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Siddharthnagar News: संस्थागत प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को 24 घंटे अस्पताल में रोका जाएगा
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17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित
नियम का पालन नहीं किया गया या लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
महराजगंज। अब सरकारी अस्पतालों में होने वाले संस्थागत प्रसव के बाद नवजात शिशु और उसकी मां (जच्चा-बच्चा) को कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में रोका जाएगा। यह व्यवस्था जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित जटिलता से बचाने के लिए लागू की जा रही है। सीएमओ ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि यदि इस नियम का पालन नहीं किया गया या लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इनमें ब्लॉक स्तर के सीएचसी पर 24 घंटे डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। अब सभी संस्थागत प्रसव इन्हीं केंद्रों पर की जाएगी और प्रसव के बाद माताओं और नवजात शिशुओं को निर्धारित समय तक निगरानी में रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
पिछले कुछ वर्षो में संस्थागत प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है लेकिन कई मामलों में प्रसव के तुरंत बाद महिलाओं को घर भेज दिए जाने से जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ जाती थी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां परिवहन की सुविधाएं सीमित हैं और घर पर चिकित्सीय देखभाल की कमी रहती है, वहां ऐसी घटनाओं का जोखिम अधिक होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 24 घंटे तक अस्पताल में रहने से डॉक्टरों और नर्सों को यह सुनिश्चित करने का पर्याप्त समय मिलेगा कि मां और शिशु दोनों की स्थिति सामान्य है।
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स्वास्थ्य विभाग का कहा कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अलग वार्ड में रखा जाएगा जहां चिकित्सकों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं की टीम लगातार उनकी निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस सेवा की भी व्यवस्था रहेगी ताकि किसी गंभीर स्थिति में रोगी को तत्काल जिला अस्पताल या उच्च केंद्र पर रेफर किया जा सके।
वर्जन ..............
जिले के सरकारी अस्पतालों में जिन जच्चा-बच्चा की स्थिति 24 घंटे बाद पूरी तरह स्थिर पाई जाएगी, केवल उन्हें ही घर भेजा जाएगा। यदि किसी प्रकार की चिकित्सीय समस्या पाई जाती है तो मरीज को और अधिक समय तक अस्पताल में रखा जाएगा।
- डॉ. श्रीकांत शुक्ला, सीएमओ
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नियम का पालन नहीं किया गया या लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
महराजगंज। अब सरकारी अस्पतालों में होने वाले संस्थागत प्रसव के बाद नवजात शिशु और उसकी मां (जच्चा-बच्चा) को कम से कम 24 घंटे तक अस्पताल में रोका जाएगा। यह व्यवस्था जच्चा-बच्चा की सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसी भी संभावित जटिलता से बचाने के लिए लागू की जा रही है। सीएमओ ने सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षकों को इस संबंध में सख्त निर्देश जारी किए हैं। पत्र में कहा गया है कि यदि इस नियम का पालन नहीं किया गया या लापरवाही पाई गई तो संबंधित कर्मी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के अनुसार, जिले में कुल 17 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 40 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। इनमें ब्लॉक स्तर के सीएचसी पर 24 घंटे डिलीवरी की सुविधा उपलब्ध है। अब सभी संस्थागत प्रसव इन्हीं केंद्रों पर की जाएगी और प्रसव के बाद माताओं और नवजात शिशुओं को निर्धारित समय तक निगरानी में रखा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।
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पिछले कुछ वर्षो में संस्थागत प्रसव की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है लेकिन कई मामलों में प्रसव के तुरंत बाद महिलाओं को घर भेज दिए जाने से जच्चा-बच्चा की हालत बिगड़ जाती थी। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जहां परिवहन की सुविधाएं सीमित हैं और घर पर चिकित्सीय देखभाल की कमी रहती है, वहां ऐसी घटनाओं का जोखिम अधिक होता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, 24 घंटे तक अस्पताल में रहने से डॉक्टरों और नर्सों को यह सुनिश्चित करने का पर्याप्त समय मिलेगा कि मां और शिशु दोनों की स्थिति सामान्य है।
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स्वास्थ्य विभाग का कहा कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को अलग वार्ड में रखा जाएगा जहां चिकित्सकों, नर्सों और आशा कार्यकर्ताओं की टीम लगातार उनकी निगरानी करेगी। जरूरत पड़ने पर एंबुलेंस सेवा की भी व्यवस्था रहेगी ताकि किसी गंभीर स्थिति में रोगी को तत्काल जिला अस्पताल या उच्च केंद्र पर रेफर किया जा सके।
वर्जन ..............
जिले के सरकारी अस्पतालों में जिन जच्चा-बच्चा की स्थिति 24 घंटे बाद पूरी तरह स्थिर पाई जाएगी, केवल उन्हें ही घर भेजा जाएगा। यदि किसी प्रकार की चिकित्सीय समस्या पाई जाती है तो मरीज को और अधिक समय तक अस्पताल में रखा जाएगा।
- डॉ. श्रीकांत शुक्ला, सीएमओ