फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Siddharthnagar News ›   Abdominal pain today, ultrasound is being done after three days

Siddharthnagar News: अल्ट्रासाउंड के लिए लगाना पड़ रहा है तीन दिन का नंबर

Fri, 06 Jan 2023 10:40 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 06 Jan 2023 10:40 PM IST
विज्ञापन
Abdominal pain today, ultrasound is being done after three days
जिला अस्पताल में स्थित अल्ट्रासाउंड के बाहर अपनी बारी का इंतजार करते मरीज। संवाद - फोटो : SIDDHARTHNAGAR
पेट दर्द हुआ आज तो अल्ट्रासाउंड हो रहा तीन दिन बाद
विज्ञापन

सिद्धार्थनगर। माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में गर्भवतियों या स्टोन के मरीजों का अल्ट्रासाउंड तीन दिन बाद हो पा रहा है। अस्पताल के चिकित्सक प्रतिदिन औसतन 100 मरीजों को अल्ट्रासाउंड लिख रहे हैं। वहीं, उनको नंबर तीन दिन बाद का मिल रहा है। क्योंकि, अस्पताल में प्रतिदिन केवल 30 मरीजों के ही अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था है। वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा और मिठवल में लगाई गई मशीनों को चलाने वाले डॉक्टर ही नहीं हैं। ऐसे में दोनों मशीनें बेमतलब साबित हो रही हैं।
ऐसे में मरीज अस्पताल में निशुल्क मिलने वाली इस सुविधा के लिए या तो प्राइवेट केंद्र पर जा कर छह से आठ सौ रुपये खर्च कर रहे हैं या तीन से चार दिन इंतजार कर रहे हैं। वहीं, जिले के मिठवल और खेसरहा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर अल्ट्रासाउंड जांच के लिए मशीन का तो उद्घाटन हो गया, लेकिन शुक्रवार को मशीन खुली ही नहीं। न ही जांच के लिए कोई मरीज पहुंचा।
विज्ञापन

सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का प्रयास कर रही है। संसाधन बढ़ा रही है, जिससे लोगों का बेहतर इलाज हो सके। उन्हें सरकारी सेवाओं को लाभ मिल सके, लेकिन सरकार की इस मंशा से हकीकत परे है। कहीं संसाधन हैं तो चलाने वाले नहीं हैं, अगर चलाने वाले हैं तो मशीन ही नहीं है। कुछ यही हाल माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल का है। यहां मेडिकल कॉलेज तो बन गया, लेकिन अब भी लोगों को पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। जांच से लेकर इलाज तक सब किसी तरह से चल रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड की पड़ताल की गई तो यहां पर प्रतिदिन 30 जांच का लक्ष्य रख दिया गया है। जबकि पूर्व में प्रतिदिन 100 मरीजों की जांच जाती थी, लेकिन रिपोर्ट में तकनीकी समस्या आने के बाद मशीन को बढ़ाने के बजाए जांच की संख्या कम कर दी गई। ऐसे में 50- से 70 मरीजों को लौट जाना पड़ता है। यह तो वह प्राइवेट में जाकर जेब खाली करें या फिर अस्पताल में तीन से चार दिन का नंबर लगाकर अपनी बारी का इंतजार करें।
बांसी से पत्नी को लेकर पहुंचे अखिलेश ने बताया कि शुक्रवार को वह तीसरे दिन आए हैं, तब जाकर जांच हो पायी। प्राइवेट में 700 रुपये जांच की फीस लगती है, इसलिए सरकारी में इंतजार किया। वहीं, ओमप्रकाश ने बताया कि उनके पेट में रह रहकर दर्द उठता था। डॉक्टर ने बृहस्पतिवार को अल्ट्रासाउंड जांच लिखी थी। जांच के लिए आए थे, शनिवार को बुलाया गया है। लेकिन अब प्राइवेट में जाना पड़ेगा। ऐसा ही अन्य लोगों का दर्द है। उनका भी यही कहना था कि मेडिकल कॉलेज बन गया, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं।
मेडिकल कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. एके झा ने बताया कि जांच की गुणवत्ता के लिए एक दिन में 30 मरीजों की ही जांच की जा रही है, नई मशीन को क्रय करने का प्रयास किया जा रहा है।
हर गर्भवती की होती है अल्ट्रासाउंड जांच
हर गर्भवती महिला की अल्ट्रासाउंड जांच जरूरी होती है। गर्भ में बच्चा आने से लेकर जन्म तक कम से कम तीन बार जांच होती है, क्योंकि इससे गर्भ में पलने वाले बच्चे के बारे में सही जानकारी मिलती है कि वह सही स्थिति में है या नहीं। उसका वजन सही है या नहीं। उसी हिसाब से उसका इलाज किया जाता है, दवाएं चलाई जाती है।
- डॉ. संगीता पांडेय, स्त्री रोग विशेषज्ञ
गर्भवती महिलाओं की संख्या रहती है अधिक
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सबसे अधिक गर्भवती महिलाएं आती हैं। इनकी संख्या लगभग प्रतिदिन 50 के करीब रहती है। इसके अलावा पुरुष मरीज और अन्य प्रकार पेट से संबंधित मरीज आते हैं। लेकिन, इसमें महिलाएं तत्काल जांच न होने के कारण वह प्राइवेट जांच केंद्र पर जाते हैं। प्राइवेट में जाने पर उन्हें छह से आठ सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
उद्घाटन तक सीमित रही मशीन
लोगों को जांच के लिए प्राइवेट केंद्रों पर न जाना पड़े। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र खेसरहा में अल्ट्रासाउंड मशीन का शुभारंभ बांसी विधायक जयप्रताप सिंह ने बृहस्पतिवार को कर दिया। लेकिन, यह मशीन शुक्रवार को भी नहीं शुरू हुई। इसके साथ ही मशीन को चलाने वाले विशेषज्ञ तैनाती के बाद से ही गायब चल रहे हैं।

मिठवल में नहीं खुला मशीन के कमरे का ताला
घोसियारी प्रतिनिधि के मुताबिक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिठवल में बुधवार को विधायक जय प्रताप सिंह ने अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे मशीन का उद्घाटन किया था। जिससे क्षेत्र के जरूरतमंदों को, खास करके महिलाओं को जांच के लिए बाहर न जाना पड़े। शुक्रवार को अस्पताल की पड़ताल की गई तो जहां मशीन है, उस कमरे का ताला ही नहीं खुला, जबकि एक ही व्यक्ति का एक्स-रे हुआ। सीएमओ डॉ. बीके अग्रवाल ने बताया कि एक रेडियोलॉजिस्ट के माध्यम से दोनों अस्पताल में तीन-तीन दिन के शिफ्ट में जांच की जाएगी। मिठवल में शुक्रवार को जांच क्यों नहीं हुई, इसकी जांच की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed