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मिड-डे-मिल के बजट की होगी जांच

Fri, 04 Jan 2019 10:06 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Jan 2019 10:06 PM IST
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मिड-डे-मिल के बजट की होगी जांच
मिड-डे-मील के बजट की होगी जांच
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बाराबंकी में चार करोड़ का गबन आने के बाद उठाया गया कदम
बेसिक शिक्षा विभाग की सचिव मनीषा त्रिघटिया ने दिया निर्देश
एक महीने में मांगी गई रिपोर्ट
जिले में मिड-डे-मील के लिए मिला है 13 करोड़ का बजट
अमर उजाला ब्यूरो
सिद्धार्थनगर। जिले के परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील वितरण के लिए आवंटित बजट के उपयोग की जांच होगी। बाराबंकी में चार करोड़ का गबन का मामला सामने आने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। विभाग के सचिव मनीषा त्रिघाटिया ने जांच के निर्देश दिए हैं। इतना ही नहीं उन्होंने एक माह के अंदर पूरी रिपोर्ट भी मांगी है। इस फैसले के बाद से यह माना जा रहा है कि जिले में भी बड़ा गड़बड़झाला खुल सकता है।
प्रदेश भर में लगातार मिड-डे-मिल वितरण के लिए आवंटित बजट के दुरुपयोग की बात सामने आ रही थी। इस बीच बाराबंकी में विभाग के कर्मचारियों द्वारा मिड-डे-मील वितरण के लिए आवंटित चार करोड़ 22 लाख रुपये अपने बैंक के खाते में हस्तांतरित करने का मामले सामने आ गया। इसके बाद से विभाग का मानना है कि ऐसे मामले अन्य जिलों में भी हो सकते है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव मनीषा त्रिघटिया ने मध्याह्न भोजन प्राधिकरण को पत्र भेजकर मिड-डे-मील के लिए आवंटित बजट के खर्च का जांच करने का निर्देश दिया है। इसके लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित करने की भी बात पत्र में कही गई है। शासन के इस फैसले के बाद से जिले में मिलने वाले मिड-डे-मील के 13 करोड़ के बजट की जांच होगी। बीएसए राम सिंह ने बताया कि जांच के लिए निर्देश मिला है। डीएम की अध्यक्षता में बजट समिति गठित होगी। इसके बाद जांच की जाएगी। एमडीएम समन्वयक डीपी श्रीवास्तव ने बताया कि जिले को 13 करोड़ का बजट मिड-डे-मील के लिए मिला है। जांच में पूरा सहयोग किया जाएगा।
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हर दिन आती हैं शिकायतें
मिड-डे-मील के मामले की शिकायत जिले में हर दिन होती रहती है। बीएसए सहित अन्य अधिकारियों के निरीक्षण में भी यह बात सामने आ चुकी है कि मिड-डे-मील अधिकतर स्कूलों में नहीं बनता है। इतना ही नहीं जनप्रतिनिधियों के चौपाल में भी यह बात आए दिन उठती है कि मिड-डे-मील के बजट का दुरुपयोग हो रहा है। लेकिन मामले के जांच की जहमत विभाग उठाना नहीं चाहता था। लेकिन शासन के इस फैसले के बाद से यह माना जा रहा है कि जांच निष्पक्ष होगी।
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