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Siddharthnagar News: ठंड ने लोगों की बढ़ाई मुसीबत, किसानों के चेहरे खिले

Wed, 22 Jan 2025 10:45 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2025 10:45 PM IST
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Cold increased people's troubles, farmers' faces lit up
भनवापुर क्षेत्र में लहलहाती गेहूं की फसल। संवाद
-गेहूं की फसल के लिए 12 से 16 डिग्री सेल्सियस तापमान बेहतर
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संवाद न्यूज एजेंसी
भनवापुर। शीतलहर व कोहरे के चलते लोग भले ही ठिठुर रहे हों, लेकिन किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। मकर संक्रांति तक कोहरे का असर कम होने पर किसानों को चिंता सताने लगी थी, क्योंकि यही मौसम गेहूं की फसल के लिए काफी लाभकारी साबित होता। विशेषज्ञों की मानें तो गेहूं की फसल के लिए 12 से 16 डिग्री सेल्सियस तापमान और कोहरे का मौसम बेहतर माना जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र सोहना के वैज्ञानिक डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि गेहूं का अच्छा उत्पादन उन क्षेत्रों में होता, जहां फसल उगाने की अवधि के दौरान ठंडा एवं नम मौसम होता है, और उसके बाद सूखा, गर्म मौसम अनाज को ठीक से पकने में सक्षम बनाता है। यदि फसल अवधि के दौरान प्रारंभ से ही मौसम गर्म व सूखा रहता है, तो फसल की वृद्धि एवं विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पता है। बीज पूर्ण रूप से विकसित होने से पहले पकने लगता है और पैदावार कम हो जाती है। पौधों के वानस्पतिक विकास के लिए औसत तापमान 12 से 16 डिग्री उचित होता है। यदि वानस्पतिक अवस्था में तापमान 18 से ऊपर होगा तो विकास प्रभावित होता है।
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यह तापमान 20 के ऊपर चला गया तो विकास पूरी तरीके से रुक कर बाली बनने की अवस्था आरंभ हो जाती है। जो गेहूं की फसल के उत्पादन पर विपरीत प्रभाव डालती है। इस समय जनपद का तापमान लगभग 17 से 20 डिग्री सेल्सियस है। जो गेंहू की वृद्धि एवं विकास के लिए उपयुक्त है। यदि पाला पड़ता है तो किसान गेंहू की फसल को बचाने के लिए खेती में उपयुक्त नमी बनाए रखें।
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डॉ. प्रवेश कुमार ने बताया कि यह मौसम मटर, चना, सरसो, जौ, गन्ना के लिए भी बहुत ही उत्तम है। कोहरा व शीतलहर इन फसलों को जहां मजबूती प्रदान करती है। वहीं फसलों की गुणवत्ता के साथ उपज में भी वृद्धि होती है। शीतकाल व कोहरा के दौरान तापमान में गिरावट से मृदा की उर्वरा शक्ति में वृद्धि बढ़ती है।
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