{"_id":"5cc72dccbdec2207786b80ef","slug":"91556557260-siddharthnagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में आए तो पानी बोतल साथ लाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में आए तो पानी बोतल साथ लाएं
Mon, 29 Apr 2019 11:21 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 29 Apr 2019 11:21 PM IST
विज्ञापन
जिला अस्पताल में खराब पडा वाटर फ्रिज।
- फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। तापमान 40 के पार है। प्यास से हलक सूख रहे हैं। ऐसे में अगर शुद्ध पेयजल न मिले तो प्यास कैसे बुझेगी। यह आसानी से समझा जा सकता है। लेकिन इस बढ़ते तापमान में जिला अस्पताल में शुद्ध पेजयल की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अगर आप जिला अस्पताल जा रहे हैं तो पानी का बोतल साथ लेकर जाएं। कारण जिला अस्पताल में शीतल पेयजल के लिए लगा वॉटर कूलर पिछले नवंबर से खराब पड़ा है। जबकि परिसर में लगा हैंडपंप गर्मी में उबलता हुआ पानी दे रहा है। जिसे पीने की हिम्मत कोई भी नहीं जुटा पा रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार पेयजल की व्यवस्था पर तनिक ध्यान नहीं दे रहे हैं।
जिला अस्पताल मेेें ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और सभी वार्डों में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोगों का आना जाना होता है। जबकि जनरल, सर्जिकल, बर्न, आईसीयू, एसएनसीयू, प्रसूति वार्ड में मरीज व उनके तीमारदार सहित 300 से अधिक लोग चौबीसों घंटे अस्पताल में रहते हैं। अप्रैल की तपती हुई गर्मी से लोग बेहाल हैं। लेकिन अस्पताल में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के मुख्य गेट पर एक हैंडपंप लगा हुआ है। जबकि इमरजेंसी वार्ड के सामने दो टोटी लगी हुई है। सीएमएस रोचस्मति पांडेय ने बताया कि मिट्टी की वजह से फिल्टर खराब हो गया था। नया फिल्टर मंगवाया गया है जिसे जल्द ही लगवा दिया जाएगा।
दवा से लेकर पानी खरीदना मजबूरी
जिला अस्पताल में बहू का इलाज कराने के लिए आई बेलहसा जिगिना धाम गांव निवासी ज्ञाना देवी पानी को बोतल लेकर अस्पताल में घुसती हुई दिखीं। उनसे जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि यहां पानी की किल्लत है। दवा तो खरीदना मजबूरी ही है। यहां पानी भी खरीदकर पीना पड़ रहा है। कारण टोटी और हैंडपंप का पानी गर्म आता है। अन्य कोई व्यवस्था है नहीं। कपिया मिश्र गांव निवासी मीरा का भी कुछ ऐसा ही जवाब था। कहा कि अस्पताल में दवा से लेकर पानी तक सब कुछ खरीदकर लाना पड़ता है। सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है।
विज्ञापन
नवंबर से खराब वॉटर कूलर अब तक नहीं बना
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पास वॉटर कूलर बना है। इससे काफी हद तक लोगों को राहत थी। लेकिन पिछले साल नवंबर से खराब हुए वाटर कूलर को बनवाने की फुरसत महकमे के पास नहीं है। उस समय खराब होने पर महकमे की ओर से यह दलील दी गई थी कि अभी मौसम ठंडा है। ऐसे में जब गर्मी आएगी तो बन जाएगा।
विज्ञापन
जिला अस्पताल मेेें ओपीडी से लेकर इमरजेंसी और सभी वार्डों में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोगों का आना जाना होता है। जबकि जनरल, सर्जिकल, बर्न, आईसीयू, एसएनसीयू, प्रसूति वार्ड में मरीज व उनके तीमारदार सहित 300 से अधिक लोग चौबीसों घंटे अस्पताल में रहते हैं। अप्रैल की तपती हुई गर्मी से लोग बेहाल हैं। लेकिन अस्पताल में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। अस्पताल के मुख्य गेट पर एक हैंडपंप लगा हुआ है। जबकि इमरजेंसी वार्ड के सामने दो टोटी लगी हुई है। सीएमएस रोचस्मति पांडेय ने बताया कि मिट्टी की वजह से फिल्टर खराब हो गया था। नया फिल्टर मंगवाया गया है जिसे जल्द ही लगवा दिया जाएगा।
विज्ञापन
दवा से लेकर पानी खरीदना मजबूरी
जिला अस्पताल में बहू का इलाज कराने के लिए आई बेलहसा जिगिना धाम गांव निवासी ज्ञाना देवी पानी को बोतल लेकर अस्पताल में घुसती हुई दिखीं। उनसे जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि यहां पानी की किल्लत है। दवा तो खरीदना मजबूरी ही है। यहां पानी भी खरीदकर पीना पड़ रहा है। कारण टोटी और हैंडपंप का पानी गर्म आता है। अन्य कोई व्यवस्था है नहीं। कपिया मिश्र गांव निवासी मीरा का भी कुछ ऐसा ही जवाब था। कहा कि अस्पताल में दवा से लेकर पानी तक सब कुछ खरीदकर लाना पड़ता है। सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है।
विज्ञापन
नवंबर से खराब वॉटर कूलर अब तक नहीं बना
जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के पास वॉटर कूलर बना है। इससे काफी हद तक लोगों को राहत थी। लेकिन पिछले साल नवंबर से खराब हुए वाटर कूलर को बनवाने की फुरसत महकमे के पास नहीं है। उस समय खराब होने पर महकमे की ओर से यह दलील दी गई थी कि अभी मौसम ठंडा है। ऐसे में जब गर्मी आएगी तो बन जाएगा।