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Siddharthnagar News: जिला अस्पताल में अव्यवस्था के कारण गुमराह हो रहे मरीज
Tue, 21 Feb 2023 10:59 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 21 Feb 2023 10:59 PM IST
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जिला अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे लोग। संवाद
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- ओपीडी में कर्मचारियों का तय ड्रेस कोड नहीं
- डॉक्टरों के बैठने का दिन बोर्ड पर नहीं किया गया चस्पा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी में अव्यवस्था के कारण मरीज गुमराह हो रहे हैं। आउटसोर्स कर्मियों का ड्रेस कोड नहीं है और उनके गले में आईकार्ड नहीं है, जबकि डॉक्टरों के बैठने का दिन तय होने की सूचना चस्पा नहीं है।
जब भी कोई मरीज डॉक्टर को तलाश करते हुए भटकता है तो दलाल उन्हें गलत सूचना देकर ठगने की कोशिश करते हैं। हालत यह है कि लोग किसी से मदद मांगने में डर रहे हैं।
अमर उजाला टीम ने मंगलवार को ओपीडी में पड़ताल की तो अव्यवस्था के कारण लोग भटकते नजर आएं। जनरल सर्जरी की ओपीडी डुमरियागंज के अनिल कुमार ने दिक्कतों पर बातें की। किसी से मदद मांगने के सवाल उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आता है कि किससे मदद मांगे। आसानी से पता नहीं चल पाता है कि ओपीडी गेट पर कौन हेल्प डेस्क का कर्मचारी है और कौन बाहरी।
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शहर के संतोष ने मेडिसिन विभाग के सामने मिले। उन्होंने कहा कि ओपीडी में जो लोग डॉक्टर की तलाश करते दिखते हैं, उन्हें दलाल पहचान लेते हैं। ओपीडी में डॉक्टरों के बैठने का दिन नहीं लिखा है। दलाल बता देते हैं कि आज डॉक्टर नहीं आएंगे और मरीज मजबूर होकर उनके झांसे में आ जाते हैं और प्राइवेट में दूसरे डॉक्टर को दिखाने चले जाते हैं।
इसी प्रकार अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच और मेडिकल स्टोर के दलाल भी ओपीडी में बेखौफ घूमते रहते हैं।
आउटसोर्स एजेंसी के आशीष ने बताया कि 200 से अधिक कर्मचारी मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी कर रहे हैं। सभी को आई कार्ड दिया गया है। ओपीडी में मंगलवार को 1,021 मरीजों ने पंजीयन कराया, जबकि पुराने पर्चे वाले मरीजों को भी परामर्श दिया गया।
सेवानिवृत्त और स्थानांतरित डॉक्टरों के भी नाम
ओपीडी कक्ष के बाहर यह सूचना चस्पा नहीं है कि किस दिन कौन डॉक्टर बैठेंगे। जो मरीज एक दिन डॉक्टर से जांच लिखवाकर जाता है, उसे उसी डॉक्टर रिपोर्ट दिखाने के लिए दिन की जानकारी नहीं हो पाती है। पंजीयन काउंटर के पास दीवार डॉक्टरों के नाम लिखे हैं, पीले रंग में जो नई सूची है, उसमें कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो जिला अस्पताल में तैनात नहीं हैं, जबकि नीले रंग के बोर्ड पर पुरानी सूची है, जिसमें तीन साल पहले सेवानिवृत्त या स्थानांतरित हो चुके डॉक्टरों के भी नाम हैं। स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क मंत्री रवींद्र जायसवाल निरीक्षण करने आए थे तो उन्होंने अस्पताल में सही सूचनाएं नहीं लिखी होने पर नाराजगी जताई थी।
