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बैनामा : अब लिखनी होगी क्रेता और विक्रेता की जाति
Thu, 02 May 2024 12:26 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 02 May 2024 12:26 AM IST
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रियल टाइम खतौनी में अंश निर्धारण में बढ़ गया जाति का कॉलम
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। संपत्ति के बैनामे में अब तक लिखा जाता था कि क्रेता एवं विक्रेता अनुसूचित जाति के नहीं हैं तो अनुसूचित जाति की शर्ते नहीं लागू नहीं होतीं। अब कॉलम में क्रेता-विक्रेता की जाति भी दर्ज करनी है। रियल टाइम खतौनी बनाने में अंश निर्धारण के विवरण में जाति का कॉलम भी बनाया गया है। करीब सात दशक बाद बैनामा के आदेश में जाति का कॉलम आया है। इसी के साथ अंश निर्धारण के लिए बैनामा और आदेश में अन्य जानकारियां भी मांगी जा रही हैं, जो अब तक दर्ज नहीं की जा रही थीं।
रियल टाइम खतौनी में आदेश का कॉलम खत्म हो गया है। अब सीधे आदेश का पालन किया जा रहा है। राजस्व परिषद ने खतौनी के सॉफ्टवेयर में कई परिवर्तन किए गए हैं, जबकि बैनामे और आदेश पहले की तरह ही हो रहे हैं। राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल जाति का कॉलम खाली रह जाने पर भी आदेश का पालन हो रहा है। जबकि, बाद में जाति लिखना अनिवार्य हो सकता है, कॉलम खाली नहीं रहेंगे।
अधिवक्ता अनिरुद्ध यादव के अनुसार, 1356 फसली वर्ष के पहले पहले तक बैनामा में जाति लिखा जाता था। उसके बाद 1950 में जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम लागू हुआ तो जाति लिखना बंद कर दिया गया। अब बैनामे में जाति, लिंग के साथ आधार नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर का भी कॉलम है। अगर क्रेता नाबालिग है तो उसकी जन्म तिथि भी लिखी जा रही है। एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि रियल टाइम खतौनी के संबंध में दिशा-निर्देश के लिए राजस्व परिषद से पत्राचार किया जा रहा है।
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आदेश भी होना चाहिए स्पष्ट
बैनामा, वसीयत, वरासत एवं अन्य फैसलों में किसी तिथि का आदेश निरस्त होता है तो उसमें भी कई जानकारियां दी जाएंगी। इसमें लिखा जाएगा कि कितने हिस्से से नाम खारिज किया गया और कितना हिस्सा अवशेष रह गया। आदेश में क्रेता और विक्रेता एक से अधिक हैं तो उसमें सभी के नाम के आगे दर्शाना होगा कि किसने कितना हिस्सा बेचा-खरीदा और उनके नाम कितना शेष रह गया। अब तक एक या दो लाइन में इस तरह के आदेश होते थे, जबकि अब तथ्य और अधिक देने होंगे और इससे पारदर्शिता बढ़ जाएगी। बैनामे में दस्तावेज संख्या और हिस्सेदारी भी लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। दस्तावेज लेखकों व अधिवक्ताओं को भी नए मानकों के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। संपत्ति के बैनामे में अब तक लिखा जाता था कि क्रेता एवं विक्रेता अनुसूचित जाति के नहीं हैं तो अनुसूचित जाति की शर्ते नहीं लागू नहीं होतीं। अब कॉलम में क्रेता-विक्रेता की जाति भी दर्ज करनी है। रियल टाइम खतौनी बनाने में अंश निर्धारण के विवरण में जाति का कॉलम भी बनाया गया है। करीब सात दशक बाद बैनामा के आदेश में जाति का कॉलम आया है। इसी के साथ अंश निर्धारण के लिए बैनामा और आदेश में अन्य जानकारियां भी मांगी जा रही हैं, जो अब तक दर्ज नहीं की जा रही थीं।
रियल टाइम खतौनी में आदेश का कॉलम खत्म हो गया है। अब सीधे आदेश का पालन किया जा रहा है। राजस्व परिषद ने खतौनी के सॉफ्टवेयर में कई परिवर्तन किए गए हैं, जबकि बैनामे और आदेश पहले की तरह ही हो रहे हैं। राजस्व विभाग के सूत्रों के अनुसार, फिलहाल जाति का कॉलम खाली रह जाने पर भी आदेश का पालन हो रहा है। जबकि, बाद में जाति लिखना अनिवार्य हो सकता है, कॉलम खाली नहीं रहेंगे।
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अधिवक्ता अनिरुद्ध यादव के अनुसार, 1356 फसली वर्ष के पहले पहले तक बैनामा में जाति लिखा जाता था। उसके बाद 1950 में जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम लागू हुआ तो जाति लिखना बंद कर दिया गया। अब बैनामे में जाति, लिंग के साथ आधार नंबर, पैन नंबर, मोबाइल नंबर का भी कॉलम है। अगर क्रेता नाबालिग है तो उसकी जन्म तिथि भी लिखी जा रही है। एसडीएम डॉ. ललित कुमार मिश्र ने बताया कि रियल टाइम खतौनी के संबंध में दिशा-निर्देश के लिए राजस्व परिषद से पत्राचार किया जा रहा है।
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आदेश भी होना चाहिए स्पष्ट
बैनामा, वसीयत, वरासत एवं अन्य फैसलों में किसी तिथि का आदेश निरस्त होता है तो उसमें भी कई जानकारियां दी जाएंगी। इसमें लिखा जाएगा कि कितने हिस्से से नाम खारिज किया गया और कितना हिस्सा अवशेष रह गया। आदेश में क्रेता और विक्रेता एक से अधिक हैं तो उसमें सभी के नाम के आगे दर्शाना होगा कि किसने कितना हिस्सा बेचा-खरीदा और उनके नाम कितना शेष रह गया। अब तक एक या दो लाइन में इस तरह के आदेश होते थे, जबकि अब तथ्य और अधिक देने होंगे और इससे पारदर्शिता बढ़ जाएगी। बैनामे में दस्तावेज संख्या और हिस्सेदारी भी लिखना अनिवार्य कर दिया गया है। दस्तावेज लेखकों व अधिवक्ताओं को भी नए मानकों के संबंध में दिशा-निर्देश दिए जा सकते हैं।