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Siddharthnagar News: 63 बच्चों के चेहरे पर दोबारा लौटेगी मुस्कान, सर्जरी से सही हाेंगे अंग

Thu, 02 Apr 2026 01:19 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, सिद्धार्थनगर Updated Thu, 02 Apr 2026 01:19 AM IST
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63 baby smiles back on faces, limbs coming right from surgery
सिद्धार्थनगर। जन्म से कटे होठ और कटे तालू वाले बच्चों को चेहरे पर जल्द ही मुस्कान लौटेगी। जनपद में 63 ऐसे बच्चे चिह्नित किए गए हैं, जिनकी स्वास्थ्य विभाग और स्माइल ट्रेन संस्था के सहयोग से निशुल्क ऑपरेशन होगा। छह दिनों तक जिले के बच्चों पर आयोजित पंजीकरण और जांच में शिविर में यह बच्चे सर्जरी योग्य पाए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी में इनकी सर्जरी की जाएगी।
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राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम एवं स्माइल ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत जन्मजात कटे होंठ व कटे तालू का निशुल्क ऑपरेशन व उपचार के लिए जिले में विकासखंडवार व जिले पर छह दिवसीय निशुल्क कैंप का आयोजन किया गया। छह दिन चले इस कैंप में 78 मरीजों का पंजीकरण किया गया। इसमें स्वास्थ्य परीक्षण के बाद 63 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया। जन्मजात कटे होंठ और कटे तालू के मरीजों की समस्या व उनके निदान के लिए निशुल्क चिकित्सा सुविधा के लिए यह अभियान चल रहा है। सीएमओ डॉ. आरके चौरसिया ने बताया कि यह नि:शुल्क योजना है। इससे उन बच्चों को लाभ मिलेगा, जिनका जन्म से ही होंठ और तालू कटा होता है। पूर्ण रूप से स्वस्थ बच्चे की मुस्कान ही उसका आत्मविश्वास जगाती है और उस आत्मविश्वास को वापस लाना ही स्माइल ट्रेन संस्था का मुख्य उद्देश्य है।
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विशेषज्ञों ने बताया कि यह जन्मजात विकार अन्य विकारों की अपेक्षा बच्चों में अधिक देखने को मिलता है। माता-पिता शुरुआती दौर में इस बीमारी को समझ नहीं पाते हैं। समय से उचित चिकित्सीय परामर्श न मिलने से इस बीमारी का इलाज मुश्किल हो जाता है। अगर जन्मजात कटे होंठ वाले बच्चे का इलाज पांच से छह माह तक और कटे तालू वाले बच्चे का इलाज नौ से दस माह के दौरान किया जाए तो बच्चे के चेहरे पर जीवन भर मुस्कान रहती है।
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आरबी एस के नोडल अधिकारी डॉ. वीएन चतुर्वेदी ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के शिविर जनमानस की भलाई के लिए लगाए जाएंगे। उन्होंने निशुल्क परीक्षण और पंजीकरण को सफल बनाने में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के डीईआईसी प्रबंधक अनंत प्रकाश, मोबाइल हेल्थ टीमें, आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य विभाग के समस्त कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का सहयोग रहा है, जिससे बच्चों को चिह्नित किया गया है।
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