ओपीडी में डॉक्टरों के दिन तय हैं। इसकी सूचना ओपीडी में लगाई जाएगी। आउटसोर्स एजेंसी के प्रबंधक को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारी अपने गले में कंपनी का कार्ड लटकाकर ही ड्यूटी करें।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज
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- डॉक्टरों के बैठने का दिन बोर्ड पर नहीं किया गया चस्पा
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संयुक्त जिला अस्पताल की ओपीडी में अव्यवस्था के कारण मरीज गुमराह हो रहे हैं। आउटसोर्स कर्मियों का ड्रेस कोड नहीं है और उनके गले में आईकार्ड नहीं है, जबकि डॉक्टरों के बैठने का दिन तय होने की सूचना चस्पा नहीं है।
जब भी कोई मरीज डॉक्टर को तलाश करते हुए भटकता है तो दलाल उन्हें गलत सूचना देकर ठगने की कोशिश करते हैं। हालत यह है कि लोग किसी से मदद मांगने में डर रहे हैं।
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अमर उजाला टीम ने मंगलवार को ओपीडी में पड़ताल की तो अव्यवस्था के कारण लोग भटकते नजर आएं। जनरल सर्जरी की ओपीडी डुमरियागंज के अनिल कुमार ने दिक्कतों पर बातें की। किसी से मदद मांगने के सवाल उन्होंने कहा कि समझ में नहीं आता है कि किससे मदद मांगे। आसानी से पता नहीं चल पाता है कि ओपीडी गेट पर कौन हेल्प डेस्क का कर्मचारी है और कौन बाहरी।
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शहर के संतोष ने मेडिसिन विभाग के सामने मिले। उन्होंने कहा कि ओपीडी में जो लोग डॉक्टर की तलाश करते दिखते हैं, उन्हें दलाल पहचान लेते हैं। ओपीडी में डॉक्टरों के बैठने का दिन नहीं लिखा है। दलाल बता देते हैं कि आज डॉक्टर नहीं आएंगे और मरीज मजबूर होकर उनके झांसे में आ जाते हैं और प्राइवेट में दूसरे डॉक्टर को दिखाने चले जाते हैं।
इसी प्रकार अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, पैथोलॉजी जांच और मेडिकल स्टोर के दलाल भी ओपीडी में बेखौफ घूमते रहते हैं।
आउटसोर्स एजेंसी के आशीष ने बताया कि 200 से अधिक कर्मचारी मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी कर रहे हैं। सभी को आई कार्ड दिया गया है। ओपीडी में मंगलवार को 1,021 मरीजों ने पंजीयन कराया, जबकि पुराने पर्चे वाले मरीजों को भी परामर्श दिया गया।
सेवानिवृत्त और स्थानांतरित डॉक्टरों के भी नाम
ओपीडी कक्ष के बाहर यह सूचना चस्पा नहीं है कि किस दिन कौन डॉक्टर बैठेंगे। जो मरीज एक दिन डॉक्टर से जांच लिखवाकर जाता है, उसे उसी डॉक्टर रिपोर्ट दिखाने के लिए दिन की जानकारी नहीं हो पाती है। पंजीयन काउंटर के पास दीवार डॉक्टरों के नाम लिखे हैं, पीले रंग में जो नई सूची है, उसमें कई ऐसे डॉक्टर हैं, जो जिला अस्पताल में तैनात नहीं हैं, जबकि नीले रंग के बोर्ड पर पुरानी सूची है, जिसमें तीन साल पहले सेवानिवृत्त या स्थानांतरित हो चुके डॉक्टरों के भी नाम हैं। स्टांप एवं न्यायालय पंजीयन शुल्क मंत्री रवींद्र जायसवाल निरीक्षण करने आए थे तो उन्होंने अस्पताल में सही सूचनाएं नहीं लिखी होने पर नाराजगी जताई थी।
ओपीडी में डॉक्टरों के दिन तय हैं। इसकी सूचना ओपीडी में लगाई जाएगी। आउटसोर्स एजेंसी के प्रबंधक को निर्देश दिए गए हैं कि सभी कर्मचारी अपने गले में कंपनी का कार्ड लटकाकर ही ड्यूटी करें।
- डॉ. एके झा, प्रभारी प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज