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गन्ना माफिया पर लगेगा गुंडा एक्ट, दर्ज होगा रासुका
siddharthnagar
Updated Mon, 12 Feb 2018 11:28 PM IST
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सिद्धार्थनगर। सरकारी क्रय केंद्रों के समानांतर अवैध ढंग से गन्ना खरीदने वालों पर गुंडा एक्ट और रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी व गन्ना विभाग के अफसरों को जिम्मेदार बनाया गया है। इस पर अंकुश लगाने के लिए विभागीय अफसरों को क्षेत्र में लगातार भ्रमण करने की भी हिदायत दी गई है।
जिले में बढ़नी, इटवा, खुनियांव, भनवापुर, डुमरियागंज ब्लाक क्षेत्र में गन्ने की खेती प्रमुखता से होती है। यहां के किसानों का गन्ना बस्ती व बलरामपुर की चीनी मिलों के माध्यम से खरीदा जाता है। सीमा से सटे नेपाल के जवाभारी मिल पर भी जिले का गन्ना भेजा जाता रहा है। यह मिल बंद होने के बाद इस बार किसान बस्ती व बलरामपुर की मिलों पर ही निर्भर हैं। दोनों जिलों से दूरी का लाभ लेकर कई स्थानों पर बिचौलिए अवैध रूप से कांटा लगाकर किसानों का गन्ना खरीद लेते हैं। फिर उसे मनमाने ढंग से दूसरे मिल या अन्य स्थानों पर बेचते हैं। इससे न सिर्फ किसान उचित मूल्य पाने से वंचित होते हैं, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत बिचौलियों को गन्ना माफिया की श्रेणी में रखते हुए उन पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शासन के प्रमुख सचिव संजय आर.भूसरेड्डी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सभी गन्ना अधिकारी अपने क्षेत्र में पर्यवेक्षण कर अवैध खरीद पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। अगर कहीं अवैध ढंग से खरीद हो रही है तो उसकी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराते हुए साक्ष्य सहित जिला मजिस्ट्रेट के संज्ञान में दें। ऐसे गन्ना माफिया के खिलाफ गुंडा एक्ट व रासुका के तहत कार्रवाई करते हुए तीन माह के लिए निरुद्ध भी किया जाएगा।
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स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न किए जाने की स्थिति औचक निरीक्षण में सामने आने पर सहायक चीनी आयुक्त व जिला गन्ना अधिकारी को उत्तरदाई मानते हुए उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।जिला गन्ना अधिकारी डीसी गोयल ने बताया कि शासन का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके अनुसार पर्यवेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गन्ना माफियाओं पर कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।
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जिले में बढ़नी, इटवा, खुनियांव, भनवापुर, डुमरियागंज ब्लाक क्षेत्र में गन्ने की खेती प्रमुखता से होती है। यहां के किसानों का गन्ना बस्ती व बलरामपुर की चीनी मिलों के माध्यम से खरीदा जाता है। सीमा से सटे नेपाल के जवाभारी मिल पर भी जिले का गन्ना भेजा जाता रहा है। यह मिल बंद होने के बाद इस बार किसान बस्ती व बलरामपुर की मिलों पर ही निर्भर हैं। दोनों जिलों से दूरी का लाभ लेकर कई स्थानों पर बिचौलिए अवैध रूप से कांटा लगाकर किसानों का गन्ना खरीद लेते हैं। फिर उसे मनमाने ढंग से दूसरे मिल या अन्य स्थानों पर बेचते हैं। इससे न सिर्फ किसान उचित मूल्य पाने से वंचित होते हैं, बल्कि सरकारी खरीद प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
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इस पर अंकुश लगाने के लिए शासन ने नए निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत बिचौलियों को गन्ना माफिया की श्रेणी में रखते हुए उन पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। शासन के प्रमुख सचिव संजय आर.भूसरेड्डी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि सभी गन्ना अधिकारी अपने क्षेत्र में पर्यवेक्षण कर अवैध खरीद पर कार्रवाई सुनिश्चित करें। अगर कहीं अवैध ढंग से खरीद हो रही है तो उसकी फोटोग्राफी व वीडियोग्राफी कराते हुए साक्ष्य सहित जिला मजिस्ट्रेट के संज्ञान में दें। ऐसे गन्ना माफिया के खिलाफ गुंडा एक्ट व रासुका के तहत कार्रवाई करते हुए तीन माह के लिए निरुद्ध भी किया जाएगा।
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स्थानीय स्तर पर प्रभावी कार्रवाई न किए जाने की स्थिति औचक निरीक्षण में सामने आने पर सहायक चीनी आयुक्त व जिला गन्ना अधिकारी को उत्तरदाई मानते हुए उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।जिला गन्ना अधिकारी डीसी गोयल ने बताया कि शासन का निर्देश प्राप्त हुआ है। इसके अनुसार पर्यवेक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। गन्ना माफियाओं पर कार्रवाई में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी।