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Siddharthnagar News: रहें होशियार...मिलावटी मसाला कर सकता है बीमार

Tue, 21 Jan 2025 11:12 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jan 2025 11:12 PM IST
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Be careful...adulterated spices can make you sick
शहर के एक दुकान पर सजा हुआ मसाला। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। सहालग के दिनों में मिठाई व पनीर के साथ ही अब मसालों में भी मिलावट होने लगी है। इससे लोगों की सेहत बिगड़ने के साथ ही धंधेबाजों की चांदी है।
मिलावट इस कदर बढ़ गई है कि खाद्य विभाग से लिए जा रहे नमूने भी हर माह फेल हो रहे हैं, जबकि मसाले की मात्रा बढ़ाने के लिए धंधेबाज काली मिर्च में पपीता ताे जीरा में सोया मिला रहे है। जो ग्राहकों को ठगने के साथ ही सेहत के लिए भी नुकसानदायक है।
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पिछले दिनों खाद्य विभाग से मसाले के लिए 11 सेंपल में छह की रिपोर्ट भी आई है। इसमें से दो मानक के अनुरूप पाई गई, जबकि एक सेंपल अनसेफ मिला है। ऐसे में मिलावटखोरों ने हर खाने पीने वाली वस्तुओं में लागत से अधिक मुनाफा कमाने का रास्ता खोज लिया है। मिलावटखोर इन मसालों में इतनी बारीकी से मिलावट करते हैं, कि उसकी पहचान आसान नहीं है।
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सूत्रों की मानें तो मसालों में सबसे ज्यादा उपयोग होने वाली हल्दी, मिर्च, धनियां, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी आदि में अत्यधिक मिलावट की जा रही है। मिर्च पाउडर में भी हानिकारक रंग की मिलावट होती है। बाजार में मिल रहे अरारोट में तो महक होती ही नहीं। उसमें महक हो इसके लिए हींग की खुशबू वाला रसायन मिला दिया जाता है। इससे हींग बहुत उम्दा किस्म की मालूम पड़ती है, लेकिन कुछ समय बाद रसायन की महक उड़कर खत्म हो जाती है। सूत्र बताते हैं कि सोया का डंठल और दक्षिण भारत से आने वाली एक घास को जीरा में मिलाने पर उसमें असली जीरा छांटना बेहद मुश्किल होता है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए घर-घर दालचीनी, शहद आदि का प्रयोग बढ़ा है। इसलिए बाजार में कुछ मसालों की मांग कई गुना बढ़ गई। इसी का फायदा अब धंधेबाज उठा रहे हैं। व्यापारी बताते हैं कि दो से तीन वर्ष पहले दालचीनी की खपत कम होती थी, लेकिन अब इसकी खपत बढ़ गई है। सबसे बड़ा गोरखधंधा दालचीनी को लेकर चल रहा है। दाल चीनी का आयात वियतनाम से होता है, लेकिन लोगों की मांग को देखते हुए चीन की दालचीनी नेपाल के रास्ते पहुंच रही है। थोक में असली दालचीनी 600 रुपये किलोग्राम से अधिक में बिकती है, जबकि नकली दालचीनी 200 से 300 रुपये प्रति किलो आती है। असली दालचीनी का रंग हल्का भूरा होता है, इसे हाथ में लेने पर रंग नहीं छूटता।
सोया का डंठल और दक्षिण भारत के एक खास पौधे की छाल भी जीरा की तरह होती है। उसकी मिलावट कर व्यापारी ग्राहकों को धड़ल्ले से बेच रहे हैं।
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