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बाढ़ प्रभावित गांवों में चारे का संकट
Siddhartha nagar
Updated Tue, 02 Sep 2014 05:30 AM IST
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सिद्धार्थनगर। जिले में बाढ़ से मची तबाही ने मनुष्यों के साथ ही पशुओं के सामने संकट खड़ा कर दिया है। जिन गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है, वहां फसलें तो बर्बाद हुई ही हैं, चारे भी नष्ट हो गए हैं। भूसे जलमग्न होने से सड़ गए हैं। इससे बाढ़ से पहले ही तबाह हो चुके पशुपालक महंगे दामों पर चारा खरीदने को मजबूर हैं। कभी 800 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला भूसा इस समय 1500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है।
पिछले दिनों बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी में आई बाढ़ से इटवा, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, नौगढ़ और बांसी तहसील क्षेत्रों के कई गांवों में तबाही मची थी। बूढ़ी राप्ती में आई बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे इटवा क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं को खिलाने के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। यहां के पिपरा, इमलिहा, परसोहन, बेलभरिया, मुड़लिया, बैरिहवा, रेहरा खुर्द, भैसाही जंगल, बैरिया खालसा, कठेला सर्की, सिसवा और अमरिहा आदि गांवों के पशुपालक चारे के लिए परेशान हैं। चारे के लिए बोई गई फसल के साथ भूसे भी खराब हो गए हैं। इसके साथ ही यहां के पशुओं में गलाघोंटू की बीमारी तेजी से फैल रही है। इस बीमारी से निजात पाने और पशुओं के चारे का इंतजाम करने के लिए पशुपालकों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
बाढ़ प्रभावित गांव बेलभरिया के घनश्याम चौधरी, छगड़िहवा के चिन्नू और परसोहन के रामकेवल पांडेय कहते हैं कि बाढ़ ने सबकुछ छीन लिया। अब पशुओं को चारा कैसे उपलब्ध कराएं। प्रशासन के लोग भी इस ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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इटवा के पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं में फैल रही बीमारी के इलाज के लिए गठित टीम को निर्देशित किया गया है। पशुओं के इलाज में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी। इसके साथ चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को उचित दाम पर चारा उपलब्ध कराया जाएगा।
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पिछले दिनों बूढ़ी राप्ती और राप्ती नदी में आई बाढ़ से इटवा, शोहरतगढ़, डुमरियागंज, नौगढ़ और बांसी तहसील क्षेत्रों के कई गांवों में तबाही मची थी। बूढ़ी राप्ती में आई बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रहे इटवा क्षेत्र के कई गांवों में पशुओं को खिलाने के लिए चारे का संकट पैदा हो गया है। यहां के पिपरा, इमलिहा, परसोहन, बेलभरिया, मुड़लिया, बैरिहवा, रेहरा खुर्द, भैसाही जंगल, बैरिया खालसा, कठेला सर्की, सिसवा और अमरिहा आदि गांवों के पशुपालक चारे के लिए परेशान हैं। चारे के लिए बोई गई फसल के साथ भूसे भी खराब हो गए हैं। इसके साथ ही यहां के पशुओं में गलाघोंटू की बीमारी तेजी से फैल रही है। इस बीमारी से निजात पाने और पशुओं के चारे का इंतजाम करने के लिए पशुपालकों को काफी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।
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बाढ़ प्रभावित गांव बेलभरिया के घनश्याम चौधरी, छगड़िहवा के चिन्नू और परसोहन के रामकेवल पांडेय कहते हैं कि बाढ़ ने सबकुछ छीन लिया। अब पशुओं को चारा कैसे उपलब्ध कराएं। प्रशासन के लोग भी इस ध्यान नहीं दे रहे हैं।
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इटवा के पशु चिकित्साधिकारी का कहना है कि बाढ़ प्रभावित गांवों में पशुओं में फैल रही बीमारी के इलाज के लिए गठित टीम को निर्देशित किया गया है। पशुओं के इलाज में लापरवाही बरतने पर कार्रवाई होगी। इसके साथ चारे की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को उचित दाम पर चारा उपलब्ध कराया जाएगा।