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सांपों के साथ नाचते नाचते मिल गया पद्मश्री : गुलाबो

Sun, 21 Nov 2021 11:54 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Nov 2021 11:54 PM IST
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dancing with snakes got padmshree : gulabo
सांपों के साथ नाचते नाचते मिल गया पद्मश्री : गुलाबो
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सिद्धार्थनगर। गांव के बाहर सांपों के साथ नाचते नाचते गुलाबो सपेरा इतनी पारंगत हो गईं कि उन्हें पद्मश्री से अलंकृत किया गया। उनके जीवन में आए परिवर्तन से समाज में भी परिवर्तन आया। जिस सपेरा समाज में बेटियों को जन्म लेते ही मार दिया जाता था, उस समाज की बेटियां आज पढ़ लिख कर तरक्की कर रही हैं।

अपने बारे में ये बातें बताते हुए पद्मश्री गुलाबो सपेरा ने कहा कि बेटियों को तरक्की के रास्ते पर ले जाने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि उनके पिता जंगल के डेरे में रहते थे। सांपों का जहर निकालना और उन्हें नचा कर कुछ कमा लेना उनके जीविका का साधन था। जब वह पैदा हुई तो समाज की कुरीति के कारण दाई माई उन्हें जिंदा दफन कर दिया था। मां और पिता ने उन्हें खोदकर निकाला और बचा लिया। जब वह छोटी थीं तो पिता साथ ले जाते थे और सांपों का जूठा बचा हुआ दूध ही उन्हें पिलाते थे। कुछ बड़ी हुई तो सांपों के साथ खुद नाचने लगी। 1981 में पुष्कर मेले में नृत्य के दौरान उनके कला कौशल पर किसी की नजर पड़ी और मंच मिला तो आगे बढ़ गईं। 165 देशों में वह प्रस्तुति कर चुकी हैं। उनकी तीन बेटियां और एक नातिन भी राजस्थानी लोक नृत्य में पारंगत हो रही हैं।
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