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Siddharthnagar News: डिजिटल व्यवस्था में सेंधमारी कोटेदार खा रहे हिस्से का राशन

Wed, 22 Jan 2025 10:47 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jan 2025 10:47 PM IST
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Burglars in the digital system are eating their share of the ration.
बांसी क्षेत्र में रासन की दुकान पर डिजिटल मशीन से तौल करते दुकानदार। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। पारदर्शिता पूर्ण राशन वितरण के सरकारी दावे की कोटेदार हवा निकाल रहे हैं। घटतौली रोकने के लिए लाई गई अंगूठे के साथ डिजिटल तौल व्यवस्था में भी सेंध लगा दी है। डिजिटल कांटे पर राशन के बजाय बाट रखकर अंगूठा लगवा लिया जा रहा है। इसके बाद कांटा से खाद्यान तौल में घटतौली करने के साथ- साथ कई बार गरीबों का हिस्सा मार दे रहे हैं, और मांगने पर बताते हैं कि वितरण कर दिया है। क्योंकि अंगूठा लग चुका होता है। ऐसे में उपभोक्ता की कोई सुनता ही नहीं है।
हाल के कुछ दिनों में कोटेदारों के खाद्यान की कालाबाजारी पकड़ी गई, जिसमें किसी ने 100 बोरी तो किसी ने उससे अधिक हजम कर लिया। कोटा निरस्त करके केस भी दर्ज हुआ। यह तो उपभोक्ताओं की ओर से की गई शिकायत पर सामने आ गया। न जाने कितने मामले गांव तक ही दब जाते हैं, और हर माह उपभोक्ताओं का हक हजम कर लिया जा रहा है। ऐसे में अगर उपभोक्ता हैं तो अंगूठा लगाते समय ही राशन लें, अन्यथा हिस्से का राशन हजम हो जाएगा।
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खाद्यान की कालाबाजारी पकड़ने में आने के बाद जब कोटेदार की दुकानों की पड़ताल की गई कि कैसे डिजिटल व्यवस्था का खाद्यान माफिया तोड़ निकल लिए हैं तो चौंकाने वाला सच सामने आया है।
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इस प्रकार से किया जा रहा है वितरण में खेल : आंकड़ों के मुताबिक जिले में 1381 कोटे की दुकानें हैं। इसमें कुछ किन्हीं कारणों से निरस्त हैं या फिर कोई विवाद है। मौजूदा समय में 1281 दुकानों पर राशन का वितरण जिले में किया जा रहा है। पहले की व्यवस्था में ई- पाश मशीन पर अंगूठा लगाने के बाद बाट से कोटेदार तौल करके दे देता था।

इसमें अकसर लोग आरोप लगाते थे कि अंगूठा लगवाने के बाद राशन वितरण नहीं किया। इसके साथ घटतौली करने का भी आरोप लगाते थे। हर तहसील में ऐसी शिकायत पड़ी गई। खाद्यान वितरण में गड़बड़ी रोकने के लिए इलेक्ट्रॉनिक कांटे की व्यवस्था लागू कर दी गई। इसमें ई- पॉश मशीन को डिजिटल कांटे से अटैच किया गया है। इसमें अंगूठा लगाने के बाद तब पर्ची निकलेगी, जब राशन का तौल हो जाएगा। इसके बाद भी राशन का वितरण न करना। कालाबाजारी जैसे मामले में थम नहीं रहे हैं। एक पखवाड़ा के बीच कालाबाजारी के मामले में दो मुकदमे भी दर्ज हुए।
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