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सदन में उठाया कपिलवस्तु में बुद्ध का अस्थि कलश लाने का मुद्दा
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सदन में उठाया बुद्ध का अस्थि कलश लाने का मुद्दा
सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु में खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुओं में से एक अस्थित कलश को दिल्ली के म्यूजियम से कपिलवस्तु स्थित बौद्ध संग्रहालय में लाने का मुद्दा उठाया।
सोमवार को भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में सत्र के दौरान नियम 377 के अधीन सूचना के तहत अवगत कराया कि भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु बौद्ध धर्म के मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आने में अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्हें वहां के इतिहास जानने की जिज्ञासा होती है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना की है। यहां कपिलवस्तु में भारतीय पुरातत्व व कोलकाता विश्वविद्यालय के समस्त खुदाई से प्राप्त वस्तुओं को उक्त संग्रहालय में रखा गया है। यहां से खुदाई में प्राप्त दो अस्थि कलश वर्तमान समय में राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में रखे हुए हैं, जबकि बुद्ध ने जीवन के प्रारंभिक 29 वर्ष कपिलवस्तु में ही व्यतीत किए थे। इसलिए बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए कपिलवस्तु अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि एक अस्थि कलश वहां से राष्ट्रीय संग्रहालय पिपरहवा कपिलवस्तु में स्थापित कर दी जाए तो बौद्ध धर्म को मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष सारनाथ, कपिलवस्तु, कुशीनगर, श्रावस्ती के साथ-साथ अस्थि कलश के भी दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त कर सकेंगे। जिसके चलते देश व प्रदेश को काफी विदेशी मुद्रा से राजस्व में वृद्धि भी होगी। उन्होंने भारत सरकार से ठोस कदम उठाए जाने का अनुरोध किया है।
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सिद्धार्थनगर। डुमरियागंज के सांसद जगदंबिका पाल ने भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु में खुदाई के दौरान प्राप्त वस्तुओं में से एक अस्थित कलश को दिल्ली के म्यूजियम से कपिलवस्तु स्थित बौद्ध संग्रहालय में लाने का मुद्दा उठाया।
सोमवार को भाजपा सांसद जगदंबिका पाल ने लोकसभा में सत्र के दौरान नियम 377 के अधीन सूचना के तहत अवगत कराया कि भगवान गौतम बुद्ध की जन्मस्थली कपिलवस्तु बौद्ध धर्म के मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष आने में अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्हें वहां के इतिहास जानने की जिज्ञासा होती है। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय संग्रहालय की स्थापना की है। यहां कपिलवस्तु में भारतीय पुरातत्व व कोलकाता विश्वविद्यालय के समस्त खुदाई से प्राप्त वस्तुओं को उक्त संग्रहालय में रखा गया है। यहां से खुदाई में प्राप्त दो अस्थि कलश वर्तमान समय में राष्ट्रीय संग्रहालय दिल्ली में रखे हुए हैं, जबकि बुद्ध ने जीवन के प्रारंभिक 29 वर्ष कपिलवस्तु में ही व्यतीत किए थे। इसलिए बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए कपिलवस्तु अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि एक अस्थि कलश वहां से राष्ट्रीय संग्रहालय पिपरहवा कपिलवस्तु में स्थापित कर दी जाए तो बौद्ध धर्म को मानने वाले लाखों पर्यटक प्रतिवर्ष सारनाथ, कपिलवस्तु, कुशीनगर, श्रावस्ती के साथ-साथ अस्थि कलश के भी दर्शन करने का सौभाग्य प्राप्त कर सकेंगे। जिसके चलते देश व प्रदेश को काफी विदेशी मुद्रा से राजस्व में वृद्धि भी होगी। उन्होंने भारत सरकार से ठोस कदम उठाए जाने का अनुरोध किया है।
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