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Siddharthnagar News: हांगकांग में थमी बुद्धकालीन अवशेषों की नीलामी... यहां श्रेय लेने की होड़
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संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। पिपरहवा स्तूप से खनन में प्राप्त बुद्धकालीन अवशेषों की नीलामी की प्रक्रिया हांगकांग में रोक दी गई है, लेकिन अब इसका श्रेय लेने की होड़ स्थानीय स्तर पर होने लगी है। सोथबी कंपनी की तरफ से यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी।
तीन माह से चल रही इस प्रक्रिया की भनक जब प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी को लगी तो पीएम समेत अन्य को नीलामी रुकवाने के लिए पत्र भेजा। इसकी जानकारी होने पर अमर उजाला ने दो मई को इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया।
कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा स्तूप से प्राप्त बुद्धकालीन अवशेष को ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेपे ने 1898 में लगभग 331 रत्न औपनिवेशिक अनुमति से इंग्लैंड ले गया था, जिसे उसके वंशजों द्वारा तीन माह पहले इंग्लैंड की सोथबी नीलामी कंपनी के माध्यम से हांगकांग में सात मई को नीलाम करवाने की तैयारी में जुट गए। वेबसाइट से जानकारी होने पर एक मई को प्राचीन इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी ने पीएम नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों को पत्र भेजकर नीलामी रोकने की मांग की। साथ ही इसकी जानकारी अमर उजाला से साझा की। अमर उजाला ने दो मई को इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद द्विपक्षीय बैठक के दौरान, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यूनाइटेड किंगडम के संस्कृति, मीडिया और खेल राज्य सचिव, माननीय लिसा नंदी के साथ इस मुद्दे को उठाया।
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मंत्री ने अवशेषों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर जोर दिया और नीलामी रोकने और उनके प्रत्यावर्तन के लिए कार्रवाई का आग्रह किया।
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सिद्धार्थनगर। पिपरहवा स्तूप से खनन में प्राप्त बुद्धकालीन अवशेषों की नीलामी की प्रक्रिया हांगकांग में रोक दी गई है, लेकिन अब इसका श्रेय लेने की होड़ स्थानीय स्तर पर होने लगी है। सोथबी कंपनी की तरफ से यह प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी।
तीन माह से चल रही इस प्रक्रिया की भनक जब प्राचीन इतिहास के प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु त्रिपाठी को लगी तो पीएम समेत अन्य को नीलामी रुकवाने के लिए पत्र भेजा। इसकी जानकारी होने पर अमर उजाला ने दो मई को इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया।
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कपिलवस्तु क्षेत्र के पिपरहवा स्तूप से प्राप्त बुद्धकालीन अवशेष को ब्रिटिश इंजीनियर विलियम क्लैक्सटन पेपे ने 1898 में लगभग 331 रत्न औपनिवेशिक अनुमति से इंग्लैंड ले गया था, जिसे उसके वंशजों द्वारा तीन माह पहले इंग्लैंड की सोथबी नीलामी कंपनी के माध्यम से हांगकांग में सात मई को नीलाम करवाने की तैयारी में जुट गए। वेबसाइट से जानकारी होने पर एक मई को प्राचीन इतिहास के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शरदेंदु कुमार त्रिपाठी ने पीएम नरेंद्र मोदी समेत अन्य लोगों को पत्र भेजकर नीलामी रोकने की मांग की। साथ ही इसकी जानकारी अमर उजाला से साझा की। अमर उजाला ने दो मई को इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसके बाद द्विपक्षीय बैठक के दौरान, संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने यूनाइटेड किंगडम के संस्कृति, मीडिया और खेल राज्य सचिव, माननीय लिसा नंदी के साथ इस मुद्दे को उठाया।
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मंत्री ने अवशेषों के सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व पर जोर दिया और नीलामी रोकने और उनके प्रत्यावर्तन के लिए कार्रवाई का आग्रह किया।