो रहा है।
आधार से फर्जी बैंक खाता खोले जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। साइबर एक्सपर्ट बता रहे हैं कि अनजान व्यक्ति को आधार देना गुनहगार बना सकता है। ऐसे में बिना जाने-समझे नौकरी के नाम पर रुपये के लालच में किसी अनजान व्यक्ति के पास पैन और आधार कार्ड की कॉपी न भेजें। नहीं तो बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं, क्योंकि यह साइबर ठगों की नई चाल है।
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पहले ठगा, फिर खोल लिया फर्जी खाता
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव के प्रधान से सरकारी योजना के लाभ के नाम पर पहले 50 हजार रुपये की ठगी हुई। फिर ठग ने रुपये वापस करने के लिए आधार और पेन कार्ड मांग लिया। इसके बाद उसी से फर्जी बैंक खाता खोल लिया। कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया। रकम आने के संबंध में यूपी के किसी जिले से कॉल आई। साइबर टीम ने जांच की तो पता चला कि ठगों ने फर्जी तरीके से खाता खोला। ग्राम प्रधान ने शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की।
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खोल लिया खाता, अब आई बड़ी धनराशि तो चौंका
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति मोबाइल पर आए मैसेज पर क्लिक किया। उसमें किसी सीमेंट फैक्ट्री में काम करने ऑफर था। दिए गए नंबर पर कॉल की तो आधार और पैन कार्ड मांगा। उसके बाद संपर्क नहीं हुआ। एक दिन पुलिस का फोन आया कि वह फर्जीवाडा कर रहा है। उसके खाते में रुपये जा रहे हैं। इस बात की जानकारी होने पर उसने पुलिस को बताया और त्रिलोकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर टीम ने जांच करके मामले काे खत्म किया।
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दूसरा खाता खोलकर ट्रांसफर कर ली रकम
सदर थाना क्षेत्र के एक कारोबारी ने ऑर्डर करने के लिए गूगल से नंबर निकालकर कॉल की। कॉल रिसीव करने वाले ने आधार और पैन कार्ड मांगा। इसके बाद फर्जी तरीके से बैंक खाता खोल लिया। फिर संबंधित व्यक्ति के खाते से फर्जी तरीके से खोले गए खाते में रकम ट्रांसफर कर ली। जब 20 हजार रुपये कटे तो बैंक पर पता किया। बैंक से जानकारी मिली कि यह उसी का खाता है। जांच में वह फर्जी पाया गया। इसके बाद पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल मामले की जांच कर रही है।
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इस प्रकार खोलते हैं खाता
साइबर के जानकारों के मुताबिक, ठग किसी व्यक्ति से नौकरी, योजनाओं के नाम पर आधार और पैन कार्ड की मांग करते हैं। दोनों प्रमाणपत्र भेज गेने के बाद ठग दोबारा संपर्क नहीं करता है। इधर, ठग व्हाट्एस पर लगे डीपी से फोटो उठा लेते हैं। आधार कार्ड और पैन कार्ड रहता ही है। एक फेक नंबर से ऑनलाइन बैंक खाता खोलने के लिए बैंक को फोन करते हैं। उनके बताए अनुसार, ऑनलाइन आवेदन हो जाता है। बैंककर्मी की ओर से ऑनलाइन खाता खोलने से पहले सत्यापन करने के लिए वीडियो कॉल की जाती है। उसी का स्क्रीन शॉट लेकर खाता खुल जाता है। वीडियो कॉल के दौरान ठग चेहरा स्पष्ट न होने देते हैं। उधर, बैंक नेटवर्किंग की समस्या मानकर प्रक्रिया पूरी कर लेता है और बैंक खाता खुल जाता है। इसके बाद ठगी की रकम उसी में भेजते हैं। जब जांच में खाते पर रोक लगती है या पुलिस की जांच में खाता सामने आता है तो वह आधार के पते पर कॉल या संबंधित थाने से पता करवाते हैं। जांच में मामला फर्जी निकलता है। इसमें कई बार संबंधित व्यक्ति को पुलिस के समक्ष पेश होकर बेगुनाह होने का प्रमाण पत्र देना पड़ता है।
