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Siddharthnagar News: मशरूम उगाकर बीना ने बनाया तरक्की का रास्ता

Sun, 01 Oct 2023 02:09 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Sun, 01 Oct 2023 02:09 AM IST
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Beena created a path to progress by growing mushrooms.
औराताल क्षेत्र के हो रही मशरूम की खेती। संवाद
सिद्धार्थनगर। जिस गांव में लोगों की आमदनी का जरिया खेती किसानी थी, उसी गांव की बीना सिंह ने मशरूम उगाकर तरक्की का रास्ता बना लिया। यू ट्यूब में अपलोड वीडियो देखकर उन्होंने मशरूम की खेती का सपना देखा और दो साल बाद ही वह दूसरों में रोजगार बांटने लायक हो गई हैं। क्षेत्र में वह हुनर से कामयाबी की नजीर बन गई है।
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डुमरियागंज के औराताल क्षेत्र के बदलपुर की 28 साल की बीना सिंह ने एक साल पहले सरकारी अनुदान पर नौ लाख के प्रोजेक्ट से मशरूम शेड बनाया है। अब सीजन में उनके यहां 12 से 15 लोगों को रोजगार भी मिल रहा है, जबकि क्षेत्र के लोग भी वहां ताजा और अच्छा मशरूम खरीदने के लिए पहुंचते हैं।
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हाईस्कूल पास बीना सिंह ने बताया कि उन्होंने दो साल पहले यू ट्यूब देखा तो घर बैठे ही कुछ करने का तरीका मन में आया। उसके बाद उन्होंने अपने व्यवसायी पति संदीप सिंह से सहयोग मांगा और वे उनके पति ने उद्यान विभाग के अंतर्गत 10 दिन का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने घर के कमरे में मशरूम की खेती शुरू की। इसमें आमदनी अच्छी तो उन्होंने एक साल बाद ही मशरूम को शेड बनाया। वह बताती है कि एक साल में 9-10 से दस लाख रुपये का मशरूम बिक जाता है, जिसमें करीब 30 प्रतिशत बचत है।
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अब एसी प्लांट लगाने की तैयारी
बीना सिंह ने बताया कि सभी मौसम में मशरूम उगाने के लिए एसी प्लांट लगाने की तैयारी की है, लेकिन क्षेत्र में बिजली की लो वोल्टेज समस्या बन रही है। उन्होंने अक्तूबर में मशरूम खेती शुरू करने की तैयारी की है। कंपोस्ट खाद बनाई जा रही है। नवंबर से मार्च तक उनके मशरूम पैदा होता है। हर दिन 50 किग्रा से 2 क्विंटल तक मशरूम तैयार होता है। उसे महिला श्रमिकों के माध्यम से 200 ग्राम के पैकेट बनाए जाते हैं। एक दिन में 1500 से 20000 रुपये का मशरूम तैयार होता है। यहां ठंड के सीजन में ही मशरूम तैयार होता है, क्योंकि गर्मी में कवक सूख जाते हैं।

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बिजली नहीं, जेनरेटर का भरोसा
मशरूम उगाने वाली बीना सिंह ने बताया कि क्षेत्र में लंबी लाइन होने के कारण लो वोल्टेज है, जबकि 12 से 14 घंटे ही बिजली मिल रही है। मशरूम में निर्धारित समय पर दिन में दो बार पानी का छिड़काव किया जाता है। छिड़काव के दौरान बिजली चली गई तो काम बंद नहीं होता है, उसके लिए जेनरेटर का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में बिजली की समस्या दूर करने के लिए वह बिजली अधिकारियों से बात करेंगी। लो वोल्टेज की समस्या दूर हो तो एसी प्लांट बनाने का रास्ता साफ हो जाएगा।

औराताल क्षेत्र के हो रही मशरूम की खेती। संवाद

औराताल क्षेत्र के हो रही मशरूम की खेती। संवाद

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