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Siddharthnagar News: पर्यटन विकास की राह में अव्यवस्था का रोड़ा

Tue, 27 May 2025 11:26 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 11:26 PM IST
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Chaos hinders tourism development
कपिलवस्तु के पिपरहवा में ​स्थित  स्तूप पार्क पर पर्यटक। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। अन्य बौद्ध स्थलों की तुलना में अब तक उपेक्षित रही भगवान बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु के दिन बहुरने की उम्मीद जगी है। जहां एक तरफ शासन व जिला प्रशासन की पहल पर पर्यटन विभाग विभिन्न परियोजनाओं के लिए यहां भूमि खरीद रहा है।
वहीं बुद्धकालीन अवशेषों के हांगकांग में हो रही नीलामी रुकने के बाद पुरावशेषों की वापसी के लिए सांस्कृतिक मंत्रालय की ओर से शुरू की गई प्रक्रिया से भी यहां विकास की संभावना बढ़ गई है।
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मंगलवार को बौद्ध स्तूपों का दर्शन करने आए पर्यटकों में खोदाई में निकले पिपरहवा रत्न की वापसी की आस दिख रही थी। श्रद्धालु राजकुमार आर्या का कहना था कि अगर पुरावशेष वापस लाए जाते हैं और सुविधाएं विकसित होंगी तो बौद्ध धर्मावलंबियों का आकर्षण बढ़ेगा और बड़े पैमाने पर यहां देशी व विदेशी पर्यटकों का आगमन होगा।
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महात्मा बुद्ध की क्रीड़ास्थली कपिलवस्तु में पर्यटन सुविधाओं की दरकार है। यहां आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए रात में विश्राम, खाने की सुविधा का अभाव है, और परिवहन सुविधाओं की कमी भी खटक रही है। जो परियोजनाएं शुरू हुई हैं, वे भी पूरी नहीं हो पा रही है। इस क्षेत्र में एक भी होटल नहीं है। पर्यटन विभाग का होटल शाक्य भी रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील हो चुका है। कपिलवस्तु पहुंचने वाले पर्यटकों को रात में विश्राम के लिए दूसरे स्थान पर जाना पड़ता है।
इस क्षेत्र में 49 करोड़ रुपये से बुद्धा थीम पार्क बनकर तैयार हुआ है, लेकिन इसके दरवाजे पर ताले लटके हैं। करीब तीन साल देरी से तैयार हुए बुद्धा थीम पार्क को पर्यटकों के लिए खोलने में भी देर हो रही है। कपिलवस्तु क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए 33 एकड़ भूमि खरीदी गई है, शेष भूमि खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। लुंबिनी की तर्ज पर यहां सुविधाएं विकसित करने के लिए कपिलवस्तु में अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता है। हालांकि मंगलवार को यहां आने वाले 112 पर्यटकों में सभी स्थानीय ही थे। उनका कहना था कि कुशीनगर, श्रावस्ती व नेपाल के लुंबिनी समेत अन्य बौद्ध स्थलों की अपेक्षा यहां कोई सुविधा नहीं है। जिससे विदेश से आने वाले पर्यटक यहां नहीं रुकते हैं और अन्य स्थलों पर चले जाते हैं।
उपलब्ध होनी थीं ये सुविधाएं : उत्तर प्रदेश विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम के तहत कपिलवस्तु विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण का गठन हुआ है। इस क्षेत्र में ग्रामीण आबादी एवं आवासीय क्षेत्र के साथ व्यावसायिक केंद्र और पर्यटकों के आवासीय एवं भोजन सुविधा के लिए तीन से पांच सितारा होटल और रेस्टोरेंट बनाने के लिए भूमि निर्धारित की गई थी। प्रदूषण रहित उद्योग, हस्तशिल्प कला केंद्र, शैक्षिक, चिकित्सीय, पुलिस एवं फायर स्टेशन केंद्र की स्थापना के लिए भी भूमि निर्धारण हुआ है। यहां पर्यटक बिहार परिसर, चिंतन मनन उपवन, बौद्ध बिहार मठ एवं मंदिर के अलावा मनोरंजन, रेल पथ व हवाई पट्टी के लिए भी क्षेत्र निर्धारित है।

सांस्कृतिक मंत्रालय ने शुरू की पुरावशेषों की प्रक्रिया : बौद्ध स्थली कपिलवस्तु पिपरहवा में अंग्रेज अफसर विलियम पेप्पे द्वारा वर्ष 1898 खोदाई कर निकाले गए पुरावशेषों को उनके वंशज नीलाम कर रहे थे। हांगकांग में हो रही नीलामी का विरोध शुरू होने के बाद भारत सरकार की तरफ से उसे रोकने के लिए नोटिस जारी किया गया, जिसके बाद नीलामी करने वाली संस्था सोथबी ने घोषणा की कि उसने भारत सरकार से कानूनी नोटिस मिलने के बाद सात मई को हांगकांग में बिक्री के लिए जाने वाले बुद्ध के अवशेषों की नीलामी को स्थगित कर दिया है।
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