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Siddharthnagar News: टेक्नीशियन के अभाव में बंद पड़ी सीटी स्कैन मशीन
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मेडिकल कालेज के सिटी स्कैन सेंटर में जांच कराने के लिए बाहर खडे मरीज। संवाद
-मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई है पांच करोड़ की मशीन, नहीं मिल रहा लाभ
-140 डेल की लगाई गई हैं मशीन, नहीं हो रही जांच, बेहतर रिपोर्ट के लिए जाना पड़ता हैं निजी लैब में
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं होने के बाद भी मैन पॉवर न होने के कारण मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए मजबूर होकर मरीजों को बाहर जाकर जांच कराना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें रुपये खर्च करना पड़ रहा है। इसमें सिटी स्कैन मशीन शामिल है।
पांच करोड़ रुपये की लागत से दो मशीन खरीदकर रखी गई है। लेकिन रेडियोलॉजी न होने के कारण मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। पहले से चल रही मशीन चल रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 40-50 मरीजों को जांच हो पाती है। अगर दोनों मशीन चालू हो जाता तो 150 मरीजों की जांच हो जाती। ऐसे में मरीजों को नंबर नहीं लगाना पड़ता।
जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज होने के बाद संसाधन को बढ़ाया जा रहा है। इसमें जांच मशीन से लेकर बेड आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन मरीजों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण संसाधन तो लाकर रख दिया गया, लेकिन चलाने के लिए विशेषज्ञ ही नहीं मिल पा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज होने के बाद मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। 500-800- के बीच में रहने वाला ओपीडी का आंकड़ा 1500-1800 को छूने लगा है। इसमें सामान्य समस्या लेकर गंभीर रोगी भी पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक समस्या सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड कराने में हो रही है। कारण मशीन है, लेकिन चलाने वाले ही नहीं हैं। ऐसे में आने वालों को नंबर लगाना पड़ रहा है। जिनका चलने लायक है वह तो दो दिन बाद चले आते हैं। लेकिन जिनका तत्काल जरूरी है, उन्हें निजी में जाना पड़ता है। जिसके लिए रुपये खर्च हो रहे हैं। एक सिटी स्कैन मशीन चल रही है। जिस पर 40-50 लोगों की प्रतिदिन जांच होती है। जबकि, जांच कराने वाले 80-90 हो जाते हैं। ऐसे में वे वेटिंग में चले जाते हैं। कुछ बाहर जाकर जांच कर रहे हैं तो कुछ इंतजार करके आते हैं। जबकि, सिटी स्कैन के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत की दो मशीन रखी है। विशेषज्ञ न होने के कारण उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। सोमवार को जांच करने के लिए पहुंचे रामलौटन निवासी भनवापुर ने बताया कि डॉक्टर ने सिटी स्कैन लिखा था। पर जांच नहीं हुआ। वहीं, कलीमुन निवासी कोहल ने बताया कि जांच के लिए आए थे। बताया जा रहा है कि एक दिन बाद आना। अब दवा लेकर जा रहे हैं फिर आएंगे या तो बाहर करवा लेंगे। ऐसा एक नहीं अनेकों मरीजों के साथ प्रतिदिन हो रहा है। अगर दोनों मशीन चलती तो शायद परेशानी नहीं होती।
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रेडियोलॉजी की तैनाती जल्द हो जाएगी। इसके बाद मशीन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। मरीजों की सहूलियत पर ध्यान दिया जा रहा है।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य
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-140 डेल की लगाई गई हैं मशीन, नहीं हो रही जांच, बेहतर रिपोर्ट के लिए जाना पड़ता हैं निजी लैब में
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में सुविधाएं होने के बाद भी मैन पॉवर न होने के कारण मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए मजबूर होकर मरीजों को बाहर जाकर जांच कराना पड़ रहा है। इसके लिए उन्हें रुपये खर्च करना पड़ रहा है। इसमें सिटी स्कैन मशीन शामिल है।
पांच करोड़ रुपये की लागत से दो मशीन खरीदकर रखी गई है। लेकिन रेडियोलॉजी न होने के कारण मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है। पहले से चल रही मशीन चल रही है, जिससे प्रतिदिन लगभग 40-50 मरीजों को जांच हो पाती है। अगर दोनों मशीन चालू हो जाता तो 150 मरीजों की जांच हो जाती। ऐसे में मरीजों को नंबर नहीं लगाना पड़ता।
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जिला अस्पताल से मेडिकल कॉलेज होने के बाद संसाधन को बढ़ाया जा रहा है। इसमें जांच मशीन से लेकर बेड आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है, लेकिन मरीजों को सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण संसाधन तो लाकर रख दिया गया, लेकिन चलाने के लिए विशेषज्ञ ही नहीं मिल पा रहे हैं। मेडिकल कॉलेज होने के बाद मरीजों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। 500-800- के बीच में रहने वाला ओपीडी का आंकड़ा 1500-1800 को छूने लगा है। इसमें सामान्य समस्या लेकर गंभीर रोगी भी पहुंच रहे हैं। सबसे अधिक समस्या सिटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड कराने में हो रही है। कारण मशीन है, लेकिन चलाने वाले ही नहीं हैं। ऐसे में आने वालों को नंबर लगाना पड़ रहा है। जिनका चलने लायक है वह तो दो दिन बाद चले आते हैं। लेकिन जिनका तत्काल जरूरी है, उन्हें निजी में जाना पड़ता है। जिसके लिए रुपये खर्च हो रहे हैं। एक सिटी स्कैन मशीन चल रही है। जिस पर 40-50 लोगों की प्रतिदिन जांच होती है। जबकि, जांच कराने वाले 80-90 हो जाते हैं। ऐसे में वे वेटिंग में चले जाते हैं। कुछ बाहर जाकर जांच कर रहे हैं तो कुछ इंतजार करके आते हैं। जबकि, सिटी स्कैन के लिए लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत की दो मशीन रखी है। विशेषज्ञ न होने के कारण उसका संचालन नहीं हो पा रहा है। सोमवार को जांच करने के लिए पहुंचे रामलौटन निवासी भनवापुर ने बताया कि डॉक्टर ने सिटी स्कैन लिखा था। पर जांच नहीं हुआ। वहीं, कलीमुन निवासी कोहल ने बताया कि जांच के लिए आए थे। बताया जा रहा है कि एक दिन बाद आना। अब दवा लेकर जा रहे हैं फिर आएंगे या तो बाहर करवा लेंगे। ऐसा एक नहीं अनेकों मरीजों के साथ प्रतिदिन हो रहा है। अगर दोनों मशीन चलती तो शायद परेशानी नहीं होती।
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रेडियोलॉजी की तैनाती जल्द हो जाएगी। इसके बाद मशीन का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। मरीजों की सहूलियत पर ध्यान दिया जा रहा है।
-प्रो. राजेश मोहन, प्राचार्य