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आधार नंबर रखें लॉक, अनजान व्यक्ति को न करें शेयर
आधार कार्ड आज महत्वपूर्ण पहचान है। हर कार्य आधार कार्ड से हो रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति आधार कार्ड का आदान-प्रदान करता है। लेकिन, इसमें सावधान बरतने की जरूरत है। कारण कि साइबर ठग आधार कार्ड मिलते ही खाता खोल रहे हैं और ठगी की रकम की हेराफेरी कर रहे हैं। ऐसे मेें बिना जान-पहचान वाले व्यक्ति को आधार कार्ड और अन्य जानकारी न शेयर करें। इसके साथ ही आधार की वेबसाइट पर जाकर अपना आधार लॉक पर कर सकते हैं। आधार लॉक होने पर साइबर अपराधी जानकारी हासिल नहीं कर पाएंगे। जब जरूरत पड़े तो फिर वेबसाइट खोलकर काम कर सकते हैं। साइबर ठग चुनौती बन चुके हैं। जागरूकता से ही इनसे बचा जा सकता है। -अतुल कुमार चौबे, साइबर एक्सपर्ट, साइबर सेल सिद्धार्थनगर
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बोले अधिकारी
साबइर अपराध से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। थाना स्तर पर पुलिस टीम गांव और चौराहे पर चौपाल लगाकर साइबर क्राइम, ठगी के तरीके, ठगी का शिकार होने पर शिकायत और बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। स्कूली बच्चों को भी जानकारी दी जा रही है। -अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
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बोले अधिवक्ता
अपने दस्तावेज को सुरक्षित रखना चाहिए। अनजान व्यक्ति को दस्तावेज शेयर नहीं करना चाहिए। अगर समझ में आ जाए कि कोई धोखाधड़ी हो रही है तो तत्काल पुलिस से शिकायत करें। इसमें आईटी एक्ट के साथ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए जाते हैं। इसमें सात साल तक की सजा हो सकती है। -संजय कुमार श्रीवास्तव,अधिवक्ता अपराध जनपद न्यायालय
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आधार से फर्जी बैंक खाता खोले जाने के कई मामले सामने आ चुके हैं। साइबर एक्सपर्ट बता रहे हैं कि अनजान व्यक्ति को आधार देना गुनहगार बना सकता है। ऐसे में बिना जाने-समझे नौकरी के नाम पर रुपये के लालच में किसी अनजान व्यक्ति के पास पैन और आधार कार्ड की कॉपी न भेजें। नहीं तो बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं, क्योंकि यह साइबर ठगों की नई चाल है।
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पहले ठगा, फिर खोल लिया फर्जी खाता
शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव के प्रधान से सरकारी योजना के लाभ के नाम पर पहले 50 हजार रुपये की ठगी हुई। फिर ठग ने रुपये वापस करने के लिए आधार और पेन कार्ड मांग लिया। इसके बाद उसी से फर्जी बैंक खाता खोल लिया। कई लोगों को ठगी का शिकार बनाया। रकम आने के संबंध में यूपी के किसी जिले से कॉल आई। साइबर टीम ने जांच की तो पता चला कि ठगों ने फर्जी तरीके से खाता खोला। ग्राम प्रधान ने शिकायती पत्र देकर जांच की मांग की।
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खोल लिया खाता, अब आई बड़ी धनराशि तो चौंका
त्रिलोकपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी एक व्यक्ति मोबाइल पर आए मैसेज पर क्लिक किया। उसमें किसी सीमेंट फैक्ट्री में काम करने ऑफर था। दिए गए नंबर पर कॉल की तो आधार और पैन कार्ड मांगा। उसके बाद संपर्क नहीं हुआ। एक दिन पुलिस का फोन आया कि वह फर्जीवाडा कर रहा है। उसके खाते में रुपये जा रहे हैं। इस बात की जानकारी होने पर उसने पुलिस को बताया और त्रिलोकपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई। साइबर टीम ने जांच करके मामले काे खत्म किया।
