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मुंबई से आए एचआईवी लेकर, फिर दवा छोड़कर गए कमाने
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मुंबई से आए एचआईवी लेकर, फिर दवा छोड़कर गए कमाने
सिद्धार्थनगर। जिले में करीब 454 अधिक एचआईवी पॉजिटिव लोगों को अपनी सेहत की चिंता नहीं है। उन्होंने एआरटी (एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट) की दवा छोड़ दी है। इनमें 150 से अधिक लोग ऐसे हैं, जो मुंबई, दिल्ली से लौटे तो उनकी रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई थी और उन्होंने एआरटी सेंटर की दवा छोड़कर, फिर महानगरों को लौट गए। स्वास्थ्य विभाग के लोगों को ऐसे लोगों की तलाश है, ताकि उन्हें फिर से दवाएं मुहैया कराई जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 4960 एचआईवी पॉजिटिव मरीज हैं, जिनमें 4280 लोग ही नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। 454 लोगों ने बिना सूचना के ही दवा छोड़ दी है। उनके बताए गए मोबाइल फोन नंबर पर बात नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उनके घर पहुंचते हैं तो परिवार के लोग बताते हैं कि वे कमाने चले गए हैं। ऐसे लोगों के घर पहुंचने वाले कार्यकर्ता पूरी गोपनीयता बरतने के साथ उन्हें परामर्श देकर दवा देने की कोशिश करते हैं। जो लोग कमाने चले गए हैं, उनके बारे में पता लगाना मुश्किल हो गया है।
कहीं भी मिल सकती है दवा
डॉक्टरों के अनुसार, नियमित दवा खाने वाले एचआईवी पॉजिटिव लोगों की सेहत जल्दी खराब नहीं होती है। कई बार गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद लोग दवा लेने आते हैं। इस कारण उनकी जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। लापरवाही करने वाले लोगों से एचआईवी संक्रमण बढ़ने की आशंका बनी रहती है। एआरटी सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है और उसे कमाने के लिए दूसरे शहरों में जाना है तो एआरटी सेंटर से रिपोर्ट लेकर जाए तो देश के किसी भी क्षेत्र में दवा मिल जाएगी। वहां के एआरटी सेंटर से रिक्वेस्ट भेजवा दें तो एआरटी सेंटर से ऑनलाइन रिपोर्ट भेज दी जाएगी और उसे नि:शुल्क दवा मिलेगी।
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सिद्धार्थनगर। जिले में करीब 454 अधिक एचआईवी पॉजिटिव लोगों को अपनी सेहत की चिंता नहीं है। उन्होंने एआरटी (एंटी रिट्रो वायरल ट्रीटमेंट) की दवा छोड़ दी है। इनमें 150 से अधिक लोग ऐसे हैं, जो मुंबई, दिल्ली से लौटे तो उनकी रिपोर्ट एचआईवी पॉजिटिव आई थी और उन्होंने एआरटी सेंटर की दवा छोड़कर, फिर महानगरों को लौट गए। स्वास्थ्य विभाग के लोगों को ऐसे लोगों की तलाश है, ताकि उन्हें फिर से दवाएं मुहैया कराई जा सकें।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 4960 एचआईवी पॉजिटिव मरीज हैं, जिनमें 4280 लोग ही नियमित रूप से दवा ले रहे हैं। 454 लोगों ने बिना सूचना के ही दवा छोड़ दी है। उनके बताए गए मोबाइल फोन नंबर पर बात नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उनके घर पहुंचते हैं तो परिवार के लोग बताते हैं कि वे कमाने चले गए हैं। ऐसे लोगों के घर पहुंचने वाले कार्यकर्ता पूरी गोपनीयता बरतने के साथ उन्हें परामर्श देकर दवा देने की कोशिश करते हैं। जो लोग कमाने चले गए हैं, उनके बारे में पता लगाना मुश्किल हो गया है।
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कहीं भी मिल सकती है दवा
डॉक्टरों के अनुसार, नियमित दवा खाने वाले एचआईवी पॉजिटिव लोगों की सेहत जल्दी खराब नहीं होती है। कई बार गंभीर स्थिति में पहुंचने के बाद लोग दवा लेने आते हैं। इस कारण उनकी जिंदगी खतरे में पड़ जाती है। लापरवाही करने वाले लोगों से एचआईवी संक्रमण बढ़ने की आशंका बनी रहती है। एआरटी सेंटर के नोडल ऑफिसर डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति एचआईवी पॉजिटिव है और उसे कमाने के लिए दूसरे शहरों में जाना है तो एआरटी सेंटर से रिपोर्ट लेकर जाए तो देश के किसी भी क्षेत्र में दवा मिल जाएगी। वहां के एआरटी सेंटर से रिक्वेस्ट भेजवा दें तो एआरटी सेंटर से ऑनलाइन रिपोर्ट भेज दी जाएगी और उसे नि:शुल्क दवा मिलेगी।
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