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भैरहवा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डेज से सीधे चीन के लिए किया जाए फ्लाइट

Wed, 15 Jan 2020 10:36 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 10:36 PM IST
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discussion on flight for bhairahawan to sichuaan
भैरहवा में चीन के राजदूत मुख्यमंत्री बुटबल के साथ की वार्ता - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
भैरहवा से सिचुवान के लिए सीधी फ्लाइट के लिए हुई चर्चा
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चीन के राजदूत ने बुटवल के मुख्यमंत्री के सामने रखा प्रस्ताव
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर/कपिलवस्तु। नेपाल के बुटवल के मुख्यमंत्री शंकर पोखरेल से बुधवार को चीन के राजदूत होउ यान्छि ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भैरहवा में बन रहे गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट की निर्माण पर चर्चा की। इसके अलावा राजदूत होउ यान्छि ने चीन के सिचुवान से भैरहवा तक सीधी उड़ान सेवा शुरू करने पर बात की, ताकि चीनी पर्यटकों की संख्या बढ़ सके।

मुख्यमंत्री के प्रेस सलाहकार शेर बहादुर केसी के अनुसार चीन के राजदूत होउ यान्छि से मुख्यमंत्री शंकर पोखरेल ने मुलाकात की है। इस दौरान भैरहवा में बन रहे गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट से चीन के लिए सीधे फ्लाइट चलाने पर चर्चा की गई। उन्हें बताया गया कि यह हवाई अड्डा चीनी पर्यटकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां से गौतम बुद्ध की जन्मस्थली नजदीक है। सीधी फ्लाइट होने जाने से प्रदेश पांच और सिचुवान के बीच बेहतर संबंध स्थापित होगा। इसी क्रम में मुख्यमंत्री ने चीन के बड़े अंतरराष्ट्रीय परियोजना बेल्ट एंड रोड इनियासिम, बीआरआई अंतर्गत केरूंग काठमांडू रेल मार्ग योजना की तारीफ करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं को पूरा होने से निश्चित ही नेपाल का विकास होगा। सलाहकार केसी के अनुसार मुख्यमंत्री ने नेपाल तथा चीन की बौद्ध संस्कृति जुड़ी होने की चर्चा करते हुए दोनों देशों के बीच बेहतर संबंध संबंध बनाने की बात कही। साथ ही सिचुवान के गवर्नर को प्रदेश पांच के भ्रमण के लिए निमंत्रण दिया। बता दें कि भैरहवा गौतम बुद्ध इंटरनेशनल एयरपोर्ट लुंबिनी से महज 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसके अलावा भारतीय बॉर्डर से इंटरनेशनल एयरपोर्ट की दूरी महज 12 से 14 किलोमीटर है। ऐसे में यह एयरपोर्ट दोनों देशों की नजर में बेहद महत्वपूर्ण है। इससे पूर्व भी तराई के कई नेेताओं से चीन के राजूदत और राजनीयिक मुलाकात करते हुए कई परियोजनाओं को लाने की बात कह चुके हैं। जानकार बताते हैं कि इसके पीछे चीन का उद्देश्य यह है कि तराई में चीन का प्रभुत्व बढ़ सके।
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