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डीएम पहुंचे अस्पताल, व्यवस्था देख माथा पीटा
siddharthnagar
Updated Wed, 10 May 2017 11:10 PM IST
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सिद्धार्थनगर।
स्वास्थ्य मंत्री के जाते ही जिला अस्पताल के पुराने ढर्रे पर लौटने की खबर के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। हकीकत जानने डीएम कुणाल सिल्कू बुधवार को खुद जिला अस्पताल पहुंच गए। बेड पर चादरें गायब थीं, गंदगी फैली हुई थी। अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर बिफरे डीएम ने जिम्मेदारों को व्यवस्था सुधार की कड़ी हिदायतें दीं। उधर, सांसद जगदंबिका पाल ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देशित किया।
सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह सोमवार को जिले में निरीक्षण पर थे। पहले से कार्यक्रम निर्धारित होने के चलते अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पूरा परिसर चमचमा रहा था। मरीजों पर भी डॉक्टर मेहरबान थे। मंत्री के जाने के 24 घंटे बाद ही सब कुछ सामान्य दिनों की तरह ही बदल गया था। न बेड पर चादर थी और न ही साफ-सफाई। वाटर कूलर, लिफ्ट आदि बंद हो चुके थे। बुधवार के अंक में अमर उजाला ने मंत्री के जाते ही फिर से पुराने ढर्रे पर अस्पताल शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेने के बाद डीएम कुणाल सिल्कू बुधवार को खुद जिला अस्पताल पहुंच गए। दोपहर बाद जिला अस्पताल पहुंचे डीएम ने सबसे पहले इमरजेंसी का निरीक्षण किया। वहां भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। बताया गया कि 16 मरीज भर्ती हुए हैं, कुछ की स्थिति में सुधार है। उन्हें जल्द छोड़ दिया जाएगा। यहां से डीएम इमरजेंसी वार्ड पहुंचे तो बेड पर चादर नहीं थी। गंदगी पसरी हुई थी। डीएम ने नाराजगी जताते हुए सीएमएस को निर्देशित किया। प्रसूता वार्ड होते हुए वह पीआईसीयू और एनआईसीयू पहुंचे। वहां जेई-एईएस की तैयारियों को लेकर जिम्मेदारों से पूछताछ की। निरीक्षण के बाद डीएम ने हिदायत दी कि केवल वीआईपी दौरे के दिन ही अस्पताल को चमकाना जरूरी नहीं, हर दिन वैसी ही व्यवस्था होनी चाहिए।
सांसद ने जताई नाराजगी, दिए निर्देश
24 घंटे में ही जिला अस्पताल की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटने की खबर के बाद सांसद जगदंबिका पाल के तेवर भी तल्ख रहे। खबर का संज्ञान लेते हुए सांसद ने बुधवार की सुबह डीएम कुणाल सिल्कू से संपर्क साधा। जिला अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के आगमन के बाद लोगों में व्यवस्था बदलने की उम्मीद जगी थी। फिर से वही हाल होने से क्या संदेश जाएगा। उन्होंने तत्काल लापरवाही बरतने वालों पर सख्ती को कहा।
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लखनऊ, बंगलूरू से पहुंची टीम
जेई-एईएस और डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम को लेकर सरकार के दावे हवा में नहीं है, अलबत्ता इस पर गंभीरता से प्रयास भी शुरू हो गया है। बुधवार को केजीएमसी लखनऊ और निहांस बंगलूरू की टीम जिला अस्पताल पहुंची। आईसीयू का अवलोकन कर इंसेफेलाइटिस और डेंगू की जांच के लिए किट उपलब्ध कराया। टीम ने फिलहाल एक किट अस्पताल को दिया है। इससे 96 मरीजों की जांच हो सकेगी। टीम के सदस्यों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट के माध्यम से पर्याप्त किट यहां आ रही है। जल्द ही जिले में पहुंच जाएगी। इस दौरान डीएम कुणाल सिल्कू, सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय, डॉ. संजय चौधरी आदि मौजूद रहे।
