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शहर के विद्यार्थी कस्बे में जाते हैं पीजी कोर्स करने
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शहर के विद्यार्थी कस्बे में जाते हैं पीजी कोर्स करने
सिद्धार्थनगर। एक ऐसा महाविद्यालय, जहां 64 वर्ष में भी पोस्ट ग्रेजुएट की मान्यता नहीं मिल सकी। जिला मुख्यालय का बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय में सिर्फ स्नातक की पढ़ाई हो रही है। स्थापना के इतने साल व्यतीत होने के दौरान जिला बना और विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई। इसके बाद भी शहर और आसपास के विद्यार्थियों को पीजी की पढ़ाई के लिए दूरदराज कॉलेजों में जाना पड़ता है। शहर के विद्यार्थी पीजी कोर्स करने शोहरतगढ़, बांसी, कपिलवस्तु जाते हैं।
जिला मुख्यालय स्थित नौगढ़ कस्बे में वर्ष 1957 में इस पिछड़े क्षेत्र के युवाओं को स्नातक तक की पढ़ाई के लिए शिक्षाविद् पंडित राम शंकर मिश्र ने बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की स्थापना की। उसके बाद यह कॉलेज दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से संबद्ध रहा। इसकी स्थापना होने के इतने वर्षों में पीजी की कक्षाएं न चलना निश्चय ही एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। पीजी की कक्षाएं न चलने से मुख्यालय समेत आसपास के विद्यार्थियों को शोहरतगढ़, बांसी स्थित कॉलेजों समेत बलरामपुर के एमएलके कॉलेज में नामांकन करना मजबूरी है।
प्रतिदिन कक्षा पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुश्किल भरा काम है। छोटी लाइन थी तो ट्रेन से आवागमन में आसानी थी। बड़ी लाइन होने के बाद बलरामपुर तक आवागमन में दिक्कत हो गई है। पढ़ने वाले छात्र वहां किराए का कमरा लेकर अध्ययन करने के लिए मजबूर हैं। 29 दिसंबर 1988 को बस्ती से विभाजित कर सिद्धार्थनगर को जिला बनाया गया, जिसका मुख्यालय नौगढ़ ही रखा।
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लगभग 32 वर्ष जिला बनने के बाद भी इस दिशा में प्रयास नहीं हुए। सर्वाधिक चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तीन वर्ष पूर्व कपिलवस्तु में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई। इस विश्वविद्यालय से पीजी की मान्यता मिलनी है। बावजूद इसके धरातल पर कोई परिणाम नहीं आ सका।
इस बारे में प्राचार्य डॉ. भारत भूषण द्विवेदी ने कहा कि पीजी की मान्यता के लिए कई औपचारिकताएं हैं। प्रबंधतंत्र को उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय से शून्य घोषित किया गया है। प्रबंधतंत्र के पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद इस दिशा में उच्च स्तर पर पत्रावली को भेजा जाएगा।
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सिद्धार्थनगर। एक ऐसा महाविद्यालय, जहां 64 वर्ष में भी पोस्ट ग्रेजुएट की मान्यता नहीं मिल सकी। जिला मुख्यालय का बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय में सिर्फ स्नातक की पढ़ाई हो रही है। स्थापना के इतने साल व्यतीत होने के दौरान जिला बना और विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई। इसके बाद भी शहर और आसपास के विद्यार्थियों को पीजी की पढ़ाई के लिए दूरदराज कॉलेजों में जाना पड़ता है। शहर के विद्यार्थी पीजी कोर्स करने शोहरतगढ़, बांसी, कपिलवस्तु जाते हैं।
जिला मुख्यालय स्थित नौगढ़ कस्बे में वर्ष 1957 में इस पिछड़े क्षेत्र के युवाओं को स्नातक तक की पढ़ाई के लिए शिक्षाविद् पंडित राम शंकर मिश्र ने बुद्ध विद्यापीठ महाविद्यालय की स्थापना की। उसके बाद यह कॉलेज दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर से संबद्ध रहा। इसकी स्थापना होने के इतने वर्षों में पीजी की कक्षाएं न चलना निश्चय ही एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। पीजी की कक्षाएं न चलने से मुख्यालय समेत आसपास के विद्यार्थियों को शोहरतगढ़, बांसी स्थित कॉलेजों समेत बलरामपुर के एमएलके कॉलेज में नामांकन करना मजबूरी है।
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प्रतिदिन कक्षा पहुंचने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मुश्किल भरा काम है। छोटी लाइन थी तो ट्रेन से आवागमन में आसानी थी। बड़ी लाइन होने के बाद बलरामपुर तक आवागमन में दिक्कत हो गई है। पढ़ने वाले छात्र वहां किराए का कमरा लेकर अध्ययन करने के लिए मजबूर हैं। 29 दिसंबर 1988 को बस्ती से विभाजित कर सिद्धार्थनगर को जिला बनाया गया, जिसका मुख्यालय नौगढ़ ही रखा।
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लगभग 32 वर्ष जिला बनने के बाद भी इस दिशा में प्रयास नहीं हुए। सर्वाधिक चौंकाने वाली बात यह है कि पिछले तीन वर्ष पूर्व कपिलवस्तु में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की स्थापना भी हुई। इस विश्वविद्यालय से पीजी की मान्यता मिलनी है। बावजूद इसके धरातल पर कोई परिणाम नहीं आ सका।
इस बारे में प्राचार्य डॉ. भारत भूषण द्विवेदी ने कहा कि पीजी की मान्यता के लिए कई औपचारिकताएं हैं। प्रबंधतंत्र को उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय से शून्य घोषित किया गया है। प्रबंधतंत्र के पूर्ण रूप से सक्रिय होने के बाद इस दिशा में उच्च स्तर पर पत्रावली को भेजा जाएगा।