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साढ़े चार करोड़ के 85 प्रस्ताव सत्यापन में मिले फर्जी
Updated Fri, 11 Aug 2017 10:12 PM IST
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सिद्धार्थनगर। जिम्मेदारों ने मनरेगा को कमाई का जरिया बना लिया है। मनरेगा के तहत सरकारी धन के बंदरबाट की कोशिश का एक और मामला सामने आया है। जिला पंचायत ने वित्तीय सत्र 2017-18 में मनरेगा में कई ऐसे प्रस्ताव तैयार कर दिए, जिन पर अन्य कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से पहले से ही कार्य हो चुका है। एक-दो नहीं, ऐसी 85 परियोजनाएं पकड़ में आई हैं, जिनकी लागत तकरीबन साढ़े 4 करोड़ रुपये हैं। जिला पंचायत के अभियंताओं ने अपने स्तर पर इन परियोजनाओं पर कार्य कराने की हरी झंडी भी दे दी थी। मगर डीएम ने दोबारा सत्यापन कराया तो हकीकत सामने आई। फिलहाल सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया है।
वित्तीय सत्र 2017-18 में जिला पंचायत कार्यालय की ओर से मनरेगा के बजट से 11 करोड़ 84 लाख 75 हजार रुपये की 212 परियोजनाएं प्रेषित की गई थीं। जिला पंचायत के अभियंताओं ने इस्टीमेट तैयार कर इन परियोजनाओं पर कार्य कराने की सहमति दी है। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह नई परियोजनाएं हैं। इन पर पूर्व में कोई कार्य नहीं हुआ है। काफी गड़बड़ियों की शिकायत पर डीएम ने अपने स्तर से दोबारा सत्यापन कराया तो इसमें 85 परियोजनाएं ऐसी पाई गईं, जिस पर किसी अन्य संस्था ने हाल ही में काम कराया था। इनमें सबसे ज्यादा 12 परियोजनाएं बांसी ब्लॉक क्षेत्र की हैं। खेसरहा की 11, मिठवल की 10 और खुनियांव की नौ परियोजनाएं शामिल हैं। इन 85 परियोजनाओं की कुल लागत करीब साढ़े 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जिला पंचायत के तीन अवर अभियंताओं ने इसे अनुमोदित किया था।
सूत्रों का कहना है कि सुनियोजित ढंग से इन परियोजनाओं को स्वीकृत कराकर धनराशि हड़पने की तैयारी थी। इसमें संबंधित जनप्रतिनिधियों व अफसरों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। फिलहाल सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद इन सभी परियोजनाओं को खारिज कर दिया गया है। बड़े पैमाने पर इस अनियमितता के उजागर होने से जिला पंचायत में खलबली मची हुई है। जिला पंचायत के माध्यम से पूर्व में कराए गए कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत, कार्रवाई की मांग
फर्जी प्रस्तावों के माध्यम से मनरेगा के तहत सरकारी धन के बंदरबाट की कोशिश की पोल खुलने के बाद भी जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लिहाजा मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है। भीमापार निवासी देवेश मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को सभी साक्ष्यों समेत पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। आरोप लगाया है कि सरकारी धन हड़पने के मकसद से यह प्रस्ताव तैयार कराए गए थे। लिहाजा इनका अनुमोदन करने वाले अभियंताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2011-12 से 16-17 तक जिला पंचायत के माध्यम से पूर्व में कराए गए सीसी रोड, पुलिया निर्माण, पेंटिंग आदि कार्यों में फर्जी भुगतान का आरोप लगाया है।
सत्यापन में फर्जी मिले यह प्रस्ताव व सत्यापन रिपोर्ट :
* बांसी ब्लॉक में इटवा रोड महुआ कला के पेट्रोल पंप से महुआ खुर्द तक कच्चा मार्ग पर 4.66 लाख रुपये का प्रस्ताव पेश हुआ था। सत्यापन में यहां ग्राम पंचायत से कार्य होता पाया गया।
* मिठवल में मनिकौरा गांव के पूरब बड़की गड्ढे की खुदाई कार्य पर 5.06 लाख का प्रस्ताव था। सत्यापन के दौरान यह कार्य भी ग्राम पंचायत से हो रहा था।
* मिठवल में ही मसिना मंदिर से डड़वा तक कच्चा मार्ग निर्माण के लिए 4.06 लाख का प्रस्ताव था। दो माह पूर्व ही किसी संस्था ने यहां काम कराया था।
* बासापुर स्कूल से बभनपुरवा तक 7.52 लाख रुपये से मिट्टी व खड़ंजा कार्य प्रस्तावित किया गया, जबकि सत्यापन के दौरान यह राजस्व गांव पूरे ब्लॉक में नहीं मिला।
* भनवापुर ब्लॉक अंतर्गत बिस्कोहर में इंटरलॉकिंग कार्य पर 6.50 रुपये का प्रस्ताव था। सत्यापन में काफी प्रयासों के बाद भी यह परियोजना चिह्नित ही नहीं हो सकी।
* खेसरहा में बेलहरी सप्ती मार्ग पर पुराने आटा चक्की से पाकड़ के पेड़ से गांव के पूर्व सड़क पर मिट्टी व इंटरलॉकिंग कार्य 8.62 लाख से प्रस्तावित किया गया था, जबकि सत्यापन में यहां पहले से ही इंटरलॉकिंग लगा पाया गया।
बोले जिम्मेदार
