{"_id":"6999f8b6c12370776f0eb5aa","slug":"a-trap-of-fraud-in-the-name-of-offers-avoid-fake-links-and-apps-otherwise-you-will-become-bankrupt-siddharthnagar-news-c-227-1-sdn1035-153919-2026-02-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Siddharthnagar News: ऑफर के नाम पर ठगी का जाल...फर्जी लिंक और एप से बचें, वरना हो जाएंगे कंगाल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Siddharthnagar News: ऑफर के नाम पर ठगी का जाल...फर्जी लिंक और एप से बचें, वरना हो जाएंगे कंगाल
Sat, 21 Feb 2026 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Sat, 21 Feb 2026 11:55 PM IST
विज्ञापन
- ऑनलाइन खरीदारी करते समय रहें सतर्क, ब्लू टिक और आधिकारिक वेबसाइट पर भरोसा करें
- छोटे दुकानदार और नए डिजिटल यूजर सबसे ज्यादा निशाने पर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। त्योहारी सीजन में अगर आप ऑनलाइन खरीदारी का मूड बना रहे हैं तो थोड़ी सतर्कता भी बरतें। जरा सी चूक आपकी जेब और बैंक अकाउंट को खाली कर सकती है। इसलिए मोबाइल या ईमेल पर आने वाले ऑफर के लिंक की पड़ताल करने के बाद ही उसे खोले। इन दिनों साइबर ठग फिर से इन्हीं फर्जी लिंक के जरिये ठगी की वारदातों को अंजाम देने में जुट गए हैं।
17 दिसंबर 2025 को कपिलवस्तु कोतवाली की पुलिस ने 1.07 करोड़ रुपये की ठगी का केस खुलासा किया था। पकड़े गए पांच आरोपियों में दो आईटी के जानकार थे। उनके पास टेक्निकल डिग्री थी। वे सभी इसी तरह त्योहारों पर ऑफर देकर लोगों से ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पिछली होली और दीपावली में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
इस बार भी त्योहारी सीजन को देखते हुए तमाम ई-कॉमर्स कंपनियों ने सेल लगाई है। भागदौड़ भरी जिंदगी में अब लोग घर का सामान, कपड़े, जूते-चप्पल और गृह साजसज्जा के सामान की ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसे सीजन आते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। कंपनियों के उत्पादों पर फर्जी ऑफर के विज्ञापन इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफाॅर्म पर प्रचलित होते हैं, जिनके झांसे में आकर लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं। इसलिए मोबाइल पर एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये आने वाले ऑफर लिंक से बचें और ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही खरीदारी करें।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- --
फर्जी लिंक व वेबसाइट बनाकर कर रहे ठगी
- आईटी एक्सपर्ट पीयूष अग्रवाल बताते हैं साइबर ठगों ने इन दिनों ये नया तरीका निकाल रखा है। फर्जी लिंक भेजकर आपसे फर्जी वेबसाइट एक्सेस कराई जाती है। मोबाइल हैक करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई के जरिये बैंक खाते से पैसे निकाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों रिमोट एप का भी साइबर ठग खूब इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों बीस से ज्यादा रिमोट एप खूब चलन में हैं। इन मोबाइल एप को लिंक भेजकर इंस्टॉल कर दिया जाता है। उसके बाद मोबाइल का पूरा कंट्रोल दूसरे के पास चला जाता है। मोबाइल पर पहले ऑनलाइन खरीदारी की मेगा सेल नाम से कॉल और लिंक आ रहा है।
-- -- -- -- -- -- -
ब्लू टिक वेरिफिकेशन जरूर करें
- साइबर विशेषज्ञ संजय शुक्ल बताते हैं कि किसी भी कंपनी का ऑफर स्वीकार करने से पहले कंपनी के सोशल मीडिया अकाउंट की अवश्य जांच कर लें। कंपनियों के सोशल मीडिया अकाउंट के ज्यादातर मामले में ब्लू टिक वाले यानी वेरिफाइड होते हैं। इन पर दी गई जानकारी आधिकारिक होती है। फर्जी कंपनियों के लिए इस ब्लू टिक को पाना आसान नहीं होता, लिहाजा इस पर भरोसा किया जा सकता है। इसके बाद भी यदि कुछ शंका हो तो कंपनी के आसपास की शाखा या शोरूम पर जाकर ऑनलाइन बाजार के लिए दिए जा रहे ऑफर की जानकारी अवश्य लें। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार के दामों में आ रहे अंतर और फायदे के बारे में बेहतर जानकारी भी मिल जाएगी।
