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Siddharthnagar News: निस्तारित हुए 91 पारिवारिक मामले, 27 जोड़े साथ रहने को राजी
Mon, 22 May 2023 12:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
Updated Mon, 22 May 2023 12:19 AM IST
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सिद्धार्थनगर। अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय रिंकू जिंदल की कोर्ट में रविवार को आयोजित लोक अदालत में पारिवारिक मामलों से संबंधित 115 पत्रावालियां प्रस्तुत हुईं। इनकी सुनवाई करते हुए उन्होंने 91 पत्रावलियों का निस्तारण किया। न्यायालय के प्रयास से 27 मामलों में पति-पत्नी एक साथ रहने को तैयार हुए। न्यायालय ने विभिन्न मामलों में 99.15 लाख रुपये भरण पोषण की राशि पीड़ितों को प्रदान कराया।
थाना कोतवाली जोगिया क्षेत्र के सिहोरवा गांव निवासी युवती की शादी उसका बाजार थाना क्षेत्र के गांव मुड़िला निवासी युवक के साथ वर्ष 2016 में हुई थी। शादी के तीन वर्ष बाद गौना की रस्म के जरिये वह विदा होकर ससुराल गयी और पत्नी धर्म का पालन करती रही। ससुराल वाले दहेज की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित करते रहे। मांग पूरी न होने के कारण ससुराल वालों ने उसे मारपीटकर घर से निकाल दिया और वह तब से मायके में रह रही है। उसके पास मुकदमा दाखिल करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं बचा था। ऐसे में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद न्यायालय ने उनके बीच सुलह समझौता करवाने के लिए मध्यस्थता की जिससे विवाह टूटे नहीं और पति-पत्नी आपसी सामंजस्यपूर्वक सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर सकें। सुलह-समझौता एवं मध्यस्थता केंद्र में पति-पत्नी एक साथ रहने को राजी हो गए और वहीं से विदा होकर महिला ससुराल चली गयी। जिसके बाद पति-पत्नी ने न्यायालय के समक्ष सुलहनामा दाखिल किया। इसी तरह कोर्ट में अन्य पारिवारिक मामलों का निस्तारण किया गया।
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थाना कोतवाली जोगिया क्षेत्र के सिहोरवा गांव निवासी युवती की शादी उसका बाजार थाना क्षेत्र के गांव मुड़िला निवासी युवक के साथ वर्ष 2016 में हुई थी। शादी के तीन वर्ष बाद गौना की रस्म के जरिये वह विदा होकर ससुराल गयी और पत्नी धर्म का पालन करती रही। ससुराल वाले दहेज की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित करते रहे। मांग पूरी न होने के कारण ससुराल वालों ने उसे मारपीटकर घर से निकाल दिया और वह तब से मायके में रह रही है। उसके पास मुकदमा दाखिल करने के अलावा अन्य विकल्प नहीं बचा था। ऐसे में दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद न्यायालय ने उनके बीच सुलह समझौता करवाने के लिए मध्यस्थता की जिससे विवाह टूटे नहीं और पति-पत्नी आपसी सामंजस्यपूर्वक सुख-शांति से जीवन व्यतीत कर सकें। सुलह-समझौता एवं मध्यस्थता केंद्र में पति-पत्नी एक साथ रहने को राजी हो गए और वहीं से विदा होकर महिला ससुराल चली गयी। जिसके बाद पति-पत्नी ने न्यायालय के समक्ष सुलहनामा दाखिल किया। इसी तरह कोर्ट में अन्य पारिवारिक मामलों का निस्तारण किया गया।
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