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जिपं, वन, और परिवहन कार्यालय पहुंची सीबीआई टीम
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Tue, 31 Oct 2017 10:24 PM IST
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सिद्धार्थनगर। अवैध खनन की जांच को जिले में पहुंची सीबीआई टीम मंगलवार को जिला पंचायत, वन विभाग और परिवहन विभाग में पहुंची। टीम ने विभागीय अफसरों से खनन से जुड़े दस्तावेज मांगे। टीम वन विभाग में घंटों तक अभिलेखों की जांच करती रही। कोर्ट के निर्देश पर जिले में आई सीबीआई की दो सदस्यीय टीम वर्ष 2012 से अब तक हुए खनन के दस्तावेज खंगाल रही है। आशंका है कि अवैध ढंग से खनन करके सरकार को बड़ी राजस्व क्षाति पहुंचाई गई है। सीबीआई की जांच की इस जद में कई रसूखदार लोगों के भी सामने आने के भी आसार हैं।
चौतरफा नदियों से घिरे जिले में अवैध खनन का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। रोक के बावजूद शासन-सत्ता में गहरी पैठ रखने वाले कई रसूखदार धड़ल्ले से खनन कराते रहे हैं। अवैध खनन का मामला कोर्ट में पहुंचा तो उच्च स्तरीय जांच के आदेश हुए। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू की है। सीबीआई के डिप्टी एसपी केपी शर्मा के नेतृत्व में सोमवार की देर शाम पहुंची सीबीआई टीम ने मंगलवार से पड़ताल तेज कर दी है। टीम सबसे पहले जिला पंचायत पहुंची। यहां से बालू परिवहन करने वाले वाहनों से शुल्क वसूली के लिए निर्धारित 15 स्थानों से जुड़े ठेकों की पत्रावली तलब की।
एएमए एके आनंद ने इसके लिए मोहलत मांगी तो टीम ने उन्हें जल्द से जल्द सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद टीम एआरटीओ कार्यालय पहुंची। यहां से वाहनों से जुड़े दस्तावेज मांगे। करीब 11 बजे टीम वन विभाग कार्यालय पहुंची। टीम ने यहां कई घंटे तक अभिलेख खंगाले। इस दौरान जांच को लेकर संबंधित विभाग के अफसरों-कर्मचारियों की सांसे थमी रहीं। सीबीआई टीम जिले में 10 नवंबर तक रहेगी। वर्ष 2012 से अब तक के खनन से संबंधित विभिन्न विभागों की पत्रावली खंगालेगी।
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सूत्रों की मानें तो सीबीआई की इस जांच में खनन से जुड़े विभागों के अफसरों-कर्मचारियों के कारनामे तो उजागर होंगे ही कई ऐसे चेहरे भी बेनकाब होंगे, जिन्होंने ऊंची राजनीतिक पहुंच का लाभ लेकर अकूत कमाई की है। इनमें कुछ चेहरे पूर्ववर्ती सरकार में बेहद प्रभावी भी रहे हैं। जांच के संबंध में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने बताया कि टीम कार्यालय में आई थी। खनन परिवहन शुल्क वसूली वाले स्थानों से संबंधित पत्रावली मांगी है। इसके लिए समय मांगा गया है। जल्द ही सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
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चौतरफा नदियों से घिरे जिले में अवैध खनन का कारोबार लंबे समय से चल रहा है। रोक के बावजूद शासन-सत्ता में गहरी पैठ रखने वाले कई रसूखदार धड़ल्ले से खनन कराते रहे हैं। अवैध खनन का मामला कोर्ट में पहुंचा तो उच्च स्तरीय जांच के आदेश हुए। कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने केस दर्ज कर छानबीन शुरू की है। सीबीआई के डिप्टी एसपी केपी शर्मा के नेतृत्व में सोमवार की देर शाम पहुंची सीबीआई टीम ने मंगलवार से पड़ताल तेज कर दी है। टीम सबसे पहले जिला पंचायत पहुंची। यहां से बालू परिवहन करने वाले वाहनों से शुल्क वसूली के लिए निर्धारित 15 स्थानों से जुड़े ठेकों की पत्रावली तलब की।
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एएमए एके आनंद ने इसके लिए मोहलत मांगी तो टीम ने उन्हें जल्द से जल्द सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। इसके बाद टीम एआरटीओ कार्यालय पहुंची। यहां से वाहनों से जुड़े दस्तावेज मांगे। करीब 11 बजे टीम वन विभाग कार्यालय पहुंची। टीम ने यहां कई घंटे तक अभिलेख खंगाले। इस दौरान जांच को लेकर संबंधित विभाग के अफसरों-कर्मचारियों की सांसे थमी रहीं। सीबीआई टीम जिले में 10 नवंबर तक रहेगी। वर्ष 2012 से अब तक के खनन से संबंधित विभिन्न विभागों की पत्रावली खंगालेगी।
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सूत्रों की मानें तो सीबीआई की इस जांच में खनन से जुड़े विभागों के अफसरों-कर्मचारियों के कारनामे तो उजागर होंगे ही कई ऐसे चेहरे भी बेनकाब होंगे, जिन्होंने ऊंची राजनीतिक पहुंच का लाभ लेकर अकूत कमाई की है। इनमें कुछ चेहरे पूर्ववर्ती सरकार में बेहद प्रभावी भी रहे हैं। जांच के संबंध में जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी ने बताया कि टीम कार्यालय में आई थी। खनन परिवहन शुल्क वसूली वाले स्थानों से संबंधित पत्रावली मांगी है। इसके लिए समय मांगा गया है। जल्द ही सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे।