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सिहोंरवा में हुआ बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह
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सिहोंरवा में हुआ बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह
इटवा। भारतीय बौद्ध महासभा के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय क्षेत्र के सिहोंरवा गांव में बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। अनुयायियों ने गौतम बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित करके बौद्ध धम्म के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
भारतीय बौद्ध महासभा के जिला उपाध्यक्ष डॉ. जेपी बौद्ध ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने मानव जीवन के कल्याण के लिए अंहिसा के मार्ग को सर्वोत्तम मार्ग बताया है। आज दुनिया के कई देश गौतम बुद्ध के मार्ग को अंगीकार कर उन्नति के शिखर पर हैं। जयकिशोर गौतम ने कहा कि भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर भी अपने आखिरी समय में बुद्ध से प्रभावित होकर महाराष्ट्र के नागपुर में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। बौद्धाचार्य डॉ. शीष कुमार ने कहा कि बौद्ध धर्म एक वैज्ञानिक भारतीय धर्म है।
इसमें छुआछूत, पाखंड, आडंबर, जाति-पात व ऊंच-नीच के लिए कोई स्थान नहीं है। इस दौरान शिक्षक हरिश्चंद्र ने कहा कि आज हमारे समाज का युवा वर्ग शराब का सेवन करके अपना आर्थिक व शारीरिक नुकसान कर रहा है। इससे बचना होगा। इस अवसर पर चैतू गौतम, दिलीप कुमार बौद्ध, सिद्धू बौद्ध, नंदलाल कवि, रामशरन भारती, डॉ. अवधेश चौधरी आदि मौजूद रहे।
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इटवा। भारतीय बौद्ध महासभा के तत्वावधान में बुधवार को स्थानीय क्षेत्र के सिहोंरवा गांव में बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह का आयोजन किया गया। अनुयायियों ने गौतम बुद्ध के चित्र पर पुष्प अर्पित करके बौद्ध धम्म के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।
भारतीय बौद्ध महासभा के जिला उपाध्यक्ष डॉ. जेपी बौद्ध ने कहा कि महात्मा बुद्ध ने मानव जीवन के कल्याण के लिए अंहिसा के मार्ग को सर्वोत्तम मार्ग बताया है। आज दुनिया के कई देश गौतम बुद्ध के मार्ग को अंगीकार कर उन्नति के शिखर पर हैं। जयकिशोर गौतम ने कहा कि भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर भी अपने आखिरी समय में बुद्ध से प्रभावित होकर महाराष्ट्र के नागपुर में बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। बौद्धाचार्य डॉ. शीष कुमार ने कहा कि बौद्ध धर्म एक वैज्ञानिक भारतीय धर्म है।
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इसमें छुआछूत, पाखंड, आडंबर, जाति-पात व ऊंच-नीच के लिए कोई स्थान नहीं है। इस दौरान शिक्षक हरिश्चंद्र ने कहा कि आज हमारे समाज का युवा वर्ग शराब का सेवन करके अपना आर्थिक व शारीरिक नुकसान कर रहा है। इससे बचना होगा। इस अवसर पर चैतू गौतम, दिलीप कुमार बौद्ध, सिद्धू बौद्ध, नंदलाल कवि, रामशरन भारती, डॉ. अवधेश चौधरी आदि मौजूद रहे।
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