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Siddharthnagar News: हाई डैमेज रिस्क जोन चतुर्थ में शामिल है जिला
Sun, 05 Nov 2023 01:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 05 Nov 2023 01:13 AM IST
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भूकंप के दृष्टिकोण से भारत सरकार की तरफ से नक्शा जारी किया गया
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भारत सरकार की तरफ से जारी नक्शे में भूकंप के दृष्टिकोण से सिद्धार्थनगर जिला हाई डैमेज रिस्क जोन चतुर्थ में शामिल है।
वर्ष 2016 में पृथ्वी के भूकंप की संवेदनशीलता प्रदर्शित करने वाले नक्शे में उत्तर प्रदेश को तीन जोन में बांटा गया है। इसमें सर्वाधिक संवेदनशील जोन चतुर्थ में पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज व कुशीनगर जिले पूर्ण रूप से शामिल हैं।
इसके साथ ही बस्ती, संकबीरनगर, गोरखपुर और देवरिया जिले का आंशिक हिस्सा इसमें शामिल है। जबकि इनका शेष हिस्सा जोन तृतीय में शामिल है, जो माॅडरेट डैमेज रिस्क जोन है।
मिट्टी जांच के बाद तैयार होती है भूकंपरोधी भवन की डिजाइन
पीडब्ल्यूडी के टेक्निकल जेई यादवेंद्र यादव कहते हैं कि इस संवेदनशील जिले में भूकंपरोधी भवनों के निर्माण के पहले संबंधित स्थल की मिट्टी की जांच के बाद भवन की डिजाइन तैयार की जाती है। इसके फ्रेम, स्ट्रक्चर के अनुसार आरसीसी कॉलम, बीम व दीवारों में लोड के अनुसार निर्माण में सरिया और मैटेरियल का प्रयोग होता है। इसमें एम 25 कंकरीट और सीमेंट की मात्रा निर्धारित रहती है। मजबूती के लिए फाउंडेशन से लेकर पूरे भवन के निर्माण में सरिया और कंकरीट का अधिक प्रयोग होता है। इससे भवन निर्माण का खर्च 20 प्रतिशत अधिक बढ़ जाता है।
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अधिकांश निजी भवन नहीं बने हैं भूकंपरोधी
हाई डैमेज रिस्क जोन चतुर्थ में शामिल इस जिले के अधिकांश निजी भवन भूकंपरोधी नहीं बने हैं। शहर के कुछ गिने-चुने भवनों को छोड़ दिया जाए तो 95 फीसदी भवन भूकंपरोधी मानक को पूरा किए बिना ही खड़े कर दिए गए हैं।
ऐसे में अगर रिक्टर स्केल पर अधिक तीव्रता वाला भूकंप आने पर अधिकांश भवनों के ध्वस्त होने का खतरा है। इससे भारी जन एवं धन हानि हो सकती है। पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड एक के अधिशासी अभियंता आरके भारद्वाज का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुसार नए सरकारी भवन भूकंपरोधी बनाए जा रहे हैं।
अधिकांश सरकारी भवन भूकंपरोधी : सीडीओ
सीडीओ जयेंद्र कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार सभी सरकारी भवन भूकंपरोधी बनाए जा रहे हैं। इसी के तहत सार्वजनिक भवन, विद्यालय भवन व विभागीय भवनों का निर्माण भूकंपरोधी मानक के अनुसार बनाए जा रहे हैं। इसके लिए नोडल विभाग पीडब्ल्यूडी को बनाया गया है, जिसे मानक की निगरानी करनी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। भारत सरकार की तरफ से जारी नक्शे में भूकंप के दृष्टिकोण से सिद्धार्थनगर जिला हाई डैमेज रिस्क जोन चतुर्थ में शामिल है।
वर्ष 2016 में पृथ्वी के भूकंप की संवेदनशीलता प्रदर्शित करने वाले नक्शे में उत्तर प्रदेश को तीन जोन में बांटा गया है। इसमें सर्वाधिक संवेदनशील जोन चतुर्थ में पूर्वी उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज व कुशीनगर जिले पूर्ण रूप से शामिल हैं।
इसके साथ ही बस्ती, संकबीरनगर, गोरखपुर और देवरिया जिले का आंशिक हिस्सा इसमें शामिल है। जबकि इनका शेष हिस्सा जोन तृतीय में शामिल है, जो माॅडरेट डैमेज रिस्क जोन है।
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मिट्टी जांच के बाद तैयार होती है भूकंपरोधी भवन की डिजाइन
पीडब्ल्यूडी के टेक्निकल जेई यादवेंद्र यादव कहते हैं कि इस संवेदनशील जिले में भूकंपरोधी भवनों के निर्माण के पहले संबंधित स्थल की मिट्टी की जांच के बाद भवन की डिजाइन तैयार की जाती है। इसके फ्रेम, स्ट्रक्चर के अनुसार आरसीसी कॉलम, बीम व दीवारों में लोड के अनुसार निर्माण में सरिया और मैटेरियल का प्रयोग होता है। इसमें एम 25 कंकरीट और सीमेंट की मात्रा निर्धारित रहती है। मजबूती के लिए फाउंडेशन से लेकर पूरे भवन के निर्माण में सरिया और कंकरीट का अधिक प्रयोग होता है। इससे भवन निर्माण का खर्च 20 प्रतिशत अधिक बढ़ जाता है।
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अधिकांश निजी भवन नहीं बने हैं भूकंपरोधी
हाई डैमेज रिस्क जोन चतुर्थ में शामिल इस जिले के अधिकांश निजी भवन भूकंपरोधी नहीं बने हैं। शहर के कुछ गिने-चुने भवनों को छोड़ दिया जाए तो 95 फीसदी भवन भूकंपरोधी मानक को पूरा किए बिना ही खड़े कर दिए गए हैं।
ऐसे में अगर रिक्टर स्केल पर अधिक तीव्रता वाला भूकंप आने पर अधिकांश भवनों के ध्वस्त होने का खतरा है। इससे भारी जन एवं धन हानि हो सकती है। पीडब्ल्यूडी निर्माण खंड एक के अधिशासी अभियंता आरके भारद्वाज का कहना है कि शासन के निर्देश के अनुसार नए सरकारी भवन भूकंपरोधी बनाए जा रहे हैं।
अधिकांश सरकारी भवन भूकंपरोधी : सीडीओ
सीडीओ जयेंद्र कुमार का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार सभी सरकारी भवन भूकंपरोधी बनाए जा रहे हैं। इसी के तहत सार्वजनिक भवन, विद्यालय भवन व विभागीय भवनों का निर्माण भूकंपरोधी मानक के अनुसार बनाए जा रहे हैं। इसके लिए नोडल विभाग पीडब्ल्यूडी को बनाया गया है, जिसे मानक की निगरानी करनी है।