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Siddharthnagar News: नेपाल के प्रभुनाथ में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
बढ़नी। नेपाल के प्यूठान जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल प्रभू नाथ बाबा धाम में भारत से श्रद्धालुओं का जत्था प्रतिदिन दर्शन करने पहुंच रहा है।
जिले समेत प्रदेश के बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, महराजगंज और आसपास के जिलों से रोजाना हजारों की संख्या में भक्त नेपाल के बढ़नी बाॅर्डर के रास्ते प्यूठान पहुंच रहे हैं।
सावन माह में प्रभुनाथ बाबा के दर्शन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके चलते हर दिन भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। प्रभुनाथ बाबा धाम को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन करने से विशेष मनोकामनाएं पूर्ण होती है। खासकर सावन के महीने में यहां जल चढ़ाने और विशेष पूजा करने की परंपरा रही है।
इस धार्मिक यात्रा से न केवल भारत-नेपाल के आपसी संबंधों को मजबूती मिल रही है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ हो रहा है।
स्वामी हंसानंद ने की थी मंदिर की स्थापना: मान्यता है कि प्रभु नाथ बाबा के मंदिर की स्थापना गुरु महाराज नारायण खत्री (स्वामी हंसानंद) ने की थी। उन्होंने अपना जीवन हजारों गायों को चराने और उनका दूध निकाल कर लोगों में बांटने में बिताया।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार उनके कुछ भक्त यह देखने के लिए उनका पीछा करते थे कि वह गायों को चराने कहां लेकर जाते हैं, लेकिन वे उन्हें ढूंढ नहीं पाए। माना जाता है कि वह रोलपा से वर्तमान मंदिर स्थल पर आए थे और जमींदार से भूमि दान करने को कहा। इसके बाद उन्होंने जमीन की खोदाई की, जिसमें दही मिश्रित चावल और अग्नि की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में पांडवों ने स्वर्ग जाने से पहले इस स्थान पर पूजा कर यहां सारी चीजें दफनाई थीं। यह सुनकर जमींदार हैरान रह गए। वह तुरंत जमीन सौंपने को तैयार हो गए।
तब से यह पवित्र अग्नि निरंतर जल रही है। बताया जाता है कि पवित्र अग्नि से जलाई गई लकड़ी की राख विभिन्न शारीरिक विकारों को ठीक कर देती है। स्वामी हंसानंद ने शरीर छोड़ने से पहले अपनी कुछ शक्तियां अपने शिष्यों को दी थी।
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बढ़नी। नेपाल के प्यूठान जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल प्रभू नाथ बाबा धाम में भारत से श्रद्धालुओं का जत्था प्रतिदिन दर्शन करने पहुंच रहा है।
जिले समेत प्रदेश के बस्ती, गोंडा, बलरामपुर, महराजगंज और आसपास के जिलों से रोजाना हजारों की संख्या में भक्त नेपाल के बढ़नी बाॅर्डर के रास्ते प्यूठान पहुंच रहे हैं।
सावन माह में प्रभुनाथ बाबा के दर्शन को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इसके चलते हर दिन भक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। प्रभुनाथ बाबा धाम को लेकर मान्यता है कि यहां दर्शन करने से विशेष मनोकामनाएं पूर्ण होती है। खासकर सावन के महीने में यहां जल चढ़ाने और विशेष पूजा करने की परंपरा रही है।
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इस धार्मिक यात्रा से न केवल भारत-नेपाल के आपसी संबंधों को मजबूती मिल रही है, बल्कि सीमावर्ती इलाकों की स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ हो रहा है।
स्वामी हंसानंद ने की थी मंदिर की स्थापना: मान्यता है कि प्रभु नाथ बाबा के मंदिर की स्थापना गुरु महाराज नारायण खत्री (स्वामी हंसानंद) ने की थी। उन्होंने अपना जीवन हजारों गायों को चराने और उनका दूध निकाल कर लोगों में बांटने में बिताया।
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पौराणिक कथाओं के अनुसार उनके कुछ भक्त यह देखने के लिए उनका पीछा करते थे कि वह गायों को चराने कहां लेकर जाते हैं, लेकिन वे उन्हें ढूंढ नहीं पाए। माना जाता है कि वह रोलपा से वर्तमान मंदिर स्थल पर आए थे और जमींदार से भूमि दान करने को कहा। इसके बाद उन्होंने जमीन की खोदाई की, जिसमें दही मिश्रित चावल और अग्नि की प्राप्ति हुई। उन्होंने बताया कि द्वापर युग में पांडवों ने स्वर्ग जाने से पहले इस स्थान पर पूजा कर यहां सारी चीजें दफनाई थीं। यह सुनकर जमींदार हैरान रह गए। वह तुरंत जमीन सौंपने को तैयार हो गए।
तब से यह पवित्र अग्नि निरंतर जल रही है। बताया जाता है कि पवित्र अग्नि से जलाई गई लकड़ी की राख विभिन्न शारीरिक विकारों को ठीक कर देती है। स्वामी हंसानंद ने शरीर छोड़ने से पहले अपनी कुछ शक्तियां अपने शिष्यों को दी थी।