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Siddharthnagar News: बूढ़ी राप्ती लाल निशान पार, शोहतगढ़ में हाईटेंशन बिजली का पोल नदी में समाया

Wed, 22 Jul 2026 01:22 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Wed, 22 Jul 2026 01:22 AM IST
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Budhi Rapti crosses danger mark; high-tension electricity pole collapses into the river in Shohratgarh.
उसका बाजार क्षेत्र के ह​थिवड़ताल गांव के टोला तिवारीडीह में बूढ़ी राप्ती नदी का कटान स्थल। संवा
सिद्धार्थनगर। नेपाल समेत जिले में हो रही बारिश से पिछले दो दिनों से बूढ़ी राप्ती और राप्ती समेत अन्य नदियां उफना गईं हैं। मंगलवार सुबह बूढ़ी राप्ती नदी का जलस्तर लाल निशान को पार कर गया। वहीं, शोहरतगढ़ क्षेत्र के नौडिहवा गांव में नदी किनारे लगा हाईटेंशन बिजली का पोल कटान की जद में आकर नदी में समा गया। बाढ़ के मद्देनजर जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मंगलवार को बूढ़ी राप्ती नदी के ककरही-गोनहा तटबंध का निरीक्षण किया।
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पिछले सात दिन से नेपाल के पहाड़ों व जिले में रुक-रुककर हो रही बारिश से नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ रहा है। मंगलवार सुबह आठ बजे बूढ़ी राप्ती का जलस्तर खतरे के निशान 85.650 मीटर को पार कर 85.720 पर पहुंच गया। दोपहर में जलस्तर में कमी देखी गई, जिससे किनारे पर कटान का खतरा बढ़ गया है। उसका क्षेत्र के हथिवड़ताल के टोला तिवारीडीह के पास बूढ़ी राप्ती की कटान से गांव के लोग सहमे हुए हैं।
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दूसरी ओर राप्ती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है लेकिन नदी अभी खतरे के निशान से नीचे बह रही है। इसके साथ ही सोमवार को बानगंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी खतरे के निशान के करीब पहुंच गई, जिससे शोहरतगढ़ स्थित बानगंगा बैराज के सभी फाटक खोलने पड़े। मंगलवार को बानगंगा का जलस्तर नीचे आने लगा। इससे कटान शुरू होने लगा। कूड़ा और घोघी नदियों के जलस्तर में भी लगातार बढ़ोतरी से आसपास के ग्रामीण सहमे हुए हैं।
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बिजली पोल नदी में समाया, पुल पर मंडराया खतरा
शोहरतगढ़। बानगंगा नदी के बढ़े जलस्तर के घटने के साथ किनारे पर स्थित क्षेत्र नौडिहवा गांव के पास कटान तेज हो गई है। सोमवार को नदी की तेज धारा के कारण नदी किनारे लगा हाईटेंशन बिजली का पोल कटान की चपेट में आकर नदी में समा गया। पोल गिरते ही गांव की आपूर्ति ठप हो गई, जिससे ग्रामीणों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। सूचना पर बिजली विभाग की टीम मौके पर पहुंची और क्षतिग्रस्त लाइन का निरीक्षण कर आपूर्ति बहाल करने की कवायद शुरू कर दी। वहीं, मंगलवार को भी कटान से नौडिहवा गांव के पास नदी पर बनी पुल की एप्रोच भी जद में आ गया है। जानकारों का कहना है कि अगर कटान से पुल की एप्रोच के नीचे की मिट्टी कटी तो पुल पर भी खतरा बढ़ जाएगा।

नदी ने बदला रुख तो कटान की जद में आया गांव
नौडिहवा गांव के लोगों का कहना है कि बानगंगा नदी पिछले कई वर्षों से गांव के उत्तर-पश्चिमी छोर पर लगातार कटान कर रही है। हर वर्ष बरसात के दौरान नदी का रुख आबादी की ओर बढ़ जाता है। पिछले वर्ष कटान के चलते ग्रामीण खदेरू का पक्का मकान नदी में समा गया था, जबकि कई अन्य मकान भी खतरे की जद में आ गए थे। इस बार मानसून की पहली तेज धारा ने ही बिजली के पोल को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है। खदेरू, घरभरन, चंद्रकांत, रामकिशन आदि ने विभाग से कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते बचाव कार्य नहीं कराया गया तो कई और मकान, कृषि भूमि और बिजली के पोल नदी में समा सकते हैं।

सक्रिय है बाढ़ चौकियां, नाव तैयार
नदियों के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी को देखते हुए प्रशासन अलर्ट हो गया है। एडीएम गौरव श्रीवास्तव का कहना है कि बाढ़ की तैयारी के मद्देनजर जिले के पांचों तहसीलों में बचाव व सुरक्षा संबंधी तैयारी पूरी कर ली गई है। जिला प्रशासन की ओर से स्थापित 69 बाढ़ चौकियां और 33 बाढ़ शरणालय को चिह्नित कर यहां कर्मियों की तैनाती करते हुए सक्रिय कर दिया गया है। इन बाढ़ चौकियों व शरणालयों पर चिकित्सीय टीम तैनात करने के साथ ही एंबुलेंस के भी इंतजाम किए गए है। वहीं, बाढ़ आपदा को देखते हुए जिले के 93 नावों का इंतजाम किया गया है। साथ ही जरूरत पड़ने पर शेष नाव और स्टीमर के लिए अयोध्या के नाविकों से बात कर ली गई है।


जिलाधिकारी ने किया बांध का निरीक्षण
सिद्धार्थनगर। जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जीएन ने मंगलवार को बूढ़ी राप्ती नदी किनारे स्थित ककरही-गोनहा तटबंध का निरीक्षण किया। उन्होंने बाढ़ बचाव संबंधी तैयारियों का जायजा लेते हुए सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए। साथ ही अधिशासी अभियंता सिंचाई निर्माण खंड सतीश कुमार को निर्देश दिए कि वर्तमान समय में भारी बारिश हो रही है। तटबंधों पर सतत निगरानी करें। संवेदनशील स्थलों का निरीक्षण करते रहें। उन्होंने स्टोर रूम को भी देखा और कहा कि पर्याप्त मात्रा में आवश्यक सामग्री स्टोर में उपलब्ध रहे। इसके अलावा निर्देश दिए कि जलस्तर बढ़ने पर संभावित बाढ़ के दृष्टिगत आवश्यक तैयारियां पूरी कर लें। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

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