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सिंघाड़ा की खेती से देंगी गरीबी को मात
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सिंघाड़ा की खेती से देंगी गरीबी को मात
20 हजार कर्ज लेकर पति के साथ कर रही सिंघाड़ा की खेती
अब तक आठ हजार रुपये का सिंघाड़ा बेच चुकी है मालती
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौली की रहने वालीं मालती देवी ने सिंघाड़ा की खेती कर के गरीबी के दलदल में परिवार को उबार लिया। इस काम में स्वयं सहायता समूह से भरपूर मदद मिली।
डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौली की रहने वाली मालती देवी के पति बाहर मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में घर आने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। जिसके बाद मालती ने भीमराव आंबेडकर स्वयं सहायता समूह से 20 हजार कर्ज लेकर पति के साथ मिलकर गांव के ही एक तालाब में सिंघाड़ा की खेती करने लगी। वर्तमान में मालती और उसके पति की मेहनत रंग लाती दिख रही है। सिंघाड़ा के पौधों में फल लगने लगे हैं। मालती का कहना है कि उसने दो-तीन बार सिंघाड़ा तोड़कर करीब आठ हजार रुपये तक बेचकर कमाई कर चुकी हैं। बताया कि गांव से छह किमी. की दूरी पर कुछ दिन बाद भारतभारी का मेला लगने वाला है। जहां वह कच्चा और उबला हुआ सिंघाड़ा बेचेंगी। जहां 25 से 40 रुपये किलो बिकने की उम्मीद है। इस खेती से उसे बेहतर आमदनी की उम्मीद है। जिसके बाद वह समूह से लिया कर्ज वापस कर देंगी। खंड विकास अधिकारी सुधीर अग्रहरि ने बताया कि मालती देवी अन्य समूह की सदस्यों के लिए प्रेरणा साबित हो रही है। वह पति के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह से मदद लेकर सिंघाड़ा की खेती कर एक बेहतर उदाहरण पेश किया है। सिजनल खेती कर वह अच्छी आमदनी कर परिवार की आर्थिक संकट को दूर करेगी।
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20 हजार कर्ज लेकर पति के साथ कर रही सिंघाड़ा की खेती
अब तक आठ हजार रुपये का सिंघाड़ा बेच चुकी है मालती
संवाद न्यूज एजेंसी
डुमरियागंज। ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौली की रहने वालीं मालती देवी ने सिंघाड़ा की खेती कर के गरीबी के दलदल में परिवार को उबार लिया। इस काम में स्वयं सहायता समूह से भरपूर मदद मिली।
डुमरियागंज ब्लॉक क्षेत्र के लोहरौली की रहने वाली मालती देवी के पति बाहर मुंबई में रहकर मेहनत मजदूरी करते थे। लॉकडाउन में घर आने के बाद परिवार पर आर्थिक संकट खड़ा हो गया। जिसके बाद मालती ने भीमराव आंबेडकर स्वयं सहायता समूह से 20 हजार कर्ज लेकर पति के साथ मिलकर गांव के ही एक तालाब में सिंघाड़ा की खेती करने लगी। वर्तमान में मालती और उसके पति की मेहनत रंग लाती दिख रही है। सिंघाड़ा के पौधों में फल लगने लगे हैं। मालती का कहना है कि उसने दो-तीन बार सिंघाड़ा तोड़कर करीब आठ हजार रुपये तक बेचकर कमाई कर चुकी हैं। बताया कि गांव से छह किमी. की दूरी पर कुछ दिन बाद भारतभारी का मेला लगने वाला है। जहां वह कच्चा और उबला हुआ सिंघाड़ा बेचेंगी। जहां 25 से 40 रुपये किलो बिकने की उम्मीद है। इस खेती से उसे बेहतर आमदनी की उम्मीद है। जिसके बाद वह समूह से लिया कर्ज वापस कर देंगी। खंड विकास अधिकारी सुधीर अग्रहरि ने बताया कि मालती देवी अन्य समूह की सदस्यों के लिए प्रेरणा साबित हो रही है। वह पति के साथ मिलकर स्वयं सहायता समूह से मदद लेकर सिंघाड़ा की खेती कर एक बेहतर उदाहरण पेश किया है। सिजनल खेती कर वह अच्छी आमदनी कर परिवार की आर्थिक संकट को दूर करेगी।
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