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सतर्क रहें : दिन ब दिन बढ़ रहे किडनी के रोगी
Thu, 08 Feb 2024 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Thu, 08 Feb 2024 12:53 AM IST
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सिद्धार्थनगर। किडनी के रोगियों की संख्या में दिन ब दिन इजाफा हो रहा है। मरीजों में युवा वर्ग अधिक हैं। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस के लिए पहुंचने वाले मरीजों की संख्या इस बात की पुष्टि कर रहा है। हर माह दो से चार नए मरीज डायलिसिस के लिए नंबर में पहुंच रहे हैं। किडनी के रोगियों की संख्या बढ़ने के पीछे बिगड़ा हुआ खान-पान और अनियमित दिनचर्या चिकित्सक मुख्य वजह बता रहे हैं।
किडनी शरीर का हम अंग है। इसके प्रभावित होने से पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है, ऐसा चिकित्सकों का मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित दिनचर्या और बिगड़े हुए खानपान से लोग कई प्रकार की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इसमें अधिक शराब का सेवन और मानसिक तनाव से बढ़ने वाले ब्लडप्रेशर से लोग किडनी के रोगी हो जा रहे हैं। किडनी इंफेक्शन के साथ ही किडनी फेल होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सक नहीं हैं। लेकिन यहां डायलिसिस की सुविधा पिछले कई सालों से चल रही है। मेडिकल कॉलेज में पहले 10 बेड की डायलिसिस थी। इसलिए मरीज को नंबर लगाना पड़ता था। ऐसे में लोगों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता था। कुछ महीने पहले ही वार्ड 20 बेड का हो गया। मशीन शुरू हो गई हैं। पांच वर्ष पहले की तुलना में मरीजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है।
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मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस यूनिट से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक यहां 116 मरीज पंजीकृत हैं। जबकि पिछले माह मरीजों की संख्या 112 थी। 20 बेड के वार्ड में तीन बेड एचआईवी और दो अन्य बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए आरक्षित है।
मरीजों की नियमित डायलिसिस की जाती है। चिकित्सक की ओर से बताए गए रिपोर्ट के हिसाब से डायलिसिस और ब्लड जांच करवाई जाती है।
-डॉ. सीबी चौधरी, फिजिशियन, नोडल डायलिसिस यूनिट, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
किडनी रोगी रहें सतर्क, इन बातों पर दें ध्यान
किडनी रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसमें युवा वर्ग अधिक है। तनाव बढ़ने से ब्लड प्रेशर और इसके बढ़ने से किडनी पर असर पड़ता है। लगातार दबाव से किडनी जवाब दे देता है। साथ ही शराब और नशीली पदार्थ और पेन किलर के बेतहाशा प्रयोग भी कारण है। किडनी रोग होने पर हाथ पैर और आंखों के पास सूजन और यूरिन में दिक्कत होती है। अगर ऐसा लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
-डॉ. मुजीबुल्लाह अंसारी, डीएम नेफ्रोलॉजी विभाग, सहायक प्रोफेसर, डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ
बेड की स्थिति
3 बेड आरक्षित है। जबकि 17 बेड पर डायलिसिस की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन तीन शिफ्ट में 60 मरीजों को डायलिसिस होती है। इसमें महराजगंज, संतकबीरनगर और बस्ती के भी मरीज यहां आते हैं।
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किडनी शरीर का हम अंग है। इसके प्रभावित होने से पूरा सिस्टम बिगड़ जाता है, ऐसा चिकित्सकों का मानना है। विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित दिनचर्या और बिगड़े हुए खानपान से लोग कई प्रकार की बीमारी का शिकार हो रहे हैं। इसमें अधिक शराब का सेवन और मानसिक तनाव से बढ़ने वाले ब्लडप्रेशर से लोग किडनी के रोगी हो जा रहे हैं। किडनी इंफेक्शन के साथ ही किडनी फेल होने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज में नेफ्रोलॉजी विभाग के चिकित्सक नहीं हैं। लेकिन यहां डायलिसिस की सुविधा पिछले कई सालों से चल रही है। मेडिकल कॉलेज में पहले 10 बेड की डायलिसिस थी। इसलिए मरीज को नंबर लगाना पड़ता था। ऐसे में लोगों को निजी अस्पताल में जाना पड़ता था। कुछ महीने पहले ही वार्ड 20 बेड का हो गया। मशीन शुरू हो गई हैं। पांच वर्ष पहले की तुलना में मरीजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है।
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मेडिकल कॉलेज के डायलिसिस यूनिट से जुड़ी रिपोर्ट के मुताबिक यहां 116 मरीज पंजीकृत हैं। जबकि पिछले माह मरीजों की संख्या 112 थी। 20 बेड के वार्ड में तीन बेड एचआईवी और दो अन्य बीमारी से ग्रसित मरीजों के लिए आरक्षित है।
मरीजों की नियमित डायलिसिस की जाती है। चिकित्सक की ओर से बताए गए रिपोर्ट के हिसाब से डायलिसिस और ब्लड जांच करवाई जाती है।
-डॉ. सीबी चौधरी, फिजिशियन, नोडल डायलिसिस यूनिट, माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज
किडनी रोगी रहें सतर्क, इन बातों पर दें ध्यान
किडनी रोगियों की संख्या बढ़ रही है। इसमें युवा वर्ग अधिक है। तनाव बढ़ने से ब्लड प्रेशर और इसके बढ़ने से किडनी पर असर पड़ता है। लगातार दबाव से किडनी जवाब दे देता है। साथ ही शराब और नशीली पदार्थ और पेन किलर के बेतहाशा प्रयोग भी कारण है। किडनी रोग होने पर हाथ पैर और आंखों के पास सूजन और यूरिन में दिक्कत होती है। अगर ऐसा लक्षण दिखें तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें।
-डॉ. मुजीबुल्लाह अंसारी, डीएम नेफ्रोलॉजी विभाग, सहायक प्रोफेसर, डॉ. राममनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान लखनऊ
बेड की स्थिति
3 बेड आरक्षित है। जबकि 17 बेड पर डायलिसिस की जाती है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रतिदिन तीन शिफ्ट में 60 मरीजों को डायलिसिस होती है। इसमें महराजगंज, संतकबीरनगर और बस्ती के भी मरीज यहां आते हैं।