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Siddharthnagar News: बदलते मौसम में बढ़ गए ब्राेंकाइटिस के मरीज
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सर्दी, जुकाम, बुखार के बाद खांसी से हो रही है परेशानी
इलाज के दौरान भी दस दिन बाद ठीक हो रही है खांसी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सर्दी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द से उबरने के बाद मरीज पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस की चपेट में आ जा रहे हैं। लोगों को वायरल इस कदर जकड़ रहा है कि खांसी ठीक होने में 10 से 15 दिन लग जा रहे हैं। खांसते-खांसते रोगियों का दम फूल जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग की ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मरीज पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस के ही हैं।
बीते दो सप्ताह से तापमान में बदलाव के साथ सुबह-शाम की हल्की ठंड शुरू हो गई है। न्यूनतम पारा 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम में ये बदलाव लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। दिन में हल्की धूप और रात में सर्द मौसम होने से लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। खांसी और कप के कारण ज्यादा बीमार हुए लोगों को भर्ती होने की नौबत आने लगी है।
माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि सांस की बीमारी से परेशान मरीज को जब पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस हो जाती है तो खांसते-खांसते उनका दम फूल जाता है। उसे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऑक्सीजन लेवल भी गिरने लगता है। ऐसे रोजाना 3-4 मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं। जो मरीज गंभीर होते हुए ऑक्सीजन का सपोर्ट देना पड़ता है।
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निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में निमोनिया की चपेट में आने वाले बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। 15 बेड के वार्ड में लगभग सभी बेड पर बच्चे भर्ती हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि पीआईसीयू में हर दिन 5 से 6 बच्चे भर्ती हो रहे हैं, जबकि निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रहीं हैं।
ठंड बढ़ते ही निमोनिया ने दस्तक दे दी है। निमोनिया का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों में देखा जा रहा है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. फजल खान ने बताया कि निमोनिया में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। बच्चों को सर्दी में निमोनिया अधिक होता है। सही इलाज न होने पर निमोनिया परेशान का सबब बन सकता है।
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इलाज के दौरान भी दस दिन बाद ठीक हो रही है खांसी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। सर्दी, जुकाम, बुखार और बदन दर्द से उबरने के बाद मरीज पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस की चपेट में आ जा रहे हैं। लोगों को वायरल इस कदर जकड़ रहा है कि खांसी ठीक होने में 10 से 15 दिन लग जा रहे हैं। खांसते-खांसते रोगियों का दम फूल जा रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग की ओपीडी में 20 से 25 प्रतिशत मरीज पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस के ही हैं।
बीते दो सप्ताह से तापमान में बदलाव के साथ सुबह-शाम की हल्की ठंड शुरू हो गई है। न्यूनतम पारा 14 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। मौसम में ये बदलाव लोगों की सेहत पर भारी पड़ रहा है। दिन में हल्की धूप और रात में सर्द मौसम होने से लोगों की तबीयत बिगड़ रही है। खांसी और कप के कारण ज्यादा बीमार हुए लोगों को भर्ती होने की नौबत आने लगी है।
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माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभाग के डॉ. सीबी चौधरी ने बताया कि सांस की बीमारी से परेशान मरीज को जब पोस्ट वायरल ब्रोंकाइटिस हो जाती है तो खांसते-खांसते उनका दम फूल जाता है। उसे सांस लेने में परेशानी होने लगती है। ऑक्सीजन लेवल भी गिरने लगता है। ऐसे रोजाना 3-4 मरीज मेडिकल कॉलेज में भर्ती हो रहे हैं। जो मरीज गंभीर होते हुए ऑक्सीजन का सपोर्ट देना पड़ता है।
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निमोनिया की चपेट में आ रहे बच्चे
सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के पीआईसीयू में निमोनिया की चपेट में आने वाले बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं। 15 बेड के वार्ड में लगभग सभी बेड पर बच्चे भर्ती हैं। असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नम्रता चौधरी ने बताया कि पीआईसीयू में हर दिन 5 से 6 बच्चे भर्ती हो रहे हैं, जबकि निजी अस्पतालों की ओपीडी में मरीजों की लंबी-लंबी कतारें लग रहीं हैं।
ठंड बढ़ते ही निमोनिया ने दस्तक दे दी है। निमोनिया का सबसे अधिक असर छोटे बच्चों में देखा जा रहा है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. फजल खान ने बताया कि निमोनिया में फेफड़ों में संक्रमण हो जाता है। बच्चों को सर्दी में निमोनिया अधिक होता है। सही इलाज न होने पर निमोनिया परेशान का सबब बन सकता है।