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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   two child dead body found in river, police confused, murder or accident

हत्या या डूबकर हुई मौत, पुलिस के सामने खड़ा हुआ सवाल

Fri, 23 Oct 2015 11:39 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर
अमर उजाला ब्यूरो/सिद्धार्थनगर Updated Fri, 23 Oct 2015 11:39 PM IST
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 न जाने फूल से मासूम बच्चों पर किसकी नजर लग गई, सबकी आंखों के तारा रहे।
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खेलने-खाने की कच्ची उम्र में भी परिवार का हाथ बांटने में लगे रहे।
ईश्वर ने इस उम्र में भी उन्हें इतनी समझ दी थी कि घर की आर्थिक स्थिति को समझते रहे, कभी कोई चीज के लिए जिद नहीं करते। यह कह कर पिता दिलीप कुमार पाठक फफक पड़ते हैं।
वह शुक्रवार को अपने दोनों मासूम बच्चों का पीएम कराने के लिए पोस्टमार्टम हाउस पर पहुंचे थे।
रुंधें कंथ से कहते हैं कि तीन संतानों में बड़ी बेटी रोजी (9) व कैलाश नाथ उर्फ किट्टू (7) व कार्तिकनाथ उर्फ बिट्टू (5) रहे। गुरुवार को रोजाना की भांति दोपहर का खाना लेकर गए थे।

पक्की सड़क को पार कराने के बाद उन्हें गांव के रास्ते पर पहुंचाने के बाद दुकान पर आ गया। क्या मालूम था कि यह उनसे आखिरी मुलाकात है।
अगर जरा सा भी इल्म होता तो उन्हें कभी नहीं छोड़ता। किसी से दुश्मनी भी नहीं है। लेकिन जब शव मिला तो उनके नाक से खून रिस रहा था।
घर में पत्नी व बेटी का बुरा हाल है। दोनों की भी तबियत खराब हो गई है। 
 गरीबी से तो परिवार लड़कर गुजर बसर कर रहा था। लेकिन अब दोनो बच्चों की मौत से सभी टूट गए है।
पीएम हाउस पर पहुंचे ग्रामीण कहते है कि पूरे क्षेत्र में जो भी इस घटना को सुन रहा है उसका कलेजा दहल जा रहा है। गांव में मातम छा गया है।
कहते है कि दिलीप पाठक अपने स्वभाव से क्षेत्र में लोकप्रिय रहे। वैसे ही इनके मासूम बच्चें गांव के लोगों के आंख के तारा बने रहते थे।
सभी को प्रणाम करने के साथ खेलना इनकी आदत में शुमार रहा। इनके परिवार की किसी से दुश्मनी भी नही थी। सब से मिलकर रहते थे।
दुकान के सहारे घर चलता था, लेकिन दोनो चिराग बुझने से मानो पहाड़ टूट गया हो। गांव के लोगो से बात करने पर उनके आखो से  आसू छलक जाते है।
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डूबे या हत्या, कैसे हुई मौत, खड़ा हो गया सवाल
शुक्रवार की सुबह तालाब में उतराई दो मासूमों की लाश ने कई सवालों को खड़ा कर दिया।
किस समय मौत व कैसे मौत हुई, फिलहाल इसका खुलासा पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही होगा।
पुलिस के सामने कई सवाल मुंह खोल कर खड़े हो गए है। जैसे कि लाश मिलने के समय मासूमों के नाक से खून रिस रहा था।
पिता के अनुसार करीब 18 घंटे पूर्व दोनों बच्चें आखिरी बार उनसे मिले। इसके बाद वह कहां गए, किसी को खबर नहीं। मौत होने के इतने देर में शव फूलने लगता है, यह भी कहीं दिखा।
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ग्रामीणों ने रात को करीब 10 बजे तालाब में भी जाल डाला, लेकिन शव नहीं मिला। अगर घटना चार बजे डूबने से होती तो 6 घंटे में लाश उतराई मिलती।
बावजूद इसके ग्रामीणों की चर्चा पर ध्यान दे तो दो मासूमों की मौत की खबर से पूरे क्षेत्र में कोहराम मच गया।
कोई हत्या करने के बाद लाश को तालाब में फेंकने की बात कह रहा है तो कोई वापस आने के दौरान तालाब के किनारे शौच करने के दौरान घटना घटित होना बता रहा है।
लेकिन पुलिस प्रथमदृष्टया मौत का कारण डूबना मान रही है।
पिता दिलीप पाठक का कहना है कि किसी से हमारी दुश्मनी नही है तो मेरे दोनो मासूमों को आखिर कोई क्यो मारेगा। इनसे क्या दुश्मनी हो सकती है।
एसओ संजय पांडेय के अनुसार रात को जाल में शव न फंसना सवाल खड़ा कर रहा है। अभी पीएम रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
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