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पशुपालन को बनाएं जिविकोपार्जन का माध्यम, विभाग दे रहा मदद
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पशुपालन को बनाएं जिविकोपार्जन का माध्यम, विभाग दे रहा मदद
नाबार्ड और मनरेगा की योजनाओं का मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। कोरोना के संकट काल में महानगरों से नौकरी व्यवसाय छोड़कर गांव लौटे लोगों के लिए पशुपालन स्वावलंबन का एक बेहतर माध्यम हो सकता है। पशुपालन करने वालों को नाबार्ड केसीसी की सुविधा दे रहा है। वहीं मनरेगा से व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत अन्य सहूलियत मिलेगी।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्ञानप्रकाश ने बताया कि नाबार्ड की ओर से दो भैंस पालने के इच्छुक किसानों को 80 हजार रुपये का क्रेडिट कार्ड बनाया जा रहा है। इस पर महज चार प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज जमा करना होता है। बीडीओ सुशील कुमार अग्रहरि ने बताया कि मनरेगा में व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए कई योजनाएं हैं। वर्मीशेड बनाने के लिए पशुपालकों को दो लाख तक मदद की जा सकती है। गाय शेड, नांद और यूरिनल टैंक बनाने के लिए मनरेगा में प्रावधान है। जिसमें दो गाय के शेड निर्माण के लिए करीब 1.25 लाख रुपये की मदद दी जा रही है। पशु पालक को ब्लॉक मुख्यालय पर आवेदन कर सकते हैैं।
यह है लाभार्थी के चयन का आधार
मनरेगा अधिनियम में अनुसूचित जाति, जनजाति, घुमंतू जाति के परिवार, महिला प्रधान वाले परिवार, दिव्यांग प्रधान वाले परिवार, भूमि सुधारों के लाभार्थी, प्रधानमंत्री आवास योजना के अधीन लाभार्थी इस योजना के पात्र हो सकते हैं।
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वर्मी कंपोस्ट भी है जीविकोपार्जन का जरिया
पशुपालक अगर चाहे तो वर्मी कंपोस्ट को भी जीविकोपार्जन का जरिया बना सकते हैं। गोबर, कचरा, सब्जी, फलों के अवशेष से तैयार वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल किचन गार्डन में खूब हो रहा है। एक किलो के पैकेट 20 से 50 रुपये में बिक रहे हैं। खेतों वर्मी कंपोस्ट डालने उर्वरा शक्ति और भूमिगत जलस्तर में वृद्धि होती हैं।
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नाबार्ड और मनरेगा की योजनाओं का मिलेगा लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। कोरोना के संकट काल में महानगरों से नौकरी व्यवसाय छोड़कर गांव लौटे लोगों के लिए पशुपालन स्वावलंबन का एक बेहतर माध्यम हो सकता है। पशुपालन करने वालों को नाबार्ड केसीसी की सुविधा दे रहा है। वहीं मनरेगा से व्यक्तिगत लाभार्थी योजना के तहत अन्य सहूलियत मिलेगी।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. ज्ञानप्रकाश ने बताया कि नाबार्ड की ओर से दो भैंस पालने के इच्छुक किसानों को 80 हजार रुपये का क्रेडिट कार्ड बनाया जा रहा है। इस पर महज चार प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज जमा करना होता है। बीडीओ सुशील कुमार अग्रहरि ने बताया कि मनरेगा में व्यक्तिगत लाभ लेने के लिए कई योजनाएं हैं। वर्मीशेड बनाने के लिए पशुपालकों को दो लाख तक मदद की जा सकती है। गाय शेड, नांद और यूरिनल टैंक बनाने के लिए मनरेगा में प्रावधान है। जिसमें दो गाय के शेड निर्माण के लिए करीब 1.25 लाख रुपये की मदद दी जा रही है। पशु पालक को ब्लॉक मुख्यालय पर आवेदन कर सकते हैैं।
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यह है लाभार्थी के चयन का आधार
मनरेगा अधिनियम में अनुसूचित जाति, जनजाति, घुमंतू जाति के परिवार, महिला प्रधान वाले परिवार, दिव्यांग प्रधान वाले परिवार, भूमि सुधारों के लाभार्थी, प्रधानमंत्री आवास योजना के अधीन लाभार्थी इस योजना के पात्र हो सकते हैं।
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वर्मी कंपोस्ट भी है जीविकोपार्जन का जरिया
पशुपालक अगर चाहे तो वर्मी कंपोस्ट को भी जीविकोपार्जन का जरिया बना सकते हैं। गोबर, कचरा, सब्जी, फलों के अवशेष से तैयार वर्मी कंपोस्ट का इस्तेमाल किचन गार्डन में खूब हो रहा है। एक किलो के पैकेट 20 से 50 रुपये में बिक रहे हैं। खेतों वर्मी कंपोस्ट डालने उर्वरा शक्ति और भूमिगत जलस्तर में वृद्धि होती हैं।