दूसरा खाता खोलकर ट्रांसफर कर ली रकम
सदर थाना क्षेत्र के एक कारोबारी ने ऑर्डर करने के लिए गूगल से नंबर निकालकर कॉल की। कॉल रिसीव करने वाले ने आधार और पैन कार्ड मांगा। इसके बाद फर्जी तरीके से बैंक खाता खोल लिया। फिर संबंधित व्यक्ति के खाते से फर्जी तरीके से खोले गए खाते में रकम ट्रांसफर कर ली। जब 20 हजार रुपये कटे तो बैंक पर पता किया। बैंक से जानकारी मिली कि यह उसी का खाता है। जांच में वह फर्जी पाया गया। इसके बाद पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराई। साइबर सेल मामले की जांच कर रही है।
इस प्रकार खोलते हैं खाता
साइबर के जानकारों के मुताबिक, ठग किसी व्यक्ति से नौकरी, योजनाओं के नाम पर आधार और पैन कार्ड की मांग करते हैं। दोनों प्रमाणपत्र भेज गेने के बाद ठग दोबारा संपर्क नहीं करता है। इधर, ठग व्हाट्एस पर लगे डीपी से फोटो उठा लेते हैं। आधार कार्ड और पैन कार्ड रहता ही है। एक फेक नंबर से ऑनलाइन बैंक खाता खोलने के लिए बैंक को फोन करते हैं। उनके बताए अनुसार, ऑनलाइन आवेदन हो जाता है। बैंककर्मी की ओर से ऑनलाइन खाता खोलने से पहले सत्यापन करने के लिए वीडियो कॉल की जाती है। उसी का स्क्रीन शॉट लेकर खाता खुल जाता है। वीडियो कॉल के दौरान ठग चेहरा स्पष्ट न होने देते हैं। उधर, बैंक नेटवर्किंग की समस्या मानकर प्रक्रिया पूरी कर लेता है और बैंक खाता खुल जाता है। इसके बाद ठगी की रकम उसी में भेजते हैं। जब जांच में खाते पर रोक लगती है या पुलिस की जांच में खाता सामने आता है तो वह आधार के पते पर कॉल या संबंधित थाने से पता करवाते हैं। जांच में मामला फर्जी निकलता है। इसमें कई बार संबंधित व्यक्ति को पुलिस के समक्ष पेश होकर बेगुनाह होने का प्रमाण पत्र देना पड़ता है।
आधार नंबर रखें लॉक, अनजान व्यक्ति को न करें शेयर
आधार कार्ड आज महत्वपूर्ण पहचान है। हर कार्य आधार कार्ड से हो रहा है। ऐसे में हर व्यक्ति आधार कार्ड का आदान-प्रदान करता है। लेकिन, इसमें सावधान बरतने की जरूरत है। कारण कि साइबर ठग आधार कार्ड मिलते ही खाता खोल रहे हैं और ठगी की रकम की हेराफेरी कर रहे हैं। ऐसे मेें बिना जान-पहचान वाले व्यक्ति को आधार कार्ड और अन्य जानकारी न शेयर करें। इसके साथ ही आधार की वेबसाइट पर जाकर अपना आधार लॉक पर कर सकते हैं। आधार लॉक होने पर साइबर अपराधी जानकारी हासिल नहीं कर पाएंगे। जब जरूरत पड़े तो फिर वेबसाइट खोलकर काम कर सकते हैं। साइबर ठग चुनौती बन चुके हैं। जागरूकता से ही इनसे बचा जा सकता है। -अतुल कुमार चौबे, साइबर एक्सपर्ट, साइबर सेल सिद्धार्थनगर
बोले अधिकारी
साबइर अपराध से बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। थाना स्तर पर पुलिस टीम गांव और चौराहे पर चौपाल लगाकर साइबर क्राइम, ठगी के तरीके, ठगी का शिकार होने पर शिकायत और बचाव के बारे में जागरूक किया जा रहा है। स्कूली बच्चों को भी जानकारी दी जा रही है। -अभिषेक कुमार अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक
बोले अधिवक्ता
अपने दस्तावेज को सुरक्षित रखना चाहिए। अनजान व्यक्ति को दस्तावेज शेयर नहीं करना चाहिए। अगर समझ में आ जाए कि कोई धोखाधड़ी हो रही है तो तत्काल पुलिस से शिकायत करें। इसमें आईटी एक्ट के साथ धोखाधड़ी के मामले दर्ज किए जाते हैं। इसमें सात साल तक की सजा हो सकती है। -संजय कुमार श्रीवास्तव,अधिवक्ता अपराध जनपद न्यायालय