मनरेगा के जिला समन्वयक उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि जिला पंचायत से प्रस्तावित 85 कार्य सत्यापन के दौरान गलत पाए गए हैं। इनमें कई परियोजनाएं ऐसी रही, जिन पर हाल ही में कार्य हुआ था। वहीं, कुछ ऐसी परियोजनाएं भी शामिल की गई जो अन्य कार्यदायी संस्थाओं से स्वीकृत हो चुकी थी। अनियमितताओं के चले जिला पंचायत की परियोजनाओं को स्वीकृति नहीं दी गई है। उधर, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरविंद आनंद का कहना था कि मामला मेरे कार्यभार संभालने से पहले का है। लिहाजा इसकी जानकारी नहीं है।
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वित्तीय सत्र 2017-18 में जिला पंचायत कार्यालय की ओर से मनरेगा के बजट से 11 करोड़ 84 लाख 75 हजार रुपये की 212 परियोजनाएं प्रेषित की गई थीं। जिला पंचायत के अभियंताओं ने इस्टीमेट तैयार कर इन परियोजनाओं पर कार्य कराने की सहमति दी है। अपनी रिपोर्ट में उन्होंने स्पष्ट किया था कि यह नई परियोजनाएं हैं। इन पर पूर्व में कोई कार्य नहीं हुआ है। काफी गड़बड़ियों की शिकायत पर डीएम ने अपने स्तर से दोबारा सत्यापन कराया तो इसमें 85 परियोजनाएं ऐसी पाई गईं, जिस पर किसी अन्य संस्था ने हाल ही में काम कराया था। इनमें सबसे ज्यादा 12 परियोजनाएं बांसी ब्लॉक क्षेत्र की हैं। खेसरहा की 11, मिठवल की 10 और खुनियांव की नौ परियोजनाएं शामिल हैं। इन 85 परियोजनाओं की कुल लागत करीब साढ़े 4 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जिला पंचायत के तीन अवर अभियंताओं ने इसे अनुमोदित किया था।
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सूत्रों का कहना है कि सुनियोजित ढंग से इन परियोजनाओं को स्वीकृत कराकर धनराशि हड़पने की तैयारी थी। इसमें संबंधित जनप्रतिनिधियों व अफसरों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। फिलहाल सत्यापन रिपोर्ट सामने आने के बाद इन सभी परियोजनाओं को खारिज कर दिया गया है। बड़े पैमाने पर इस अनियमितता के उजागर होने से जिला पंचायत में खलबली मची हुई है। जिला पंचायत के माध्यम से पूर्व में कराए गए कार्यों की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
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मुख्यमंत्री को भेजी शिकायत, कार्रवाई की मांग
फर्जी प्रस्तावों के माध्यम से मनरेगा के तहत सरकारी धन के बंदरबाट की कोशिश की पोल खुलने के बाद भी जिम्मेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। लिहाजा मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है। भीमापार निवासी देवेश मणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को सभी साक्ष्यों समेत पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है। आरोप लगाया है कि सरकारी धन हड़पने के मकसद से यह प्रस्ताव तैयार कराए गए थे। लिहाजा इनका अनुमोदन करने वाले अभियंताओं पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2011-12 से 16-17 तक जिला पंचायत के माध्यम से पूर्व में कराए गए सीसी रोड, पुलिया निर्माण, पेंटिंग आदि कार्यों में फर्जी भुगतान का आरोप लगाया है।
सत्यापन में फर्जी मिले यह प्रस्ताव व सत्यापन रिपोर्ट :
* बांसी ब्लॉक में इटवा रोड महुआ कला के पेट्रोल पंप से महुआ खुर्द तक कच्चा मार्ग पर 4.66 लाख रुपये का प्रस्ताव पेश हुआ था। सत्यापन में यहां ग्राम पंचायत से कार्य होता पाया गया।
* मिठवल में मनिकौरा गांव के पूरब बड़की गड्ढे की खुदाई कार्य पर 5.06 लाख का प्रस्ताव था। सत्यापन के दौरान यह कार्य भी ग्राम पंचायत से हो रहा था।
* मिठवल में ही मसिना मंदिर से डड़वा तक कच्चा मार्ग निर्माण के लिए 4.06 लाख का प्रस्ताव था। दो माह पूर्व ही किसी संस्था ने यहां काम कराया था।
* बासापुर स्कूल से बभनपुरवा तक 7.52 लाख रुपये से मिट्टी व खड़ंजा कार्य प्रस्तावित किया गया, जबकि सत्यापन के दौरान यह राजस्व गांव पूरे ब्लॉक में नहीं मिला।
* भनवापुर ब्लॉक अंतर्गत बिस्कोहर में इंटरलॉकिंग कार्य पर 6.50 रुपये का प्रस्ताव था। सत्यापन में काफी प्रयासों के बाद भी यह परियोजना चिह्नित ही नहीं हो सकी।
* खेसरहा में बेलहरी सप्ती मार्ग पर पुराने आटा चक्की से पाकड़ के पेड़ से गांव के पूर्व सड़क पर मिट्टी व इंटरलॉकिंग कार्य 8.62 लाख से प्रस्तावित किया गया था, जबकि सत्यापन में यहां पहले से ही इंटरलॉकिंग लगा पाया गया।
बोले जिम्मेदार
मनरेगा के जिला समन्वयक उमेश चंद्र तिवारी ने बताया कि जिला पंचायत से प्रस्तावित 85 कार्य सत्यापन के दौरान गलत पाए गए हैं। इनमें कई परियोजनाएं ऐसी रही, जिन पर हाल ही में कार्य हुआ था। वहीं, कुछ ऐसी परियोजनाएं भी शामिल की गई जो अन्य कार्यदायी संस्थाओं से स्वीकृत हो चुकी थी। अनियमितताओं के चले जिला पंचायत की परियोजनाओं को स्वीकृति नहीं दी गई है। उधर, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अरविंद आनंद का कहना था कि मामला मेरे कार्यभार संभालने से पहले का है। लिहाजा इसकी जानकारी नहीं है।