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निकाय चुनाव : वार्डों के आरक्षण पर टिकी निगाहें
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Updated Sun, 29 Oct 2017 10:27 PM IST
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वोटिंग के लिए कतार में इंतजार करते मतदाता
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
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सिद्धार्थनगर। निकाय चुनाव के समर में कूदने वाले दावेदारों की निगाहें अब वार्डों के आरक्षण पर टिकी हुई हैं। चुनाव की घोषणा के बाद भी अब तक आरक्षण की सूची अंतिम रूप से फाइनल न होने को लेकर ऊहापोह बना हुआ है। चुनावी वैतरणी में डुबकी लगाने को आतुर दावेदार अपने प्रचार अभियान को गति नहीं दे पा रहे। उन्हें आशंका है कि कहीं आरक्षण अनुकूल न हुआ तो सारी कोशिशों पर पानी फिर जाएगा। पूर्व में जारी सूची पर दाखिल 57 आपत्तियों से भी उनकी उम्मीदें हैं।
जिले में निकाय चुनाव तीसरे चरण के तहत 29 नवंबर को होना है। इसकी प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो जाएगी। इसमें चंद दिन शेष हैं, मगर आरक्षण की सूची स्पष्ट न होने से वार्ड सभासद के दावेदारों में संशय बना हुआ है। पोस्टर-बैनर से लगातार प्रचार-प्रसार करते आ रहे दावेदार आरक्षण को लेकर भयभीत हैं। करीब एक पखवाड़ा पूर्व जारी आरक्षण की अनंतिम सूची ने कइयों की हसरत पर पानी फेर दिया था। जिस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए वह वर्षों से मेहनत कर जमीन तैयार करते आ रहे हैं। वहां का आरक्षण उनके विपरीत हो चुका है। इसके बाद से उनकी गतिविधियां सुस्त हो गई हैं। ऐसे में उन्होंने अनंतिम सूची पर आपत्ति भी डाली थी।
उन्हें उम्मीद है कि आरक्षण में बदलाव होगा। उधर, तमाम नए चेहरे अनुकूल आरक्षण देख चुनाव लड़ने के लिए हाथ-पैर मारने लगे हैं। अब ऐन वक्त पर आरक्षण बदला तो उन्हें मायूस होना पड़ेगा। ऊहापोह की इस स्थिति से उबरने के लिए अब सबकी निगाहें वार्ड आरक्षण की सूची पर ही टिकी हुई हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो एक-दो दिनों में आरक्षण की अंतिम सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी। इसके आधार पर ही चुनाव कराए जाएंगे।
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जिले में निकाय चुनाव तीसरे चरण के तहत 29 नवंबर को होना है। इसकी प्रक्रिया 4 नवंबर से शुरू हो जाएगी। इसमें चंद दिन शेष हैं, मगर आरक्षण की सूची स्पष्ट न होने से वार्ड सभासद के दावेदारों में संशय बना हुआ है। पोस्टर-बैनर से लगातार प्रचार-प्रसार करते आ रहे दावेदार आरक्षण को लेकर भयभीत हैं। करीब एक पखवाड़ा पूर्व जारी आरक्षण की अनंतिम सूची ने कइयों की हसरत पर पानी फेर दिया था। जिस वार्ड से चुनाव लड़ने के लिए वह वर्षों से मेहनत कर जमीन तैयार करते आ रहे हैं। वहां का आरक्षण उनके विपरीत हो चुका है। इसके बाद से उनकी गतिविधियां सुस्त हो गई हैं। ऐसे में उन्होंने अनंतिम सूची पर आपत्ति भी डाली थी।
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उन्हें उम्मीद है कि आरक्षण में बदलाव होगा। उधर, तमाम नए चेहरे अनुकूल आरक्षण देख चुनाव लड़ने के लिए हाथ-पैर मारने लगे हैं। अब ऐन वक्त पर आरक्षण बदला तो उन्हें मायूस होना पड़ेगा। ऊहापोह की इस स्थिति से उबरने के लिए अब सबकी निगाहें वार्ड आरक्षण की सूची पर ही टिकी हुई हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो एक-दो दिनों में आरक्षण की अंतिम सूची सार्वजनिक कर दी जाएगी। इसके आधार पर ही चुनाव कराए जाएंगे।
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