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गोशाला खोलकर सरकार बनाएगी किसानों को स्वावलंबी
Tue, 08 Jan 2019 10:42 PM IST
राकेश पांडेय
siddharthnagar
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Published by: राकेश पांडेय
Updated Tue, 08 Jan 2019 10:42 PM IST
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सिद्धार्थनगर। छुट्टा पशुओं से लोगों को निजात दिलाने के लिए अब सरकार गोशाला खोलेगी। इसके लिए स्थानीय किसानों प्रोत्साहित किया जाएगा और उन्हें स्वावलंबी बनाया जाएगा। पहले चरण में ब्लॉक स्तर पर गोशाला खोले जाने की योजना है। डीएम कुणाल सिल्कू ने बताया कि मुख्य सचिव अनूप पांडेय का पत्र मिला है। इसके तहत ब्लॉक स्तर पर गोशाला खोले जाने की योजना है। किसानों के स्वावलंबन के लिए कई कार्य कराने की भी योजना है, जिसे जल्द शुरू किया जाएगा। इसके तहत आश्रय स्थलों के स्वावलंबन हेतु उत्तर प्रदेश राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग सहित सूक्ष्म लघु एवं उद्यम विभाग का सहयोग भी लिया जाएगा।
मंडी परिषद और आबकारी विभाग करेंगे सहयोग
शासन की ओर से गोशाला खोले जाने के बाद प्रस्तावित कार्य पर धनराशि के खर्च की जिम्मेदारी मंडी परिषद और आबकारी विभाग को सौंपी गई है। मंडी शुल्क से प्राप्त राशि से दो प्रतिशत की धनराशि खर्च की जाएगी। इसके अलावा आबकारी विभाग के सहयोग से गोवंश आश्रय स्थलों की स्थापना, व्यवस्था, संचालन सहित अन्य मदों में धनराशि खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन यूपीडा आदि संस्थाओं द्वारा किए जा रहे टोल टैक्स में 0.5 प्रतिशत की धनराशि गो-कल्याण सेस के रूप में खर्च की जाएगी।
जैविक कृषि और बागवानी को दिया जाएगा बढ़ावा, गोबर के कंडे बेचने की भी है योजना
प्रथम चरण में ब्लॉकों में गोशाला खोले जाएंगे। इसके बाद ब्लॉक के आसपास के किसानों को गोशाला चलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अगर किसान गोशाला चलाने के इच्छुक होंगे, तो उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग सहित ग्राम्य विकास विभाग की ओर से स्वावलंबी बनाया जाएगा। इसके तहत किसानों को गोबर और गोमूत्र पर आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी की विधि बताई जाएगी। अगर किसान इच्छुक नहीं होते है तो अन्य को इस योजना का लाभ अन्य लोगों को सरकार देगी। गोशाला में विविध विभागों के सहयोग से बायोगैस, वर्मी कंपोस्ट, पंचगव्य आदि बनाए जाएंगे। इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी की विधि किसानों को बताई जाएगी। गोशाला के गोबर व गोमूत्र से बने खाद एवं कीटनाशक को बेचा जाएगा। गोबर के बने कंडों को भी बेचने की योजना है।
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मंडी परिषद और आबकारी विभाग करेंगे सहयोग
शासन की ओर से गोशाला खोले जाने के बाद प्रस्तावित कार्य पर धनराशि के खर्च की जिम्मेदारी मंडी परिषद और आबकारी विभाग को सौंपी गई है। मंडी शुल्क से प्राप्त राशि से दो प्रतिशत की धनराशि खर्च की जाएगी। इसके अलावा आबकारी विभाग के सहयोग से गोवंश आश्रय स्थलों की स्थापना, व्यवस्था, संचालन सहित अन्य मदों में धनराशि खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य सरकार के अधीन यूपीडा आदि संस्थाओं द्वारा किए जा रहे टोल टैक्स में 0.5 प्रतिशत की धनराशि गो-कल्याण सेस के रूप में खर्च की जाएगी।
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जैविक कृषि और बागवानी को दिया जाएगा बढ़ावा, गोबर के कंडे बेचने की भी है योजना
प्रथम चरण में ब्लॉकों में गोशाला खोले जाएंगे। इसके बाद ब्लॉक के आसपास के किसानों को गोशाला चलने के लिए प्रेरित किया जाएगा। अगर किसान गोशाला चलाने के इच्छुक होंगे, तो उन्हें खादी एवं ग्रामोद्योग सहित ग्राम्य विकास विभाग की ओर से स्वावलंबी बनाया जाएगा। इसके तहत किसानों को गोबर और गोमूत्र पर आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी की विधि बताई जाएगी। अगर किसान इच्छुक नहीं होते है तो अन्य को इस योजना का लाभ अन्य लोगों को सरकार देगी। गोशाला में विविध विभागों के सहयोग से बायोगैस, वर्मी कंपोस्ट, पंचगव्य आदि बनाए जाएंगे। इसके साथ ही गोबर और गोमूत्र आधारित जैविक कृषि एवं बागवानी की विधि किसानों को बताई जाएगी। गोशाला के गोबर व गोमूत्र से बने खाद एवं कीटनाशक को बेचा जाएगा। गोबर के बने कंडों को भी बेचने की योजना है।
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