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नई किरण में नहीं पहुंचे काउंसलर, निराश लौटे लोग
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:14 PM IST
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सिद्धार्थनगर। महिला थाना में प्रत्येक रविवार को होने वाली नई किरण सुनवाई इस बार काउंसलरों की अनुपस्थिति की भेंट चढ़ गई। काउंसलर के नहीं आने से एक भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। दूर-दराज से आई महिलाओं को बिना सुनवाई के वापस लौटना पड़ा।
पत्नी-पत्नी के बीच किसी मामले को लेकर चल रहे विवाद को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराए जाने के लिए शासन के निर्देश पर महिला थाने में हर रविवार नई किरण सुनवाई का आयोजन किया जाता है। इसमें महिला थानाध्यक्ष के अलावा एक महिला समेत चार काउंसलर नियुक्त किए गए हैं। जिन्हें दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर सुलह-समझौता कराते हुए दोबारा साथ रहने के लिए राजी कराना होता है। सुलह के बाद भी छह माह तक इन्हें निगरानी करनी होती है कि कहीं महिला का उत्पीड़न तो नहीं हो रहा। इस बार सुनवाई के लिए 18 मामले थे। लोग आए भी थे, लेकिन चार काउंसलर में एक भी उपस्थित नहीं हुए। नतीजा एक भी मामले में सुनवाई नहीं हो पाई। फरियादियों को मायूस लौटना पड़ा। इस बारे में महिला थानाध्यक्ष सुमन त्रिपाठी ने बताया कि काउंसलर विनयकांत मिश्र की तबीयत खराब है। वह अस्पताल में भर्ती हैं। चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव आए, लेकिन कहीं मीटिंग में शामिल होने की बात कह चले गए। अन्य दो लोग आए ही नहीं। यह एक कमेटी है। बिना कमेटी के सदस्यों के मौजूद रहे एक व्यक्ति सुनवाई नहीं कर सकता है।
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पत्नी-पत्नी के बीच किसी मामले को लेकर चल रहे विवाद को सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराए जाने के लिए शासन के निर्देश पर महिला थाने में हर रविवार नई किरण सुनवाई का आयोजन किया जाता है। इसमें महिला थानाध्यक्ष के अलावा एक महिला समेत चार काउंसलर नियुक्त किए गए हैं। जिन्हें दोनों पक्षों को एक साथ बैठाकर सुलह-समझौता कराते हुए दोबारा साथ रहने के लिए राजी कराना होता है। सुलह के बाद भी छह माह तक इन्हें निगरानी करनी होती है कि कहीं महिला का उत्पीड़न तो नहीं हो रहा। इस बार सुनवाई के लिए 18 मामले थे। लोग आए भी थे, लेकिन चार काउंसलर में एक भी उपस्थित नहीं हुए। नतीजा एक भी मामले में सुनवाई नहीं हो पाई। फरियादियों को मायूस लौटना पड़ा। इस बारे में महिला थानाध्यक्ष सुमन त्रिपाठी ने बताया कि काउंसलर विनयकांत मिश्र की तबीयत खराब है। वह अस्पताल में भर्ती हैं। चंद्रप्रकाश श्रीवास्तव आए, लेकिन कहीं मीटिंग में शामिल होने की बात कह चले गए। अन्य दो लोग आए ही नहीं। यह एक कमेटी है। बिना कमेटी के सदस्यों के मौजूद रहे एक व्यक्ति सुनवाई नहीं कर सकता है।
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