-- -- -- -- --
‘गूगल प्ले स्टोर पर भी कई फर्जी एप’
- पुलिस साइबर सेल की सलाह है कि किसी भी ऑनलाइन ऑफर के मैसेज पर क्लिक करने से बचें। कंपनी के एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने से पहले सावधानी बरतें। गूगल प्ले स्टोर पर भी असली कंपनी के जैसे दिखते हुए कई एप उपलब्ध होते हैं। असली एप की पहचान न होने और गलत एप पर रजिस्टर करते समय आप कई गंभीर जानकारियां ठगों तक पहुंचा देते हैं। किसी कंपनी के ऑफर के बारे में पता करने के लिए उसके कस्टमर केयर पर फोन करना अच्छा विकल्प होता है।
-- -- -- -- -- -- -- -
‘सावधानी से बच सकते हैं फर्जीवाड़े से’
- निजी बैंक के अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि यदि ग्राहक सावधान रहे तो फर्जीवाडे़ से बचा जा सकता है। ऑनलाइन सर्च करते समय किसी कंपनी की वेबसाइट पर तभी क्लिक करना चाहिए, जब इसकी वेबसाइट एचटीपीपीएस के साथ खुल रही हो। अधिकारिक कंपनियां इसी डोमेन एक्सटेंशन का इस्तेमाल करती हैं और इस पर फर्जीवाड़े की संभावना काफी कम होती है।
-- -- -- -- -- -- -
यह बरतें सावधानियां
- ठगी होने पर 24 घंटे के अंदर संबंधित बैंक या फिर साइबर सेल को सूचना दें।
- साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर फोन करे। इससे रकम ट्रांसफर होने से तत्काल रोक दी जाती है।
- गूगल से नंबर निकाल कर किसी ई-कॉमर्स कंपनी, डॉक्टर या किसी का भी कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने से बचें।
- त्योहारी मौसम में लुभावने आफरों के चक्कर में आने से बचें।
- अंजान लिंक को अपलोड करने से बचे।
- कोई संदिग्ध संदेश या कॉल मिले तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाने पर संपर्क करें।
- वेबसाइट. www. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवाएं।
-- -- -- -- -- --
कोट.....
- साइबर ठगी के मामले में लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोग पहले तो प्रलोभन में न आएं। अगर ठगी का शिकार हो जा रहे हैं तो बिना देरी किए संबंधित थाने में शिकायत तत्काल दर्ज करवाएं। क्योंकि, जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराएंगे, धनराशि की वापसी की उम्मीद उतनी अधिक रहती है।
- अभिषेक महाजन, एसपी
विज्ञापन
- छोटे दुकानदार और नए डिजिटल यूजर सबसे ज्यादा निशाने पर
संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। त्योहारी सीजन में अगर आप ऑनलाइन खरीदारी का मूड बना रहे हैं तो थोड़ी सतर्कता भी बरतें। जरा सी चूक आपकी जेब और बैंक अकाउंट को खाली कर सकती है। इसलिए मोबाइल या ईमेल पर आने वाले ऑफर के लिंक की पड़ताल करने के बाद ही उसे खोले। इन दिनों साइबर ठग फिर से इन्हीं फर्जी लिंक के जरिये ठगी की वारदातों को अंजाम देने में जुट गए हैं।
17 दिसंबर 2025 को कपिलवस्तु कोतवाली की पुलिस ने 1.07 करोड़ रुपये की ठगी का केस खुलासा किया था। पकड़े गए पांच आरोपियों में दो आईटी के जानकार थे। उनके पास टेक्निकल डिग्री थी। वे सभी इसी तरह त्योहारों पर ऑफर देकर लोगों से ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। पिछली होली और दीपावली में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं।
विज्ञापन
इस बार भी त्योहारी सीजन को देखते हुए तमाम ई-कॉमर्स कंपनियों ने सेल लगाई है। भागदौड़ भरी जिंदगी में अब लोग घर का सामान, कपड़े, जूते-चप्पल और गृह साजसज्जा के सामान की ऑनलाइन खरीदारी करते हैं। जानकार बताते हैं कि ऐसे सीजन आते ही साइबर ठग भी सक्रिय हो जाते हैं। कंपनियों के उत्पादों पर फर्जी ऑफर के विज्ञापन इंटरनेट मीडिया के विभिन्न प्लेटफाॅर्म पर प्रचलित होते हैं, जिनके झांसे में आकर लोग ठगी के शिकार हो जाते हैं। इसलिए मोबाइल पर एसएमएस या व्हाट्सएप के जरिये आने वाले ऑफर लिंक से बचें और ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट से ही खरीदारी करें।
