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विकास के मुद्दे पीछे छूटे, जातिगत समीकरण पर सभी का जोर
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विकास के मुद्दे पीछे छूटे, जातिगत समीकरण पर सभी का जोर
शोहरतगढ़ में बदल रहा है सियासी समीकरण
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। विकास के मुद्दे पर बातें कम हो रही हैं, जबकि जातियों के वोट से सियासी गणित लगाई जा रही है। प्रमुख दलों के साथ छोटे व निर्दल प्रत्याशियों के मैदान में मजबूती से उतरने के कारण लड़ाई दिलचस्प हो गई है। बाहरी बनाम स्थानीय के मुद्दे को हवा देने की कोशिश और अधूरे विकास से मतदाता भी असमंजस में हैं कि आखिरी दौर में किसका पलड़ा भारी होगा।
शोहरतगढ़ विधानसभा चुनाव के मतदान की तिथि जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे ही सियासी समीकरण बदल रहा है। कुर्मी बहुल्य इस सीट पर ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी प्रत्याशियों की जीत-हार तय करेंगे। भाजपा गठबंधन के अपना दल एस के प्रत्याशी विनय वर्मा हैं और सपा गठबंधन के सुभासपा प्रत्याशी प्रेमचंद कश्यप को मैदान उतारा है। भाजपा, सपा के नेता इन प्रत्याशियों के साथ चुनावी रण में नजर आ रहे हैं, लेकिन भीतरघात की आशंका भी बनी हुई है। कुर्मी और अन्य मतों के सहेजने के समीकरण से कांग्रेस ने पूर्व विधायक रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी पर दाव लगाया है तो वर्ष 2017 में अपना दल एस के टिकट पर पहली बार चुनाव फतह करने वाले विधायक चौधरी अमर सिंह भी आजाद समाज पार्टी के टिकट पर ताल ठोंक रहे हैं। वहीं भाजपा गठबंधन अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल की छवि के आधार पर वोटरों को अपने पाले में लेना चाहता है। आखिरी दौर में पता चलेगा कि कुर्मी वोट पर किसकी बढ़त ज्यादा है। वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रत्याशी दिवाकर विक्रम सिंह भाजपा के मतों में सेंध लगाने में लगे हैं तो एआईएमआईएम के प्रत्याशी सरफराज अंसारी भी सपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने में सक्रिय नजर आ रहे हैं। भाजपा से दूरी बनाकर बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे राधारमण त्रिपाठी ब्राह्मण और दलित मतदाताओं का समीकरण बैठाने में लगे हैं। छोटे दलों के बड़े नेताओं की चुनावी जनसभाओं से भी मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ गई है।
टिकट बंटवारे से चर्चा में है सीट
शोहरतगढ़ विधानसभा सीट टिकट बंटवारे के बाद चर्चा में रही और लोगों के बीच असमंजस बना रहा। पिछले चुनाव में भाजपा ने सहयोगी दल को सीट दी थी, जबकि इस बार सपा ने भी सहयोगी दल के खाते ही सीट दी है। अंतिम दौर में टिकट तय हुआ तो चुनावी दौड़ में शामिल कई दावेदार बाहर हो गए। बाहर हुए दावेदारों की भी भूमिका का भी असर पड़ सकता है।
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प्रमुख मुद्दे
0 बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान।
0 कठेला को ब्लॉक बनाने की मांग।
0 नेपाल सीमा पर सुविधाओं का अभाव।
0 बढ़नी में बस अड्डा का निर्माण।
0 उद्योग व रोजगार का अभाव।
शोहरतगढ़ विधानसभा, 302
कुल मतदाता-358135
पुरुष-190237
महिला-167856
ट्रांसजेंडर-42
इस बार मैदान में उतरे कुल प्रत्याशी
-रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी-कांग्रेस
-राधारमण त्रिपाठी-बसपा
-विनय वर्मा-अपना दल, एस
-प्रेमचंद्र निषाद-सुभासपा
-चौधरी अमर सिंह-आजाद समाज पार्टी
-दिवाकर विक्रम सिंह-अखिल भारत हिंदू महासभा
-डॉ. मो. सरफराज-एआईएमआईएम
-बक्शी शरद श्रीवास्तव-आम आदमी पार्टी
-ओम प्रकाश-जदयू
-जिलाजीत-नेशनलिस्ट जनशक्ति पार्टी
-विद्यानंद-बहुजन महापार्टी-शिवसागर-निर्दल
वर्ष 2017 की स्थिति
चौधरी अमर सिंह-अपना दल-62000
मोहम्मद जमील-बसपा-45529
उग्रसेन सिंह-सपा-36907
रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी-रालोद-8543
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शोहरतगढ़ में बदल रहा है सियासी समीकरण
सिद्धार्थनगर। शोहरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी तस्वीर साफ नहीं हो पा रही है। विकास के मुद्दे पर बातें कम हो रही हैं, जबकि जातियों के वोट से सियासी गणित लगाई जा रही है। प्रमुख दलों के साथ छोटे व निर्दल प्रत्याशियों के मैदान में मजबूती से उतरने के कारण लड़ाई दिलचस्प हो गई है। बाहरी बनाम स्थानीय के मुद्दे को हवा देने की कोशिश और अधूरे विकास से मतदाता भी असमंजस में हैं कि आखिरी दौर में किसका पलड़ा भारी होगा।
शोहरतगढ़ विधानसभा चुनाव के मतदान की तिथि जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे ही सियासी समीकरण बदल रहा है। कुर्मी बहुल्य इस सीट पर ब्राह्मण, दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ी जातियों के मतदाता भी प्रत्याशियों की जीत-हार तय करेंगे। भाजपा गठबंधन के अपना दल एस के प्रत्याशी विनय वर्मा हैं और सपा गठबंधन के सुभासपा प्रत्याशी प्रेमचंद कश्यप को मैदान उतारा है। भाजपा, सपा के नेता इन प्रत्याशियों के साथ चुनावी रण में नजर आ रहे हैं, लेकिन भीतरघात की आशंका भी बनी हुई है। कुर्मी और अन्य मतों के सहेजने के समीकरण से कांग्रेस ने पूर्व विधायक रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी पर दाव लगाया है तो वर्ष 2017 में अपना दल एस के टिकट पर पहली बार चुनाव फतह करने वाले विधायक चौधरी अमर सिंह भी आजाद समाज पार्टी के टिकट पर ताल ठोंक रहे हैं। वहीं भाजपा गठबंधन अपना दल एस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल की छवि के आधार पर वोटरों को अपने पाले में लेना चाहता है। आखिरी दौर में पता चलेगा कि कुर्मी वोट पर किसकी बढ़त ज्यादा है। वहीं अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रत्याशी दिवाकर विक्रम सिंह भाजपा के मतों में सेंध लगाने में लगे हैं तो एआईएमआईएम के प्रत्याशी सरफराज अंसारी भी सपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने में सक्रिय नजर आ रहे हैं। भाजपा से दूरी बनाकर बसपा के टिकट पर मैदान में उतरे राधारमण त्रिपाठी ब्राह्मण और दलित मतदाताओं का समीकरण बैठाने में लगे हैं। छोटे दलों के बड़े नेताओं की चुनावी जनसभाओं से भी मतदाताओं के बीच हलचल बढ़ गई है।
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टिकट बंटवारे से चर्चा में है सीट
शोहरतगढ़ विधानसभा सीट टिकट बंटवारे के बाद चर्चा में रही और लोगों के बीच असमंजस बना रहा। पिछले चुनाव में भाजपा ने सहयोगी दल को सीट दी थी, जबकि इस बार सपा ने भी सहयोगी दल के खाते ही सीट दी है। अंतिम दौर में टिकट तय हुआ तो चुनावी दौड़ में शामिल कई दावेदार बाहर हो गए। बाहर हुए दावेदारों की भी भूमिका का भी असर पड़ सकता है।
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प्रमुख मुद्दे
0 बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान।
0 कठेला को ब्लॉक बनाने की मांग।
0 नेपाल सीमा पर सुविधाओं का अभाव।
0 बढ़नी में बस अड्डा का निर्माण।
0 उद्योग व रोजगार का अभाव।
शोहरतगढ़ विधानसभा, 302
कुल मतदाता-358135
पुरुष-190237
महिला-167856
ट्रांसजेंडर-42
इस बार मैदान में उतरे कुल प्रत्याशी
-रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी-कांग्रेस
-राधारमण त्रिपाठी-बसपा
-विनय वर्मा-अपना दल, एस
-प्रेमचंद्र निषाद-सुभासपा
-चौधरी अमर सिंह-आजाद समाज पार्टी
-दिवाकर विक्रम सिंह-अखिल भारत हिंदू महासभा
-डॉ. मो. सरफराज-एआईएमआईएम
-बक्शी शरद श्रीवास्तव-आम आदमी पार्टी
-ओम प्रकाश-जदयू
-जिलाजीत-नेशनलिस्ट जनशक्ति पार्टी
-विद्यानंद-बहुजन महापार्टी-शिवसागर-निर्दल
वर्ष 2017 की स्थिति
चौधरी अमर सिंह-अपना दल-62000
मोहम्मद जमील-बसपा-45529
उग्रसेन सिंह-सपा-36907
रवींद्र प्रताप उर्फ पप्पू चौधरी-रालोद-8543