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स्वास्थ्य मंत्री के जाते ही जिला अस्पताल के पुराने ढर्रे पर लौटने की खबर के बाद जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। हकीकत जानने डीएम कुणाल सिल्कू बुधवार को खुद जिला अस्पताल पहुंच गए। बेड पर चादरें गायब थीं, गंदगी फैली हुई थी। अस्पताल में अव्यवस्थाओं पर बिफरे डीएम ने जिम्मेदारों को व्यवस्था सुधार की कड़ी हिदायतें दीं। उधर, सांसद जगदंबिका पाल ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को निर्देशित किया।
सूबे के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह सोमवार को जिले में निरीक्षण पर थे। पहले से कार्यक्रम निर्धारित होने के चलते अस्पताल प्रशासन ने व्यवस्था को बेहतर बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। पूरा परिसर चमचमा रहा था। मरीजों पर भी डॉक्टर मेहरबान थे। मंत्री के जाने के 24 घंटे बाद ही सब कुछ सामान्य दिनों की तरह ही बदल गया था। न बेड पर चादर थी और न ही साफ-सफाई। वाटर कूलर, लिफ्ट आदि बंद हो चुके थे। बुधवार के अंक में अमर उजाला ने मंत्री के जाते ही फिर से पुराने ढर्रे पर अस्पताल शीर्षक के साथ प्रमुखता से प्रकाशित किया था। खबर का संज्ञान लेने के बाद डीएम कुणाल सिल्कू बुधवार को खुद जिला अस्पताल पहुंच गए। दोपहर बाद जिला अस्पताल पहुंचे डीएम ने सबसे पहले इमरजेंसी का निरीक्षण किया। वहां भर्ती मरीजों के बारे में जानकारी ली। बताया गया कि 16 मरीज भर्ती हुए हैं, कुछ की स्थिति में सुधार है। उन्हें जल्द छोड़ दिया जाएगा। यहां से डीएम इमरजेंसी वार्ड पहुंचे तो बेड पर चादर नहीं थी। गंदगी पसरी हुई थी। डीएम ने नाराजगी जताते हुए सीएमएस को निर्देशित किया। प्रसूता वार्ड होते हुए वह पीआईसीयू और एनआईसीयू पहुंचे। वहां जेई-एईएस की तैयारियों को लेकर जिम्मेदारों से पूछताछ की। निरीक्षण के बाद डीएम ने हिदायत दी कि केवल वीआईपी दौरे के दिन ही अस्पताल को चमकाना जरूरी नहीं, हर दिन वैसी ही व्यवस्था होनी चाहिए।
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सांसद ने जताई नाराजगी, दिए निर्देश
24 घंटे में ही जिला अस्पताल की व्यवस्था पुराने ढर्रे पर लौटने की खबर के बाद सांसद जगदंबिका पाल के तेवर भी तल्ख रहे। खबर का संज्ञान लेते हुए सांसद ने बुधवार की सुबह डीएम कुणाल सिल्कू से संपर्क साधा। जिला अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्री के आगमन के बाद लोगों में व्यवस्था बदलने की उम्मीद जगी थी। फिर से वही हाल होने से क्या संदेश जाएगा। उन्होंने तत्काल लापरवाही बरतने वालों पर सख्ती को कहा।
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लखनऊ, बंगलूरू से पहुंची टीम
जेई-एईएस और डेंगू जैसी बीमारियों की रोकथाम को लेकर सरकार के दावे हवा में नहीं है, अलबत्ता इस पर गंभीरता से प्रयास भी शुरू हो गया है। बुधवार को केजीएमसी लखनऊ और निहांस बंगलूरू की टीम जिला अस्पताल पहुंची। आईसीयू का अवलोकन कर इंसेफेलाइटिस और डेंगू की जांच के लिए किट उपलब्ध कराया। टीम ने फिलहाल एक किट अस्पताल को दिया है। इससे 96 मरीजों की जांच हो सकेगी। टीम के सदस्यों ने बताया कि ट्रांसपोर्ट के माध्यम से पर्याप्त किट यहां आ रही है। जल्द ही जिले में पहुंच जाएगी। इस दौरान डीएम कुणाल सिल्कू, सीएमएस डॉ. रोचस्मति पांडेय, डॉ. संजय चौधरी आदि मौजूद रहे।