विज्ञापन
फर्जी लिंक व वेबसाइट बनाकर कर रहे ठगी
- आईटी एक्सपर्ट पीयूष अग्रवाल बताते हैं साइबर ठगों ने इन दिनों ये नया तरीका निकाल रखा है। फर्जी लिंक भेजकर आपसे फर्जी वेबसाइट एक्सेस कराई जाती है। मोबाइल हैक करके क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई के जरिये बैंक खाते से पैसे निकाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों रिमोट एप का भी साइबर ठग खूब इस्तेमाल करते हैं। इन दिनों बीस से ज्यादा रिमोट एप खूब चलन में हैं। इन मोबाइल एप को लिंक भेजकर इंस्टॉल कर दिया जाता है। उसके बाद मोबाइल का पूरा कंट्रोल दूसरे के पास चला जाता है। मोबाइल पर पहले ऑनलाइन खरीदारी की मेगा सेल नाम से कॉल और लिंक आ रहा है।
ब्लू टिक वेरिफिकेशन जरूर करें
- साइबर विशेषज्ञ संजय शुक्ल बताते हैं कि किसी भी कंपनी का ऑफर स्वीकार करने से पहले कंपनी के सोशल मीडिया अकाउंट की अवश्य जांच कर लें। कंपनियों के सोशल मीडिया अकाउंट के ज्यादातर मामले में ब्लू टिक वाले यानी वेरिफाइड होते हैं। इन पर दी गई जानकारी आधिकारिक होती है। फर्जी कंपनियों के लिए इस ब्लू टिक को पाना आसान नहीं होता, लिहाजा इस पर भरोसा किया जा सकता है। इसके बाद भी यदि कुछ शंका हो तो कंपनी के आसपास की शाखा या शोरूम पर जाकर ऑनलाइन बाजार के लिए दिए जा रहे ऑफर की जानकारी अवश्य लें। इससे ऑनलाइन और ऑफलाइन बाजार के दामों में आ रहे अंतर और फायदे के बारे में बेहतर जानकारी भी मिल जाएगी।
‘गूगल प्ले स्टोर पर भी कई फर्जी एप’
- पुलिस साइबर सेल की सलाह है कि किसी भी ऑनलाइन ऑफर के मैसेज पर क्लिक करने से बचें। कंपनी के एप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करने से पहले सावधानी बरतें। गूगल प्ले स्टोर पर भी असली कंपनी के जैसे दिखते हुए कई एप उपलब्ध होते हैं। असली एप की पहचान न होने और गलत एप पर रजिस्टर करते समय आप कई गंभीर जानकारियां ठगों तक पहुंचा देते हैं। किसी कंपनी के ऑफर के बारे में पता करने के लिए उसके कस्टमर केयर पर फोन करना अच्छा विकल्प होता है।
‘सावधानी से बच सकते हैं फर्जीवाड़े से’
- निजी बैंक के अधिकारी अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि यदि ग्राहक सावधान रहे तो फर्जीवाडे़ से बचा जा सकता है। ऑनलाइन सर्च करते समय किसी कंपनी की वेबसाइट पर तभी क्लिक करना चाहिए, जब इसकी वेबसाइट एचटीपीपीएस के साथ खुल रही हो। अधिकारिक कंपनियां इसी डोमेन एक्सटेंशन का इस्तेमाल करती हैं और इस पर फर्जीवाड़े की संभावना काफी कम होती है।
यह बरतें सावधानियां
- ठगी होने पर 24 घंटे के अंदर संबंधित बैंक या फिर साइबर सेल को सूचना दें।
- साइबर हेल्प लाइन नंबर 1930 पर फोन करे। इससे रकम ट्रांसफर होने से तत्काल रोक दी जाती है।
- गूगल से नंबर निकाल कर किसी ई-कॉमर्स कंपनी, डॉक्टर या किसी का भी कस्टमर केयर नंबर पर संपर्क करने से बचें।
- त्योहारी मौसम में लुभावने आफरों के चक्कर में आने से बचें।
- अंजान लिंक को अपलोड करने से बचे।
- कोई संदिग्ध संदेश या कॉल मिले तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी थाने पर संपर्क करें।
- वेबसाइट. www. cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करवाएं।
कोट.....
- साइबर ठगी के मामले में लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। लोग पहले तो प्रलोभन में न आएं। अगर ठगी का शिकार हो जा रहे हैं तो बिना देरी किए संबंधित थाने में शिकायत तत्काल दर्ज करवाएं। क्योंकि, जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराएंगे, धनराशि की वापसी की उम्मीद उतनी अधिक रहती है।
- अभिषेक महाजन, एसपी