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राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत बोध पुस्तक का विमोचन

Sun, 21 Mar 2021 12:17 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 21 Mar 2021 12:17 AM IST
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bharat bodh book opened
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भारत बोध पुस्तक का विमोचन करते मुख्य अतिथि के रूप में बेसिक शिक्षा ? - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
राष्ट्रीय संगोष्ठी में भारत बोध पुस्तक का विमोचन
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भारतीय इतिहास लेखन परंपरा : नवीन परिप्रेक्ष्य विषय पर दो दिवसीय संगोष्ठी शुरू
देश को परम वैभव के शिखर पर पहुंचाएगा इतिहासकारों का संकलन : बेसिक शिक्षा मंत्री
संवाद न्यूज एजेंसी
कपिलवस्तु (सिद्धार्थनगर)। माधव संस्कृति न्यास, नई दिल्ली के तत्वावधान में सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में शनिवार को भारतीय इतिहास लेखन परंपरा : नवीन परिप्रेक्ष्य विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि आजादी के बाद इतिहास के संकलन का कार्य हो रहा है। देश को परम वैभव के शिखर पर ले जाने में युवा इतिहासकारों का संकलन कारगर साबित होगा। वहीं, इस अवसर पर भारत बोध पुस्तक सहित आठ पुस्तकों का विमोचन किया गया।
इस दौरान माखन लाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, नोएडा परिसर में सहायक प्राध्यापक डॉ. सौरभ मालवीय की लिखित पुस्तक भारत बोध समेत आठ अलग-अलग लेखकों की पुस्तक का मंत्री व कुलपति द्वारा विमोचन किया गया। डॉ. द्विवेदी ने कहा कि भारत को पिछड़े और सपेरों का देश कहा गया है। इस विसंगति को दूर करने का कार्य जारी है। भारत के स्वर्णिम इतिहास का संकलन हो रहा है। महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय (वर्धा, महाराष्ट्र) के कुलपति प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कहा कि युवा इतिहासकार भारत का इतिहास लिख सकते हैं। भारत का इतिहास उत्तान पाद, राम कृष्ण, समुद्र गुप्त, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, राम और कृष्ण से है।
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अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के संगठन सचिव डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने कहा कि अभी तक जिस इतिहास को भारत वर्ष में हम पढ़ते और पढ़ाते हैं। वह दासता के प्रतिरूप का इतिहास है। सही इतिहास कभी उसके वास्तविक स्वरूप में प्रस्तुत नहीं किया गया। नालंदा विश्वविद्यालय (बिहार) के कुलपति प्रो. वैद्यनाथ लाभ ने कहा कि डार्विन की परिकल्पना में बंदर से मनुष्य बनना बताया गया है। जबकि ब्रह्मा से मनुष्य की रचना हुई है। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि भारत का इतिहास केवल राजा रजवाड़ों और उनके ऐसे आराम का इतिहास नहीं है। संचालन आईसीएचआर नई दिल्ली के निदेशक डॉ. ओमजी उपाध्याय और आभार डॉ. सच्चिदानंद चौबे ने किया। आशा दुबे, डॉ. सौरभ मालवीय, सौरभ मिश्रा आनंद समेत 19 प्रांतों के 300 से अधिक विषय विशेषज्ञ एवं इतिहासकार मौजूद रहे।
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