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विसरा से सुलझेगी इंस्पेक्टर की मौत की गुत्थी

Wed, 29 May 2019 11:27 PM IST
siddharthnagar Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 29 May 2019 11:27 PM IST
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विसरा से सुलझेगी इंस्पेक्टर की मौत की गुत्थी
investigation
सिद्धार्थनगर। साइबर सेल के प्रभारी के तौर पर जिले में तैनात इंस्पेक्टर पंकज कुमार शाही की मौत की गुत्थी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी नहीं सुलझ पाई। इसकी वजह से पुलिस ने विसरा प्रिजर्व कर जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेज दिया है। वही, दूसरी ओर पंकज के भाई सोनू शाही ने मौत पर संदेह जताते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उनका कहना है कि एक सप्ताह से अगर इंस्पेक्टर पंकज शाही लापता थे, इसके बावजूद पुलिस उनकी खोज खबर नहीं लेती है। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में हैं।
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पंकज कुमार शाही के आवास के सामने एसपी के स्टेनो पूरे परिवार के साथ रहते हैं। बताते हैं कि पंकज के कमरे से दो-तीन दिनों से दुर्गंध आ रही थी, लेकिन आसपास किसी जानवर के मरने की आशंका से आसपास रहने वालों ने ध्यान नहीं दिया। लेकिन जब दुर्गंध बढ़ी तो लोगों को शंका हुई। इसके बाद पंकज के आवास को खुलवाया गया, जहां वह मृत पाए गए। सूचना पर मंगलवार की देर रात पहुंचीं उनकी पत्नी प्रतिभा, भाई सोनू शाही ने कहा कि पुलिस की कार्यप्रणाली पूरी तरह से संदेह के घेरे में है। अगर एक सप्ताह से उनके भाई पंकज लापता थे, तो पुलिस को इसकी जांच करनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस ने लापरवाही बरती। बता दें कि पंकज कुमार शाही (45) पुत्र कृपाशंकर शाही निवासी पकड़ी बाबू थाना भाटपाररानी जिला देवरिया 2001 बैच के दरोगा थे। इंस्पेक्टर के पद पर एक मार्च को 2018 को पदोन्नति मिली थी। 30 मई 2018 को जिले में स्थानांतरित होकर आए थे। उनकी लाश उनके आवास में कमरे में मिली थी।
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22 मई को वीडियो कॉलिंग हुई थी बात
पंकज के भाई सोनू शाही ने बताया कि भाभी से 22 मई की रात वीडियो कालिंग पर बात हुई थी। सब कुछ ठीक था। इस बीच 23 मई को कॉल किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। बताया कि पंकज के पास तीन नंबर थे, तीनों नंबरों पर 24 मई तक कॉल किया गया। लेकिन फोन नहीं उठा और अंत में तीनों नंबर पर स्विच ऑफ बताने लगा। उन्होंने बताया कि परिजनों को लगा कि किसी काम में व्यस्त होंगे, इसलिए फिर से संपर्क नहीं साधा गया। बताया कि काम की वजह से वह 10-10 दिनों तक बात नहीं करते थे। इसलिए इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया।
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पुलिस को करनी चाहिए थी खोजबीन
पंकज के भाई सोनू ने बताया कि जिम्मेदार पद पर आसीन होने के बाद भी पुलिस महकमे ने उनकी खोज खबर लेना जरूरी नहीं समझा। जबकि 23 मई को मतगणना में उनकी ड्यूटी भी लगाई गई थी। वह ड्यूटी पर नहीं गए, इसके बाद भी उनकी खोज खबर नहीं ली गई। जबकि उनका आवास भी पुलिस लाइंस में ही था। आसपास जिम्मेदार लोग भी रहते हैं। इसके बाद भी इस पर ध्यान न देना कहीं न कहीं पुलिस की कहानी पर शक पैदा कर रहा है। बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। विसरा प्रिजर्व करा लिया गया है।
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