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एक मशीन से मारेंगे जिले के मच्छर

Thu, 14 Mar 2019 09:22 PM IST
brijesh kumar ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर
ब्यूरो/अमर उजाला सिद्धार्थनगर Published by: brijesh kumar Updated Thu, 14 Mar 2019 09:22 PM IST
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एक मशीन से मारेंगे जिले के मच्छर
सीएमओ कार्यालय में खराब पड़ी फागिंग मशीन। - फोटो : अमर उजाला
सिद्धार्थनगर। मौसम में बदलाव के साथ-साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से क्षेत्र में गंभीर बीमारियों का खतरा मंडराने लगा है। मगर मच्छरों से आमजन की सुरक्षा के लिए विभाग के पास फागिंग मशीन नाकाफी है। 14 की जगह मात्र एक ही मशीन ऐसी है जो चल रही है। 13 मशीनें खराब पड़ी हैं। ऐसे में एक मशीन से विभाग कैसे मच्छर मारेगा यह आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
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जिला सूबे के तराई क्षेत्रों में है। यहां हर वर्ष इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आकर सैकड़ों बच्चे समय से पहले काल के गाल में समा जाते हैं। इसके पीछे पानी के अलावा मच्छर भी प्रमुख कारण माने जाते हैं। लिहाजा इंसेफेलाइटिस प्रभावित गांवों में विशेष स्वच्छता अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की ओर फागिंग कराने का नियम है। साथ ही ग्राम प्रधानों के कहने पर स्वास्थ्य विभाग सामान्य गांवों में भी फागिंग करता है। मगर जिले में फागिंग की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है। मौसम में बदलाव और गर्मी बढ़ने के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। गांव से लेकर शहर तक लोग मच्छरों से परेशान हैं। शाम होते ही मच्छरों का हमला शुरू हो जाता है। इससे बचाव के लिए लोगों को अन्य सहारा लेना पड़ रहा है। मगर स्वास्थ्य विभाग मच्छरों को मारने के लिए अभी तैयार नहीं हो पाया है।
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जेई, एईएस प्रभावित गांवों में फागिंग शुरू नहीं हो पाई है तो सामान्य गांवों में फागिंग करना नामुमकिन सा लगा रहा है। अगर जिम्मेदार जल्द फागिंग कार्य शुरू नहीं किए तो इस वर्ष मच्छरों के प्रकोप से होने वाली बीमारियों से ग्रसित मरीजों की तादाद बढ़ सकती है जो स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बन सकती है।
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इस संबंध में सीएमओ डॉ. आरके मिश्र ने बताया कि फागिंग के लिए खराब पड़ी मशीनों को कानपुर बनाने के लिए भेजा गया है। जल्द ही मशीनें बनकर आ जाएंगी। व्यवस्था प्रभावित नहीं होने दिया जाएगा।

ब्लॉक स्तर पर मशीन की है उपलब्धता
विभाग की माने तो फागिंग करने के लिए ब्लॉक स्तर पर सीएचसी व पीएचसी पर एक-एक मशीन आवंटित हैं। मगर हाल है कि 13 मशीनें खराब हाल में पड़ी हुई हैं। जबकि एक मशीन सही है, जिसके ऊपर नगर पंचायत, नगर पालिका व गांवों में फागिंग करना है। जिले में 1199 गांव हैं। ऐसे में एक मशीन से छिड़काव कैसे होगा यह विभाग के लिए चुनौती है।


मच्छरों के प्रकोप से होती है यह बीमारी
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े जानकारों की माने तो मच्छर के प्रकोप से मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, जिंका फीवर, फिलेरियासिस, इंसेफेलाइटिस जैसी गंभीर बीमारी होती है।
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