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Siddharthnagar News: फर्जी एनओसी से स्कूल की मान्यता लेने वाले की जमानत मंजूर

Fri, 03 May 2024 12:51 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Fri, 03 May 2024 12:51 AM IST
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bail accepted of fraud school director
संवाद न्यूज एजेंसी
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सिद्धार्थनगर। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय ने फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्र के आधार पर पकड़ी में सेंट्रल एकेडमी की मान्यता लेने वाले की जमानत मंजूर कर ली है। कोर्ट ने बस्ती जिले के जयप्रकाश तिवारी पुत्र उमाशंकर तिवारी निवासी सिविल लाइन गांधीनगर, थाना कोतवाली की सशर्त जमानत स्वीकार कर ली है। वह गिरफ्तार होकर जेल में बंद था। फर्जीवाड़े का मामला उसका बाजार थाने में दर्ज है।
संयुक्त शिक्षा निदेशक बस्ती मण्डल बस्ती योगेंद्र कुमार सिंह ने प्रबंधक, सेंट्रल एकेडमी पकड़ी उसका रोड के विरुद्ध केस दर्ज करते हुए कार्रवाई करने की मांग करते हुए पुलिस को तहरीर दी थी। जिसमें कहा था कि सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त करने के लिए निर्गत शासनादेश के अनुसार मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति से एनओसी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त किया जाना आवश्यक है। जबकि संस्था सेंट्रल एकेडमी पकड़ी उसका रोड ने सक्षम स्तर से कोई एनओसी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त नहीं किया है और न ही अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए कोई पत्रावली अद्यावधि उपलब्ध कराया है। इसके बावजूद विगत कई वर्षों से सीबीएसई बोर्ड नई दिल्ली से मान्यता प्राप्त कर विद्यालय संचालित है।श्
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प्रकरण सीबीएसई के अधिकृत पोर्टल पर सेंट्रल एकेडमी पकड़ी की ओर से मान्यता प्राप्त करने के लिए अनिल कुमार सागर, तत्कालीन मंडलायुक्त बस्ती के हस्ताक्षर से अनापत्ति प्रमाण 21 जून, 2021 अपलोड किया गया है, किंतु उक्त पत्र आयुक्त बस्ती के कार्यालय के डिस्पैच पंजिका में दर्ज नहीं है। इससे स्पष्ट है कि संस्था ने फर्जी व कूटरचित अनापत्ति प्रमाण पत्र के माध्यम से सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त किया है।
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पुलिस ने जय प्रकाश तिवारी के विरुद्ध केस दर्ज कर विवेचना शुरू की। पुलिस ने 13 अप्रैल को उसे गिरफ्तार किया, जिसे न्यायालय ने अपनी अभिरक्षा में जेल भेज दिया। न्यायालय ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनकर केस डायरी व अन्य प्रपत्रों का अवलोकन किया। कोर्ट ने अभियुक्त का जमानत प्रार्थना-पत्र स्वीकार किए जाने योग्य पाते हुए उसे सशर्त जमानत प्रदान किया की वह किसी अन्य अपराध में लिप्त नहीं होगा, विवेचना में सहयोग करेगा, साक्षियों को परेशान, प्रताड़ित नहीं करेगा और न ही साक्ष्य को प्रभावित करेगा। बयान एवं बहस के स्तर पर अनावश्यक स्थगन नहीं चाहेगा तथा विचारण में पूर्ण सहयोग करेगा।
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