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Siddharthnagar News: नेपाल में मांग, सीमा पर बढ़ी भैंसों की तस्करी

Sat, 18 Jan 2025 10:58 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 18 Jan 2025 10:58 PM IST
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Demand in Nepal, buffalo smuggling increased on the border
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सीमावर्ती इलाके में एक बार फिर पशु तस्कर सक्रिय होते दिखे रहे हैं। बीच में बकरा नेपाल भेजने का काम करते थे, लेकिन अब भैंस व पड़वा बाॅर्डर पार पहुंचाए जा रहे हैं। एसएसबी की ओर से 51 पशुओं के साथ एक तस्कर को पकड़ा गया था। यह तो एजेंसी की निगाह में आने वाले तस्कर हैं। न जाने कितने पशुओं को चराने के बहाने बाॅर्डर पार कर दिया जाता है। उधर, नेपाल में सेटिंग वाले खड़े रहते हैं, जो गाड़ी से या पैदल हांकते हुए निकल जाते हैं।
बड़े पशुओं की तस्करी के पीछे के कारण जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि बकरे की कीमत अधिक है। इसलिए इसके मांस की मांग बढ़ी है। एक भैंस या पड़वे पर उसके वजन के अनुसार दो से चार हजार रुपये तक का मुनाफा है। यह राशि हिस्सों में बंटती है। पशुओं को देहात से खरीदकर लाने में कई लोग शामिल होते हैं, लेकिन पार करने का काम चुनिंदा लोगों को दिया जाता है, जो दिखने में पशु पालक जैसे लगते हैं। उन्हें देखने के बाद सुरक्षा एजेंसी टोकती भी नहीं है। सीमावर्ती क्षेत्र में पूर्व में भी कई बार बड़ी संख्या में पशुओं को पकड़ा जा चुका है।
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नेपाल से लगने वाली 68 किलोमीटर सीमा पर हर सामान की तस्करी होती है। जैसी मांग और कमाई उसी प्रकार से तस्कर धंधे में जुट जाते हैं। नेपाल में पहाड़ी इलाका होने के कारण पशु पालन बहुत मुश्किल से होता है। सीमा से लगभग 50 किलोमीटर के दायरे तक ही समतल जमीन है।
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जहां खेती होती है, और पशु पालन किया जा सकता है। क्योंकि घास यहां बोई जा सकती है और उग सकती है। इसलिए गोवंशीय पशु के साथ-साथ बकरी पालन भी नहीं होता पाता है, लेकिन मांस खाने वाले अधिक हैं। मांस की आपूर्ति किसी न किसी माध्यम से भारतीय क्षेत्र में हो पाती है।
इसमें भी तस्करी के जरिये ही काम हो पाता है, जैसा देखा जा रहा है। नवरात्र में दुर्गा पूजा पर बकरे की बलि देने की प्रथा है। इस बीच दो माह पहले यानी सितंबर से तस्करी शुरू हो जाती है। जैसा की तीन माह में देखा गया है। कई बार में लगभग 300 से अधिक बकरों के साथ तस्करों को दबोचा गया।
पशु तस्करी का केंद्र खुनुवां से बढ़नी तक का इलाका रहा है। इसके पीछे की वजह यह थी कि बकरे कानपुर से लखमीपुर खीरी, गोंडा, बहराइच आदि स्थानों से आते थे। सेट तस्करों के जरिये बाॅर्डर पार कर दिया जाता था।

मौजूदा समय में जिसे बड़ा पशु नेपाल में बोला जाता है। भैंसा व पड़वा की तस्करी शुरू हुई है। शुक्रवार को सीमा के पास एसएसबी महादेव की टीम ने 51 पड़वा और भैंस के साथ एक आरोपी को पकड़ा। उसने बताया कि शोहरतगढ़ थाना क्षेत्र के एक व्यक्ति के कहने पर वह नेपाल लेकर जा रहा था। पुलिस मामले की जांच में जुटी है, लेकिन पशु तस्करों का एक बार फिर सक्रिय होने का मतलब यह है कि अन्य जनपदों में धरपकड़ बढ़ी है।
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